रांची : हिंडाल्को मड पाैंड हादसे के बाद बड़ी संख्या में आस-पास के गांवों के लोग घटना स्थल पर पहुंचे. एक ओर जहां कई लोग यह जानने के लिए उत्सुक थे कि घटना की वजह क्या है, वहीं दूसरी ओर कई लोग इस बात को लेकर दहशत में थे कि हादसे के कारण आस-पास के गांवों में रहनेवाले परिवारों को कोई नुकसान नहीं हो.  देखते ही देखते घटना स्थल पर हजारों की संख्या में लोग जुट गये. घटना के बाद जब अंदर काम करनेवाले कुछ मजदूर आये तो ग्रामीणों ने उनसे घटना के बारे में जानकारी ली. लेकिन मजदूर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी. सिर्फ यही बताया कि वे घटना के दौरान दूसरी तरफ थे, इसलिए वे बच गये. एक मजदूर ने बताया कि घटना जिस वक्त हुई उस समय लंच हो गया था. इसलिए भी काम करनेवाले लोगों की संख्या अधिक नहीं थी, नहीं तो कई लोगों की जान चली जाती.  इधर घटना को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश था.आक्रोश का मुख्य कारण यह था कि रेड मड पौंड के टूटने को लेकर आशंका जतायी जा चुकी थी. इसके बावजूद कंपनी के स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की गयी और हादसा हो गया. वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोग मृतकों की संख्या और घायलों के बारे में जानकारी चाहते थे. लेकिन हिंडाल्कों कंपनी की ओर से मृतकों की स्पष्ट संख्या लोगों को नहीं बतायी जा रही थी. इस कारण भी लोगों में कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ आक्रोश था. घटना की वजह से देर रात तक स्थानीय लोग मौके पर डटे रहे. गार्डवाल पर मिट्टी का दबाव पड़ा और वह टूट गया हिंडाल्को का रेड मड पौंड हिंडाल्को कारखाने में बॉक्साइट से अलुमिना के उत्पादन के दौरान निकली हुई कास्टिक मिश्रित मिट्टी है.  इसमें रसायन व पानी मिश्रित होता है. इसका रंग लाल होता है. इसलिए जहां इसे जमा किया जाता है उसे रेड मड पौंड यानी लाल कीचड़ का तालाब कहा जाता है. हानिकारक होने के कारण इसे रिहायशी इलाके से दूर जमा किया जाता है. रेड मड इलाके में जगह-जगह इसके खतरनाक होने व इससे दूर रहने के लिए बोर्ड लगाये गये थे.  यहां काम करने वालों को सावधानी से काम करना पड़ता है. इलाके में यह कास्टिक तालाब के नाम से प्रसिद्ध है. इस रेड मड को जमा करते-करते यह पहाड़ का रूप ले चुका था. हिंडाल्को प्रबंधन इस रेड मड को खाली करने के लिए काफी समय से प्रयासरत है, लेकिन सफलता नहीं मिली. इसे बचाने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से पत्थर की दीवार बनायी गयी थी. जानकार बताते हैं कि रेड मड से निकलने वाला कास्टिक युक्त पानी के जमाव के लिए तालाब बना हुआ था. इसे रोकने के लिए बाहरी छोर पर  बोल्डर का गार्डवाल बना हुआ था. गार्डवाल पर मिट्टी का दबाव पड़ने और अंदर से पानी रिसने से घटना हुई. 1. घटना के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग जमा हो गये थे, जो रेलवे ट्रैक पर ही खड़े थे  2. कास्टिक पौंड का गार्डवाल टूटने से उसका पानी आसपास के खेतों में फैल गया हादसे के लिए प्रबंधन व सरकार जिम्मेवार : सुबोध पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने मुरी स्थित हिंडाल्को कंपनी का कास्टिक तालाब टूटने से हुए हादसे पर दु:ख जताया है. उन्होंने कहा है कि यह दिल दहलाने वाली घटना है. श्री सहाय ने इस घटना के लिए हिंडाल्को प्रबंधन की लापरवाही और सरकार की अनदेखी को जिम्मेवार ठहराया है. खतरनाक हो चुकी परिस्थितियों के बारे में प्रबंधन और प्रशासन को स्थानीय लोगों द्वारा जानकारी दी गयी थी, बावजूद इसके कदम नहीं उठाये गये. कार्रवाई हुई होती, तो टल जाती दुर्घटना : अमित झामुमो नेता सह पूर्व विधायक अमित कुमार महतो ने कहा कि हिंडालको के खिलाफ 20 दिसंबर 2018 को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री डॉ हर्षवर्धन से मुलाकात कर शिकायत की गयी थी. अगर कार्रवाई की गयी होती तो आज यह दुर्घटना नहीं होती. उस वक्त केंद्रीय मंत्री को शिकायत पत्र सौंप कर कहा गया था कि हिंडालको अल्युमिनियम फैक्ट्री मुरी द्वारा विशाक्त अपशिष्ट को आबादी, कृषि व वन क्षेत्रों में डंप किया जा रहा है. साथ ही नदी में बहाया जा रहा है.  मुख्य सचिव डीके तिवारी के आदेश पर दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल की आयुक्त शुभ्रा वर्मा और मुख्य कारखाना निरीक्षक एके मिश्रा शाम के समय हिंडाल्को फैक्ट्री परिसर में जांच के लिए पहुंचे. दोनों अधिकारियों ने बंद कमरे में मजदूरों से बात की. मजदूरों ने बताया कि लंच टाइम होने की वजह से पांच से छह लोग ही काम कर रहे थे. मजदूरों ने कहा कि उन्होंने किसी को दबते हुए नहीं देखा है. इसके पूर्व मुख्य सचिव ने उपायुक्त, एसपी को जाकर जांच करने का आदेश दिया था.  भाजपा ने उच्च स्तरीय जांच की मांग उठायी रांची. भाजपा ने हिंडालको घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. पार्टी के प्रदेश महामंत्री दीपक प्रकाश ने कहा है कि मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए हैं. उनके उचित इलाज की व्यवस्था होनी चाहिए. यह प्रबंधन का काम है. घायलों को उचित मुआवजा भी प्रबंधन की ओर से मिलना चाहिए. सुरक्षा में सैट की दो टीम लगायी गयीकंपनी की सुरक्षा बढ़ायी गयी रांची : हिंडाल्को मड पौंड हादसे के बाद हिंडाल्को कंपनी की सुरक्षा बढ़ा दी गयी है. कंपनी की सुरक्षा में सैट की दो अतिरिक्त टीम को लगाया है. इसके अलावा निगरानी रखने के लिए इलाके में रैप की दो टीम को तैनात किया गया है.    कंपनी की सुरक्षा में तैनात जवान जांच करने के बाद ही किसी काे भी कंपनी में प्रवेश करने दे रहे थे. पुलिस अधिकारियों के अनुसार कंपनी की सुरक्षा इसलिए बढ़ायी गयी है कि घटना के बाद लोग कहीं आक्रोश में कंपनी के कार्यालय पर हमला नहीं कर दें. वहीं इलाके में दूसरी कोई अनहोनी की घटना न हो. इसलिए लोगों की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए रैप की एक टीम को तैनात किया गया है. इधर घटना की गंभीरता को देखते हुए देर शाम रांची एसएसपी अनीश कुमार गुप्ता और ग्रामीण एसपी घटना स्थल पर पहुंचे और निरीक्षण किया. एसएसपी ने बताया कि शाम में एनडीआरएफ की टीम के पहुंचने के बाद रेसक्यू ऑपरेशन आरंभ कर दिया गया है.  पलटी हुई हाइवा को खड़ा कर देखा गया कि उसके अंदर कोई फंसा तो नहीं है. राहत कार्य जारी है. बुधवार सुबह से राहत कार्य और तेज किया जायेगा. इधर आस-पास के ग्रामीणों ने पलटी हुई गाड़ियों को देखने के बाद बताया कि संभव: है कि दोनों वाहनों के चालक और खलासी के आंख के सामने घटना हुई होगी. क्योंकि वे मंड पौंड के समीप नहीं पहुंच पाये थे.  ऐसे में तेज रफ्तार में भागने का प्रयास किया होगा और इसी क्रम में संतुलन खो दिया, जिसके कारण दोनों वाहन पलटते हुए नीचे गिर गये होंगे. कुछ लोगों को इस बात की भी आशंका है कि हादसे के दौरान जमीन में कंपन पैदा होने से हाइवा पलट गया होगा.

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