April 13, 2021

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असम को पीएम मोदी ने दी बड़ी सौगात, बाेले- लाखों लोगों की जीवन की बड़ी चिंता अब हो गई दूर

नयी दिल्ली:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज असम में 1.6 लाख जातीय मूल के भूमिहीनों को जमीन का ‘पट्टा’ या आवंटन प्रमाणपत्र देने से संबंधित असम सरकार के विशेष कार्यक्रम की शुरुआत की। इस दौरान उनहोंने कहा कि आज असम की सरकार ने आपके जीवन की बड़ी चिंता दूर की है। 1 लाख से ज्यादा मूल निवासी परिवारों को भूमि के स्वामित्व का अधिकार मिलने से आपके जीवन की बड़ी चिंता अब दूर हो गई है। बता दें कि आजादी के बाद यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में असम में लोगों को जमीन के ‘पट्टे’ दिये जा रहे हैं। असम के लोगों के नाम पीएम मोदी के संबोधन की मुख्ये बातें इस प्रकार है:-
लोगों का प्रेम मुझे बार बार असम ले आता है
असम के लोगों का ये आशीर्वाद, आपकी ये आत्मीयता मेरे लिए बहुत बड़ा सौभाग्य है।
आपका ये प्रेम और स्नेह मुझे बार बार असम ले आता है।
आज पराक्रम दिवस पर पूरे देश मे अनेक कार्यक्रम भी शुरू हो रहे हैं।
इसलिए एक तरह से आज का दिन उम्मीदों के पूरा होने के साथ ही, हमारे राष्ट्रीय संकल्पो की सिद्धि के लिए प्रेरणा लेने का भी अवसर है।
असम में 2.5 लाख घरों में पानी का कनेक्शन
असम में जब हमारी सरकार बनी तो उस समय भी यहां करीब-करीब 6 लाख मूल निवासी परिवार जिनके पास ज़मीन के कानूनी कागज़ नहीं थे।
लेकिन सर्वानंद सोनोवाल जी के नेतृत्व में यहां की सरकार ने आपकी इस चिंता को दूर करने के लिए गंभीरता के साथ काम किया।
आत्मविश्वास तभी बढ़ता है जब घर-परिवार में भी सुविधाएं मिलती हैं और बाहर का इंफ्रास्ट्रक्चर भी सुधरता है।
बीते सालों में इन दोनों मोर्चों पर असम में अभूतपूर्व काम किया गया है।
5 साल पहले तक असम के 50 प्रतिशत से भी कम घरों तक बिजली पहुंची थी, जो अब करीब 100% तक पहुंच चुकी है।
जल जीवन मिशन के तहत बीते 1.5 साल में असम में 2.5 लाख से ज्यादा घरों में पानी का कनेक्शन दिया गया है।
असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दशकों से अनिश्चितता के बीच जीवन बिता रहे जातीय मूल के एक लाख से अधिक लोगों को जमीन का ‘पट्टा’ देने से संबंधित कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत करेंगे। असम में अब तक किसी भी पूर्ववर्ती सरकार ने लोगों के अनुकूल ऐसी पहल नहीं की थी। कार्यक्रम का आयोजन शिवसागर जिले में जेरेंगा पोतहर में होगा। इस ऐतिहासिक स्थान का संबंध असम के पूर्ववर्ती अहोम साम्राज्य से है।
सोनोवाल ने कहा कि संदिग्ध अवैध अप्रवासियों ने सरकारी भूमि, जनजातीय खंडों का अतिक्रमण किया था लेकिन राज्य सरकार ने उन्हें हटाने के लिए कदम उठाए और जातीय मूल के लोगों को जमीन उपलब्ध करायी जिनमें से अधिकतर आदिवासी, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और चाय बागान में काम करने वाले पूर्व श्रमिक शामिल हैं। सोनोवाल ने कहा कि लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने और ‘जाति, माटी और भीटी (मूल)’ की रक्षा के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने यह कदम उठाया है।

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