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वर्चुअल सुनवाई को मौलिक अधिकार घोषित करने संबंधी याचिका दाखिल


नयी दिल्ली:- देश के उच्च न्यायालयों में वर्चुअल सुनवाई को बंद करने पर स्थगनादेश जारी करने और वर्चुअल सुनवाई को मौलिक अधिकार घोषित करने संबंधी एक और याचिका उच्चतम न्यायालय के समक्ष दायर की गयी है।
पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त जुलियो रिबेरियो, पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त शैलेष आर गांधी एवं नेशनल फेडरेशन ऑफ सोसाइटिज फॉर फास्ट जस्टिस की ओर से यह याचिका दाखिल की गयी है, जिसमें सभी उच्च न्यायालयों में वर्चुअल सुनवाई समाप्त करने के किसी भी फैसले पर रोक लगाने की मांग की गयी है और सुनवाई के इस माध्यम को मौलिक अधिकार घोषित करने का न्यायालय से अनुरोध किया गया है।
याचिका एडवोकेट सिद्धार्थ आर गुप्ता ने तैयार की है, जबकि इसे एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड मृगांक प्रभाकर के जरिये दाखिल की गयी है।
याचिका में उत्तराखंड और गुजरात उच्च न्यायालयों में वर्चुअल सुनवाई पूरी तरह बंद करने और फिजिकल सुनवाई शुरू किये जाने के फैसले को आधार बनाया गया है।
इससे पहले स्पर्श उपाध्याय और ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ ज्यूरिस्ट्स ने इस तरह की याचिका दायर की है, जिस पर भारतीय विधिज्ञ परिषद, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और उत्तराखंड, बॉम्बे, मध्य प्रदेश एवं केरल उच्च न्यायालयों को नोटिस जारी किया था।

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