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तेज वृद्धि दर के बावूद रियल जीडीपी आकार 2 साल पहले से भी कम :सूर्यकांत शुक्ला


रांची:- क्या देश की अर्थव्यस्था चालू वित्त वर्ष अप्रैल-जून की पहली तिमाही में सचमुच में उतनी तेजी से आगे बढ़ रही है जितनी तेजी का अनुमान सेंट्रल बैंक आरबीआई ने 21.4 प्रतिशत, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया व इको रैप ने 18.5 प्रतिशत या रायटर्स पोल 19-20 प्रतिशत का लगाया है।
आर्थिक मामलों के जानकार सूर्यकांत शुक्ला ने बताया कि देश में अप्रैल-जून तिमाही में जीडीपी ग्रोथ का अधिकारिक आंकड़ा 31 अगस्त को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय जारी करेगा। विकास दर के अधिकारिक आंकड़े भी कमोबेस वैसे ही होंगे जैसा कि वित्तीय संस्थानों ने अपने अनुमानों में बताया है। जीडीपी ग्रोथ के ये आंकड़े निसंदेह इंडिया को फास्टेस्ट ग्रोथ का टैग तो देते हैं परन्तु इसके पीछे की सच्चाई का सही चित्रण नही कर पाते।
वृद्धि के सबसे तेज अनुमान आरबीआई द्वारा 21.4 प्रतिशत के बावजूद देश की अर्थव्यस्था का आकार 2019की अप्रैल-जून तिमाही से छोटा रह जायेगा, यही सच्चाई है।
यदि जीडीपी वृद्धि इस तिमाही में 31.4 प्रतिशत की दर से वृद्धि करे तो दो साल पहले यानि अप्रैल जून 2019तिमाही की जीडीपी जिसका आकार 35.35लाख करोड़ रुपये था, को पाया जा सकता है क्योंकि अप्रैल-जून तिमाही 2020 में कोरोना लॉकडाउन के कारण देश की जीडीपी 24.4 प्रतिशत गिरकर 26.90 लाख करोड़ रुपये रह गयी थी। फास्टेस्ट ग्रोइंग टैग के मुगालते में देशवाशियों को रखने के बजाय रियल ग्रोथ टैग की मुश्किलों से देश को रूबरू कराना होगा।
अप्रैल-जून तिमाही 2021 में संभावित उच्चतम ग्रोथ रेट का एक बड़ा कारण पिछले साल की इसी अवधि में जीडीपी में बड़ी गिरावट है, जिसे लो बेस प्रभाव से जाना जाता है।
केंद्र सरकार की नीतियों का निर्धारण भी रियल ग्रोथ की चुनौतियों के अनुकूल हो. इकॉनमी में इन्वेस्टमेंट बढ़ाकर, रोजगार पैदा कर खपत खर्च बढ़ाकर जीडीपी में तेज वृद्धि दर हासिल करना सरकार का मकसद बने।

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