April 18, 2021

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Mann Ki Baat में बोले पीएम मोदी, तमिल भाषा नहीं सीख पाने का है मलाल

नई दिल्ली:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम में कहा कि कभी-कभी बहुत छोटा और साधारण-सा सवाल भी मन को झकझोर जाता है, ये सवाल लंबे नहीं होते हैं, बहुत सिंपल होते हैं, फिर भी वे हमें सोचने पर मजबूर कर देते हैं। एक वाकया का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अपने इतने लंबे राजनीतिक सफर में उनको एक बात का मलाल है। प्रधानमंत्री ने बताया कि कुछ ही दिन पहले हैदराबाद की अपर्णा रेड्डी से उनकी बात हुई तो उन्होंने एक सवाल पूछा कि आप इतने साल पीएम रहे, सीएम रहे, क्या आपको लगता हैं कि कुछ कमी रह गई है। पीएम मोदी ने कहा कि यह सवाल जितना सहज था उतना ही मुश्किल भी। पीएम मोदी ने कहा कि मैंने इस सवाल पर विचार किया और खुद से कहा कि मेरी एक कमी यह रह गई कि मैं दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा तमिल नहीं सीख पाया। पीएम मोदी ने कहा कि तमिल सुंदर भाषा है, जो दुनिया भर में लोकप्रिय है, बहुत से लोगों ने मुझे तमिल साहित्य की क्वालिटी और इसमें लिखी गई कविताओं की गहराई के बारे में बहुत कुछ बताया है।
सुनाया संस्कृत में कमेंट्री का किस्सा
प्रधानमंत्री ने इस दौरान विविधताओं वाले देश की अलग-अलग भाषाओं का जिक्र किया। संस्कृत भाषा पर बात करते हुए उन्होंने वाराणसी के संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान संस्कृत में हुई कमेंट्री का एक हिस्सा भी सुनाया। पिछले दिनों संपूर्णानंद संस्कृत विश्ववविद्यालय में क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन हुआ था जिसमें धोती पहनकर स्टूडेंट्स खेलते नजर आए थे। साथ ही संस्कृत में कमेंट्री भी सुनाई गई थी। पीएम मोदी ने कहा कि भारत ऐसी अनेक भाषाओं स्थली है, जो हमारी संस्कृति और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि वाराणसी में संस्कृत महाविद्यालयों के बीच एक क्रिकेट टूर्नामेंट होता है। इसी टूर्नामेंट में हुई कमेंट्री का एक ऑडियो क्लिप सुनाते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘ये महाविद्यालय हैं–शास्त्रार्थ महाविद्यालय, स्वामी वेदांती वेद विद्यापीठ, श्री ब्रह्म वेद विद्यालय और इंटरनैशनल चंद्रमौली चैरिटेबल ट्रस्ट।’

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