March 7, 2021

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3 साल पहले ISRO वैज्ञानिक को दिया गया था जहर, फेसबुक पर खुद बताई पूरी दास्तां

नई दिल्ली:- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक शीर्ष वैज्ञानिक ने फेसबुक पर बड़ा खुलासा किया है। ISRO के वैज्ञानिक और अहमदाबाद स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के पूर्व निदेशक तपन मिश्रा ने दावा किया कि तीन साल से अधिक समय पहले उन्हे जहर देकर मारने की कोशिश की गई थी।मिश्रा फिलहाल इसरो में वरिष्ठ सलाहकार के तौर पर काम कर रहे हैं और इस महीने के अंत में सेवानिवृत होने वाले हैं।

फेसबुक पोस्ट पर बताई पूरी कहानी

तपन मिश्रा ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि ‘इसरो में हमें कभी-कभी बड़े वैज्ञानिकों के संदिग्ध मौत की खबर मिलती रही है। साल 1971 में प्रोफेसर विक्रम साराभाई की मौत संदिग्ध हालात में हुई थी। उसके बाद 1999 में VSSC के निदेशक डॉक्टर एस श्रीनिवासन की मौत पर भी सवाल उठे थे। इतना ही नहीं 1994 में नांबीनारायण का केस भी सबके सामने आया था, लेकिन मुझे नहीं पता था कि एक दिन मैं इस रहस्य का हिस्सा बनूंगा।

23 मई, 2017 को दिया गया था जहर

मिश्रा के अनुसार 23 मई, 2017 को इसरो मुख्यालय में पदोन्नति साक्षात्कार के दौरान उन्हे घातक आर्सेनिक ट्राइऑक्साइड जहर दिया गया था। उन्होंने कहा कि दोपहर के भोजन के बाद ‘स्नैक्स’ में संभवत: डोसे की चटनी के साथ मिलाकर जहर दिया गया था। उन्होंने फेसबुक पर ‘लॉंग केप्ट सीक्रेट’ नामक से एक पोस्ट में यह दावा किया कि जुलाई, 2017 में गृह मामलों के सुरक्षाकर्मियों ने उनसे मुलाकात कर आर्सेनिक जहर दिये जाने के प्रति उन्हें सावधान किया था।

मिश्रा का दो साल तक चला था इलाज

तपन मिश्रा ने बताया कि इस घटना के बाद उन्हे लगातार दो साल इलाज कराना पड़ा इसीलिए किसी से इस बारे में बात नहीं की। उन्होंने कहा कि मैं भाग्यशाली हूं क्योंकि इस जहर के लेने के बाद कोई नहीं बचता। मैं जनवरी में रिटायर हो रहा हूं और चाहता हूं कि लोगों को इस बारे में पता चले ताकि अगर मैं मर जाऊं तो सबको पता हो कि मेरे साथ क्या-क्या हुआ था।

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