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आरसीपी ने नौकरशाह से केंद्रीय कैबिनेट मंत्री तक का सफर किया तय

पटना:- भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के उत्तर प्रदेश कैडर अधिकारी रह चुके रामचंद्र प्रसाद (आरसीपी) सिंह महज ग्यारह साल के राजनीतिक सफर में न केवल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के राष्ट्रीय महासचिव और राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गये बल्कि आज वह केंद्रीय कैबिनेट मंत्री भी बनाये गये।
प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में आज पहली बार मंत्रिमंडल का विस्तार किया है। इस मंत्रिमंडल विस्तार में बिहार के दो सांसद आरसीपी सिंह और पशुपति कुमार पारस को कैबिनेट मंत्री बनाकर उन्हें बड़ी जिम्मेवारी सौंपी है। श्री सिंह को मोदी मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बनाया गया है।
बिहार में नालंदा जिले के मुस्तफापुर में 06 जुलाई 1958 को जन्में श्री सिंह की स्कूली शिक्षा हुसैनपुर विद्यालय में पूरी हुई। इसके बाद उन्होंने पटना साइंस कॉलेज, पटना कॉलेज और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), नई दिल्ली से स्नातक और परास्नातक की डिग्री हासिल की। उनके पिता स्वर्गीय सुखदेव नारायण सिंह और मां स्व. दुखलालो देवी हैं।
शिक्षा पूरी होने के बाद श्री सिंह का चयन आईएएस अधिकारी के रूप में उत्तर प्रदेश कैडर के लिए हुआ। वह रामपुर, बाराबंकी, हमीरपुर और फतेहपुर के जिलाधिकारी रहे। इस दौरान श्री सिंह की समाजवादी पार्टी (सपा) के कद्दावर नेता बेनी प्रसाद वर्मा से नजदीकियां बढ़ीं। श्री वर्मा जब केंद्रीय संचार मंत्री बने तो उन्होंने श्री सिंह को अपना निजी सचिव बनाया। कहा जाता है कि श्री वर्मा के कहने पर ही 1996 में जब नीतीश कुमार केंद्र में अटल बिहारी वाजपेई सरकार में रेल मंत्री बने तो आरसीपी सिंह को अपना विशेष सचिव बनाया था। इसके बाद वर्ष 2005 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद श्री नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने आरसीपी सिंह को दिल्ली से बिहार बुला लिया। वह वर्ष 2005 से 2010 के बीच मुख्यमंत्री श्री कुमार के प्रधान सचिव के तौर पर कार्यरत रहे। इस दौरान पार्टी में आरसीपी सिंह की पकड़ मजबूत होने लगी।
श्री सिंह ने वर्ष 2010 में आईएएस की सेवा से ऐच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। इसके बाद श्री नीतीश कुमार ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया। वर्तमान में वह राज्यसभा सदस्य भी हैं। श्री सिंह को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बेहद करीबी माना जाता है। श्री कुमार ने उन्हें जदयू का राष्ट्रीय महासचिव बनाया।
इसके बाद वर्ष 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू के खराब प्रदर्शन और अरुणाचल प्रदेश में पार्टी के छह विधायकों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो जाने के बाद दिसंबर में हुई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में श्री सिंह को जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया गया। इससे पूर्व अप्रैल 2016 में श्री शरद यादव के जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटने के बाद से ही श्री नीतीश कुमार पार्टी के अध्यक्ष रहने के साथ-साथ मुख्यमंत्री के पद पर भी बने हुए थे।

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