April 14, 2021

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एनबीएफसी के लिए सख्त नियम की तैयारी में आरबीआई, जारी किया डिस्कशन पेपर

नई दिल्ली:- बैंकिंग सेक्टर में स्थिरता लाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों के लिए सख्त नियम लागू करने की तैयारी में है। एनबीएफसी के लिए नियामकीय ढांचा यानी रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाने के मकसद से आरबीआई ने शुक्रवार को एक डिस्कशन पेपर जारी किया। इस पेपर में आरबीआई ने कहा कि फाइनेंशियल सेक्टर की बदलती हुई वास्तविकताओं के साथ कदम-से-कदम मिलाकर चलने के लिए एनबीएफसी के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में बदलाव की जरूरत है। इस डिस्कशन पेपर में कहा गया है कि एनबीएफसी के लिए बनाए जाने वाला रेगुलेटरी फ्रेमवर्क 4 लेयर्स के स्ट्रक्चर पर आधारित होना चाहिए।
रिजर्व बैंक ने अपने डिस्कशन पेपर में कहा कि रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के स्ट्रक्चर में बेस लेयर, मिडिल लेयर, अपर लेयर और टॉप लेयर होना चाहिए। बेस लेयर ने वैसे एनबीएफसी को रखने का सुझाव दिया गया जो नॉन-डिपोजिट एनबीएफसी हैं यानी जिनमें लोग पैसे जमा नहीं करते हैं। वहीं, मिडिल लेयर में वैसै नॉन-डिपोजिट एनबीएफसी जो फाइनेंशियल सिस्टम के लिए जरूरी हैं, उन्हें रखने की बात कही गई है। इनमें हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के साथ दूसरे एनबीएफसी को रखने का सुझाव दिया गया है और कहा गया है कि इनके लिए जो नियम बनें, वे बेस लेयर से कड़े होने चाहिए।

अधिक जोखिम वाले एनबीएफसी अपर और टॉप लेयर में हों

वहीं, अपर लेयर में ऐसे बड़े एनबीएफसी को रखने का सुझाव दिया गया है जिनमें फाइनेंशियल स्टेबिलिटी को प्रभावित करने की क्षमता है। इनके लिए बैंकों की तरह ही कड़े नियम और दूसरे प्रावधान करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि इनके मैनेजमेंट को अधिक पावर और इन पर अधिक सुपरविजन रखने को कहा गया है। वहीं, टॉप लेयर में ऐसे एनबीएफसी को रखने का सुझाव दिया गया है जो अपर लेयर में शामिल हैं और जो अधिक जोखिम वाले हैं। यानी जिनके विफल होने से फाइनेंशियल स्टेबिलिटी को खतरा हो सकता है। ऐसे एनबीएफसी के लिए सबसे अधिक कड़े नियम बनाने की बात कही गई है।

थ्रेसहोल्ड लिमिट बढ़ाने का सुझाव

RBI के डिस्कशन पेपर में कहा गया है कि एनबीएफसी को श्रेणियों में बांटने के लिए थ्रेसहोल्ड लिमिट बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। इसमें कहा गया है कि व्यवस्थित रूप से महत्वपूर्ण है एनबीएफसी में शामिल होने के लिए इस थ्रेसहोल्ड को 500 करोड़ से बढ़ाकर 1000 करोड़ रुपये करने का सुझाव दिया गया है। देश में 9425 नॉन-डिपोडिट टेकिंग एनबीएफसी हैं, जिनमें 9133 एनबीएफसी का ऐसेट साइज 500 करोड़ रुपये से कम का है। इसके साथ नए एनबीएफसी के लिए net owned funds का सीमा को बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये से 20 करोड़ रुपये करने का सुझाव दिया गया है।

सख्त नियम बन सकता है

इससे पहले खबर आई थी कि एनबीएफसी के लिए बनाये जाने वाले नियमों में इन नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों के लिए भी सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर) को बनाए रखना जरूरी होगा। साथ ही नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) रखना भी अनिवार्य करने की योजना थी। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि आरबीआई का यह कदम एनबीएफसी के लिए बड़ा नकदी संकट खड़ा कर सकता है। अभी इस तरह की कोई भी बाध्यता नहीं है। आपको बता दैं कि आइल व एफएस,
एचडीएफएल और अल्टिको कैपिटल जैसे बड़े एनबीएफसी के दिवालिया होने के बाद आरबीआई ने इन नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों एनबीएफसी पर सख्ती बढ़ाने की योजना बनाई है। ये कदम बड़े एनबीएफसी को दिवालिया होने से रोकने के लिए उठाए जा रहे हैं।

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