अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

पटना के डॉ. जाकिर हुसैन उच्च एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की संबद्धता निरस्त : मंत्री


पटना:- बिहार सरकार ने आज कहा कि डॉ. जाकिर हुसैन उच्च विद्यालय प्लस टू, पटना पर लगाए गए आरोपों की जांच के बाद उसकी संयुक्त संबद्धता को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।
विधान परिषद में शुक्रवार को शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के गुलाम रसूल के ध्यानाकर्षण प्रश्न के उत्तर में कहा कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बीएसईबी), पटना से प्राप्त प्रतिवेदन में डॉ. जाकिर हुसैन उच्च विद्यालय प्लस टू, सुलतानगंज ,पटना के विरुद्ध प्राप्त परिवाद में विद्यालय के पास अपनी भूमि नहीं रहने तथा गलत तरीके से लिपिक को प्राचार्य बनाने का आरोप लगाया गया। परिवाद में लगाए गए आरोपों की जांच बीएसईबी द्वारा गठित त्रिसदस्यीय समिति से कराई गई। शिक्षा मंत्री ने कहा कि विद्यालय द्वारा समिति के समक्ष जांच के लिए वांछित अभिलेख और साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए गए तथा जो भी अभिलेख उपलब्ध कराए गए वह अपूर्ण थे। उन्होंने कहा कि समिति द्वारा प्राप्त जांच प्रतिवेदन में अंकित किया गया कि विद्यालय को प्लस टू स्तर के लिए दो एकड़ भूमि नहीं है। श्री चौधरी ने कहा कि विद्यालय के लिपिक को अपेक्षित अहर्ता नहीं रहने के बावजूद अभिलेख में छेड़छाड़ कर प्रधानाध्यापक बनाया गया है। इन तथ्यों के आधार पर परीक्षा समिति अधिनियम के अध्याय (2) के उपखंड 19 (2) के तहत विद्यालय को प्रदत माध्यमिक कोड (711 02) तथा उच्च माध्यमिक कोड (17011) संयुक्त संबद्धता को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया। बीएसईबी के निर्णय के विरुद्ध विद्यालय द्वारा पटना उच्च न्यायालय में मामला दायर किया गया है, जो सुनवाई के लिए विचाराधीन है। शिक्षा मंत्री ने जदयू के ही डॉ. संजीव कुमार सिंह के एक ध्यानाकर्षण के उत्तर में कहा कि प्रारंभिक एवं उच्च विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति की अहर्ता राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षण परिषद द्वारा निर्धारित होती है तथा तीन पदों पर वर्तमान में प्रशिक्षित (डीलेड और बीएड) अभ्यर्थी ही नियुक्ति के लिए पात्र होते हैं। इसी तरह राज्य के विश्वविद्यालयों में भी शिक्षकों की नियुक्ति के लिए अहर्ता विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) नियमन के अनुरूप निर्धारित है, जिसमें राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण अथवा पीएचडी योग्यताधारी अभ्यर्थी ही नियुक्ति के लिए पात्रता रखते हैं।
श्री चौधरी ने कहा कि राज्य के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को समय-समय पर आवश्यकता के अनुसार रिफ्रेशर कोर्स के माध्यम से बिहार शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा प्रशिक्षण का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इसी तरह विश्वविद्यालयों में एकेडमिक स्टाफ कॉलेज द्वारा आयोजित कार्यशालाओं के माध्यम से ओरियंटेशन एवं रिफ्रेशर कोर्स द्वारा ज्ञान वर्धन कराया जाता है तथा यूजीसी के द्वारा विभिन्न प्रकार के राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय कान्फ्रेंस में शोध पत्र प्रकाशित करने के लिए शिक्षकों को अनुमति प्रदान की जाती है, जिससे उनके कौशल में वृद्धि होती है। इससे यह स्पष्ट है कि शिक्षण-प्रशिक्षण विश्वविद्यालय की स्थापना आवश्यक नहीं है और इस प्रकार का कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन भी नहीं है।

%d bloggers like this: