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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड के एलोवेरा विलेज की सराहना की, आत्मनिर्भर बन रही है महिलाएं


रांची:- एलोवेरा विलेज के रूप में चर्चित झारखंड के देवरी गांव इन दिनों देशभर में सुर्खियों में हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रविवार को आकाशवाणी पर मन की बात कार्यक्रम में झारखंड की राजधानी रांची से करीब 25 किलोमीटर दूर नगड़ी प्रखंड अंतर्गत देवरी गांव की महिलाओं की प्रशंसा की।
प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम में कहा कि आम लोगों की जिन्दगी का हाल ये है कि एक दिन में सैकड़ों बार कोरोना शब्द हमारे काम में गूंजता है। सौ साल में आयी सबसे बड़ी वैश्विक महामारी कोविड-19 ने हर देशवासी को बहुत कुछ सिखाया है। हेल्थकेयर और वेलनेस को लेकर आज जिज्ञासा भी बढ़ी है और जागरूकता भी। उन्होंने कहा कि देश में पारंपरिक रूप से नेचुरल प्रोड्क्टस प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, जो वेलनेस यानी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें एक पत्र के माध्यम से झारखंड के एलोवेरा विलेज के बारे में जानकारी मिली। रांची के पास ही देवी गांव की महिलाओं ने मंजू कच्छप जी के नेतृत्व में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय से एलोवेरा की खेती का प्रशिक्षण लिया था। इसके बाद उन्होंने एलोवेरा की खेती शुरू की। इस खेती से न केवल स्वास्थ्य के क्षेत्र में लाभ मिला, बल्कि इन महिलाओं की आमदनी भी बढ़ गयी। कोविड-19 महामारी के दौरान भी इन्हें अच्छी आमदनी हुई। इसकी एक बड़ी वजह यह थी कि सैनिटाइजर बनाने वाली कंपनियां सीधे इन्हीं से एलोवेरा खरीद रही थीं। आज इस कार्य में करीब 40महिलाओं की टीम जुटी है और कई एकड़ में एलोवरा की खेती होती है।
दिसंबर 2018 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, आईसीएआर और बिरसा कृषि विश्वविद्यालय ने आदिवासी उप योजना के तहत देवरी गांव में सर्वेक्षण कराया गया और इसे एलोवेरा की खेती के लिए योग्य माना गया। जिसके बाद इस गांव का नाम ही एलोवेरा विलेज दे दिया गया। एलोवेरा की खेती में गांव की अधिकांश महिलाओं ने दिलचस्पी दिखायी और कुछ ही वर्षां में इस गांव की चर्चा पूरे झारखंड ही नहीं, देश स्तर पर होने लगी है।
देवरी गांव की भाग्यमनी तिर्की का कहना है कि दिसंबर 2018 में गांव की तीन दर्जन से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण के लिए रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय ले जाया गया, जहां उन्हें प्रशिक्षण देने के साथ ही सभी महिलाओं को 50-50 एलोवेरा का पौधा दिया गया और इस छोटी से शुरुआत के साथ आज देवरी गांव का नाम पूरे झारखंड में विख्यात हो गया है। मीडिया के माध्यम से जानकारी मिलने पर दूर-दूर से लोग एलोवेरा के पौधे और पत्ते को खरीदने आते है। गांव की महिलाएं 35 रुपये किलो के हिसाब से एलोवेरा के पत्ते बेचती है और प्रति महीने इससे पांच-छह हजार रुपये आसानी से कमा लेती है।
देवरी पंचायत की मुखिया मंजू कच्छप खुद भी एलोवेरा की खेती कार्य में लगी है। वह बताती है कि गर्मी के दिनों में कुछ दिनों के अंतराल में सिंचाई की जरुरत पड़ती है, जबकि अन्य मौसम में सिंचाई की कोई खास जरुरत नहीं पड़ती है। साथ ही पौधरोपण में भी किसी प्रकार का खर्च नहीं होता है। बड़े पौधे से दूसरा पौधा तैयार होता है, जिसके कारण इसमें किसी प्रकार का निवेश नहीं होता है। साथ ही बाजार भी आसानी से उपलब्ध हो जाता है। हालांकि मंजू हेम्ब्रम का कहना है कि यदि गांव में ही एलोवरा प्रसंस्करण यूनिट की स्थापना हो जाए, तो मुनाफा कई गुणा बढ़ जाएगा।
एलोवेरा का उपयोग जॉन्डिस समेत कई अन्य बीमारियों के उपचार में होता है। इसके अलावा सौंदर्य प्रसाधन, फेसवॉश, साबुन बनाने समेत अन्य कार्यां में भी इसका उपयोग होता है। बड़े शहरों में लोग अब एलोवेरा को पेय पदार्थ के रूप में भी कर रहे है। इस खुबियों की वजह से रांची और आसपास से बड़ी संख्या में लोग एलोवेरा के पत्ते को खरीदने के लिए पहुंचती है। रांची के हटिया स्थित लटमा गांव से एलोवरा का पत्ता खरीदने पहुंची करमी देवी ने बताया कि वह इसके पत्ते का उपयोग कई कार्यां में करती है।

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