लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) ने ओडिशा में प्रतिनियुक्त एक  आईएस रैंक के मतदान पर्यवेक्षक मोहम्मद मोहसिन को सस्पेंड कर दिया। बताया जा रहा है कि एसपीजी सुरक्षा से संबंधित आयोग के निर्देशों के विपरीत कार्य करने के कारण आईएस रैंक के इस अधिकारी पर कार्रवाई हुई। बिते मंगलवार (16 अप्रैल) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओडिशा दौरे पर गए थे, जहां सुरक्षा में तैनात एसपीजी से मोहसिन ने प्रधानमंत्री मोदी के हेलीकॉप्टर की जांच करने का अनुरोध किया था।
चुनाव आयोग के आदेश के अनुसार कर्नाटक कैडर के आईएएस अधिकारी मोहम्मद मोहसिन को 16 अप्रैल को एसपीजी सुरक्षा से संबंधित आयोग के निर्देशों के विपरीत कार्रवाई करने के लिए निलंबित किया गया। बताते चले कि यह मामला उस दिन का है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनावी रैली को संबोधित करने के लिए ओडिशा के संबलपुर गए थे। अधिकारियों के मुताबिक, जनरल ऑब्जर्वर मोहसिन ने प्रधानमंत्री को लाने वाले हेलिकॉप्टर की जांच करने का प्रयास किया था
ओडिशा सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बतायकि “जब प्रधानमंत्री रैली को संबोधित कर रहे थे। उस वक्त अधिकारी मोहसिन हेलिकॉप्टर के पास तैनात एसपीजी के पास पहुंचे और तलाशी का अनुरोध किया। एसपीजी ने प्रामाणिक दस्तावेज की मांग करते हुए उन्हें तलाशी की अनुमति दे दी।हालांकि, इससे प्रधानमंत्री के प्रस्थान में 20 मिनट की देरी हो गई।” उन्होंने आगे कहा कि जहां तक मुझे पता है, जनरल ऑब्जर्वर (मोहसिन) केवल चुनाव आयोग के कामों को देखते हैं और आयोग को ही रिपोर्ट करते हैं। अधिकारी के पास तलाशी का आदेश देने का अधिकार नहीं है।
मोहसिन के लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, वह वर्तमान में कर्नाटक के पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में सचिव हैं। चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक उन्हें चार अप्रैल से 23 मई तक चार विधानसभा क्षेत्रों के लिए जनरल ऑब्जर्वर के रूप में संबलपुर, कुचिंडा, रेंगाली, संबलपुर और रायराखोल लोकसभा में तैनात किया गया है। आयोग के आदेश के अनुसार, मुख्य निर्वाचन अधिकारी (ओडिशा), जिला चुनाव अधिकारी (संबलपुर) और डीआईजी (संबलपुर) की रिपोर्ट के बाद मोहसिन का निलंबन आदेश जारी किया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव आयोग के आदेश के बाद सोमवार को एक वीडियो सामने आया, जिसमें केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पुलिस अधिकारियों के साथ तीखी बहस करते हुए दिखाया गया। बताया जा रहा है कि ये अधिकारी ओडिशा में एक उड़नदस्ते का हिस्सा थे।

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