April 13, 2021

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रेल का निजीकरण नहीं होगा: पीयूष गोयल

नयी दिल्ली:- रेलवे का निजीकरण नहीं करने, रेल को आधुनिक बनाने, यात्रियों को बेहतर सुविधा देने तथा उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के सरकार के आश्वासन के साथ लोकसभा ने मंगलवार को ‘बजट 2021-22 में रेल मंत्रालय के अधीन अनुदान मांगों’ को पारित कर दिया। श्री गाेयल ने लोकसभा में अनुदान मांगों पर छह घंटे से ज्यादा समय तक चली चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सदन में कई सदस्यों ने रेलवे का निजीकरण किए जाने की बात कही है और इस पर गहरी चिंता भी जताई है लेकिन “मैं स्पष्ट कर दूं कि भारतीय रेल का निजीकरण नहीं होगा और रेल भारत सरकार की ही रहेगी।” उन्होंने सदस्यों को रेलवे का निजीकरण नहीं करने का भरोसा सदन में दिया लेकिन यह भी कहा कि अगर रेलवे में निजी निवेश आता है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि सड़कें भारत की संपत्ति है लेकिन क्या कोई कहता है कि सड़क पर सिर्फ सरकारी गाड़ियां ही चलनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या इसी तरह का प्रयास रेलवे लाइन पर नहीं होना चाहिए। रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे में बड़ा सुधार किया जा रहा है जिसमें यात्रियों की सुरक्षा तथा उन्हें बेहतर सुविधा देने पर जोर दिया जा रहा है और इसके लिए सरकार ने रेलवे को भविष्य के वास्ते तैयार करने के लिए ‘राष्ट्रीय योजना 2030’ बनायी है। रेलवे को आधुनिक बनाया जा रहा है और इसके लिए रेलवे स्टेशनों पर सुविधाओं में सुधार लाया जा रहा है जिसके तहत एलईडी लाइट्स लगाने के साथ ही एस्केलेटर्स और लिफ्ट लगायी गयी है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रेलवे में सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और इसके लिए सबसे पहले टॉयलेट्स बनाये गये है। रेलवे स्टेशन को आधुनिक बनाना हैं तो उसके लिए निवेश आवश्यक है। हर ट्रेन में आज बॉयो टॉयलेट लगा हुआ है, अब गंदगी ट्रैक पर नहीं गिरती है। उनका कहना था कि लगभग चार हजार टन गंदगी रोज ट्रैक पर गिरती थी लेकिन अब किसी ट्रैक या स्टेशन पर गंदगी नहीं दिखेगी। उन्होंने इस बात पर खुशी जतायी कि रेलवे में दुर्घटनाएं रुकी हैं और मार्च 2019 से अब तक रेल दुर्घटना में तक एक भी यात्री की मृत्यु नहीं हुई है। उनका कहना था कि रेल सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और उसी का परिणाम है कि दो वर्ष में एक भी यात्री रेल दुर्घटना में हताहत नही हुआ है। श्री पीयूष गोयल ने कहा कि उनका प्रयास रेलवे को देश के विकास के लिए ‘इंजिन फाॅर ग्राेथ’ के रूप में विकसित करना है। इस योजना के लिये परियोजनाओं पर अनिवार्यरूप से तेजी से काम चलना चाहिए इसलिए इससे जुड़ी कुछ परियोजनाओं को अति आवश्यक और कुछ को आवश्यक श्रेणी में रखा गया है। इनमें से कई परियोजनाओं पर 70 से 80 फीसदी काम हो गया है लेकिन पैसे के अभाव में काम लटका है जिन पर ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि रेलवे की विकास यात्रा में कुछ जरूरतों को ध्यान में रखा गया है और इसके तहत बंदरगाह के विकास और कोयले की ढुलाई के लिए ढांचागत सुविधा पर तेजी से काम हुआ है। इस दिश में वर्ष 2004 से 2009 के बीच लगभग सवा लाख करोड़ रुपए का निवेश हुआ था जबकि 2009 से 2014 के बीच बढाकर दो लाख 30 हजार करोड़ रुपए किया गया। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने इस पर और ध्यान दिया जिसके कारण 2014 से 2019 के बीच लगभग पांच लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।
रेल मंत्री ने कहा कि रेल देश की अर्थव्यवस्था का पहिया है इसलिए मंत्रालय का प्रयास है कि यात्रियों को रेल में ज्यादा से ज्यादा सुविधा मिले और संवेदनशीलता के साथ रेल से संबंधित मांगों पर विचार हो। उन्होंने कहा कि अब रेलवे के काम के तरीके में बदलाव आया है और पहले की तरह सिर्फ बिना आधार की घोषणाएं नहीं होती है। तब बजट में जो कुछ कहा जाता था उसके लिए निवेश की उपलब्ध तथा घोषणा के बीच कोई तालमेल नहीं था।
उन्होंने कहा कि अब पूरे काम को तरीके से और पैसे तथा काम के बीच तालमेल बनाया जा रहा है। उनका कहना था कि ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर का काम 15 साल पहले शुरु हुआ था और 2014 तक मात्र 10 हजार करोड़ रुपए निवेश हुआ था लेकिन इसके लिए 2014 से 19 तक 40 हजार करोड़ निवेश किया गया है। उनका कहना था कि देश जब आजादी के 75 वर्ष मनायेगा तो दोनों डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर शुरु हो जायेंगे।
श्री गोयल ने सवाल किया कि एक फ्रेट कॉरीडोर को बनने में 17 वर्ष का समय लगना उचित नहीं है। सरकार यदि जमीन अधिग्रहण कर उसके लिए निविदाएं मांगती तो निजी क्षेत्र निवेश लाकर इस कार्य को समय पर पूरा कर देता और अब इस काम को समय पर पूरा किया जाना है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार जानती है कि यदि देश को वैश्विक ताकत बनना है तो लॉजिस्टिक क्षेत्र में लागत कम करनी होगी और यह लक्ष्य इसी तरह की परियोजनाओं के माध्यम से पूरा किया जा सकता है। रेल मंत्री ने कहा कि सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर काम करेंगे तभी देश का उज्ज्वल भविष्य बनाने में हम सफल होंगे और इसी दृष्टिकोण को लेकर सरकार ने राष्ट्रीय रेल योजना बनायी है। उनका कहना था कि इसके माध्यम से कोशिश ये रही है कि फ्रेट लोडिंग को 2024-25 तक 70 से 80 फीसदी तक बढा दें जिससे सामान को रेलवे से दूर दूर तक पहुंचाने की सुविधा हो।
उन्होंने कहा कि लॉकडाउन काे देश ने अवसर में बदलने का काम किया है। एक वर्ष की महामारी के दौरान आपदा को अवसर में बदला है और मालगाड़ियों में सुधार लाया गया है और निवेश के द्वारा देश को आगे बढ़ाया जा रहा है। कोरोना के दौरान देश ने कई ऐसे प्रोजेक्ट्स पूरे किये जो वर्षों से लंबित पड़े थे। उनका कहना था कि कोविड महामारी के दौरान लगभग 350 ऐसे प्रोजेक्ट्स कोरोना के दौरान समाप्त किये गये। जब आवश्यकता हुई तो रेलवे ने श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाकर 60 लाख से अधिक प्रवासी श्रमिकों को घर तक पहुंचाया।
श्री गोयल ने कहा कि आज तक 43 मार्गों पर 377 किसान रेल चल चुकी हैं जिसमें फल, सब्जियां, और किसानों की उपज का परिवहन किया जा रहा है। फूलों को भी किसान रेल के माध्यम से भेजा जा रहा है। लातूर और उस्मानाबाद से 650 किलो फूल किसान रेल के माध्यम से कुर्दुवाड़ी स्टेशन से दिल्ली आदर्शनगर तक पहुंचाया गया। कोविड महामारी से पहले मालगाड़ी लगभग 22-23 किलोमीटर प्रति घंटा चलती थी लेकिन कोविड के समय योजना बना कर उसकी गति को दोगुना कर 45 किमी प्रति घंटा किया गया।

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