January 22, 2021

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प्रवासी श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराये,अन्यथा स्थिति बेकाबू हो जाएगी-बाबूलाल

रांची:- भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि राज्य सरकार लॉकडाउन में घर वापस लौटे सभी प्रवासी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस पहल करें, अन्यथा जल्द ही बड़ी संख्या में श्रमिकों का फिर से शुरू हो जाएगा।
बाबूलाल मरांडी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखे पत्र में बताया कि कोरोना संकटकाल में वापस अपने राज्य झारखंड लौटे प्रवासी मजदूरों के पुनः रोजगार की तलाश में देश के विभिन्न राज्यों की ओर प्रारंभ हो चुके पलायन शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा कि यह परिस्थति अपने प्रदेश में इन प्रवासी मजदूरों को उनके हुनर के अनुसार काम उपलब्ध कराने में झारखंड सरकार की विफलता का परिणाम है।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पूर्व में भी उन्होंने सभी प्रवासी मजदूरों का उनकी कार्य दक्षता के साथ जिलावार एक डाटा तैयार कर प्रदेश में रोजगार सृजन व प्रवासी मजदूरों को रोजगार मुहैया कराने संबंधित सुझाव दिया था। यही नहीं, उत्तरप्रदेश सरकार की तर्ज पर झारखंड श्रमिक आयोग के गठन का सुझाव भी दिया था, इसके राज्य के विभिन्न प्रक्षेत्रों में आवश्यकता के अनुसार रोजगार सृजन हेतु लघु एवं मध्यम प्रकार के उद्योग-ध्ांधे स्थावित कराने का सार्थक पहल एवं विशेष औद्योगिक जोन घोषित कर रियायत प्रदान कर उद्योग लगाने के लिए उद्यमियों को प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया था। लेकिन सकरार की ओर से प्रवासी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गयी। उन्होंने कहा कि आज यह भी स्पष्ट हो गया कि प्रवासी मजदूरों के संबंध में आपके सारे दावे कागजी व हवाई थे। सरकार आज भी कछुए की चाल से प्रवासी मजदूरों की दक्षता के असफल आकलन में जुटी है। जब मजदूर भूखे ही मर जाएंगे तब सरकार उन्हें रोजगार उपलब्ध कराकर ही क्या करेगी ? सरकार रोजगार के संबंध में तनिक भी कभी गंभीर नहीं दिखी ?
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य सरकार ने जिस प्रकार इस अवश्यंभावी समस्या को नजरअंदाज किया, परिणाम आज सामने है। यह तो प्रारंभिक झलक है। जो स्थिति है और सरकार जिस प्रकार उदासीन है, इसका परिणाम काफी भयावह होने से कोई बचा नहीं सकता है।उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रतिदिन आत्महत्याएं की घटनाएं हो रही हैं। बेरोजगारी के कारण लोग तनाव में हैं। मजदूर इस मृत्युकाल में अपनी जान-जोखिम में डालकर कोरोना की भयावहता की परवाह किए बगैर दूसरे राज्यों का रूख करने को विवश हैं। क्योंकि उनके सामने अपने और अपने परिवार के खाने-पीने और जीने का संकट है।

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