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NHRC स्थापना दिवस पर बोले पीएम मोदी- भारत ने दुनिया को अहिंसा का मार्ग सुझाया


नई दिल्ली:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के 28वें स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित किया. इस अवसर पर पीएम ने देशवासियों को नवरात्र की शुभकामनाएं दीं.
पीएम ने कहा कि एक ऐसे समय में जब पूरी दुनिया विश्व युद्ध की हिंसा में झुलस रही थी, भारत ने पूरे विश्व को ‘अधिकार और अहिंसा’ का मार्ग सुझाया. हमारे बापू को देश ही नहीं बल्कि पूरा विश्व मानवाधिकारों और मानवीय मूल्यों के प्रतीक के रूप में देखता है.
उन्होंने कहा, भारत के लिए मानवाधिकारों की प्रेरणा का, मानवाधिकार के मूल्यों का बहुत बड़ा स्रोत आज़ादी के लिए हमारा आंदोलन, हमारा इतिहास है. हमने सदियों तक अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया. एक राष्ट्र के रूप में, एक समाज के रूप में अन्याय-अत्याचार का प्रतिरोध किया.
प्रधानमंत्री ने कहा, जो गरीब कभी शौच के लिए खुले में जाने को मजबूर था, उब गरीब को जब शौचालय मिलता है, तो उसे प्रतिष्ठा भी मिलती है. जो गरीब कभी बैंक के भीतर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था, उस गरीब का जब जनधन अकाउंट खुलता है, तो उसमें हौसला आता है, उसकी प्रतिष्ठा बढ़ती है.
उन्होंने कहा कि दशकों से मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक के खिलाफ कानून की मांग कर रही थीं. हमने ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून बनाकर, मुस्लिम महिलाओं को नया अधिकार दिया है.
मोदी ने कहा कि भारत ने इसी कोरोना काल में गरीबों, असहायों, बुजुर्गों को सीधे उनके खाते में आर्थिक सहायता दी है. प्रवासी श्रमिकों के लिए ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ की सुविधा भी शुरू की गई है, ताकि वो देश में कहीं भी जाएं, उन्हें राशन के लिए भटकना न पड़े.
इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कार्यक्रम में कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 28 साल में 20 लाख से ज्यादा मामलों का निस्तारण किया है और 205 करोड़ से ज्यादा का मुआवजा जिनके साथ अन्याय हुआ था उन्हें दिलाने का काम किया है.
उन्होंने कहा, पीएम मोदी के नेतृत्व में ऐसे क्षेत्र पर उनका ध्यान गया जो मानव अधिकार की बात करने वाले सभी के ध्यान से बाहर था, देश के 60 करोड़ गरीब. उन्हें भी समानता का अधिकार है, आज़ादी तभी सही मायनों में मानी जाएगी जब ये 60 करोड़ गरीब अपनी बुनियादी सुविधा प्राप्त कर लेंगे.
मानवाधिकार संरक्षण कानून, 1993 के तहत आयोग की स्थापना 12 अक्टूबर 1993 को मानवाधिकारों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देने के उद्देश्य के साथ की गई थी. एनएचआरसी मानवाधिकारों के उल्लंघन का संज्ञान लेता है, जांच करता है और सार्वजनिक प्राधिकारों द्वारा पीड़ितों को दिए जाने के लिए मुआवजे की सिफारिश करता है.

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