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पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की मदद के लिए बुलाई मुस्लिम देशों की बैठक, नीयत पर उठे सवाल


इस्लामाबाद:- पाकिस्तान आर्थिक एवं मानवीय आपदा से निपटने में अफगानिस्तान की मदद करने के लिए मुस्लिम देशों को एकजुट करेगा और पड़ोसी देश के नए तालिबान शासकों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि नरम बनाने के लिए राजी करने का प्रयास करेगा। पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक ने शुक्रवार को कहा कि 57 सदस्यीय इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) के कई विदेश मंत्री अफगानिस्तान की मदद करने के तरीकों को खोजने के लिए रविवार 19 दिसंबर को इस्लामाबाद में बैठक करेंगे और वे तालिबान-संचालित सरकार की मुश्किल राजनीतिक वास्तविकताओं पर भी चर्चा करेंगे।
इस बैठक को लेकर अब पाक की नीयत पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि आखिर पाकिस्तान सभी मुस्लिम देशों के साथ बैठक कर क्या हासिल करना चाहता है और क्या मुस्लिम देश पाकिस्तान में होने वाली बैठक को लेकर उत्साहित भी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान सरकार सभी मुस्लिम देशों से बैठक में शामिल होने का अनुरोध कर रही है, लेकिन बैठक को लेकर ज्यादातर मुस्लिम देश उत्साह नहीं दिखा रहे हैं। इस्लामाबाद में होने वाली इस ‘महाबैठक’ के लिए पाकिस्तान ने सभी 57 मुस्लिम देशों से शामिल होने के लिए मनुहार की है, लेकिन अभी तक सिर्फ 24 देशों ने ही बैठक में शामिल होने पर सहमति जताई है। हालांकि, पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने दावा किया है कि, बैठक में सभी मुस्लिम देश शामिल होंगे, लेकिन अभी तक पाकिस्तान की तरफ से शामिल होने वाले देशों को लेकर लिस्ट जारी नहीं की गई है।
जानकारों का मानना है कि इस्लामिक देशों के साथ होने वाली इस बैठक के जरिए पाकिस्तान अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार पर इस्लामिक देशों में एक आम सहमति बनाने की कोशिश कर रहा है। अब तक पूरी ताकत लगाने के बाद भी पाकिस्तान को दुनिया के किसी भी देश से तालिबान की सरकार को मान्यता दिलाने में कामयाबी नहीं मिली है। लिहाजा, इस बैठक में पाकिस्तान ने तालिबान की सरकार के विदेश मंत्री को भी बुलाया है। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि, कई देशों के विदेश मंत्री बैठक में हिस्सा लेने नहीं पहुंचे।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस शिखर सम्मेलन का मुख्य एजेंडा भी अफगानिस्तान ही होने वाला है, हालांकि अफगानिस्तान अभी तक ओआईसी का सदस्य नहीं है। दूसरी तरफ अमेरिका, यूरोप और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संगठन तालिबान को वित्तीय मदद देने से साफ इनकार कर चुके हैं। जिससे पाकिस्तान बुरी तरह से परेशान है। पाकिस्तान को अफगानिस्तान में तालिबान राज स्थापित होने के बाद अभी तक कुछ भी हासिल नहीं हुआ है, लिहाजा पाकिस्तान इस्लामिक देशों से अफगानिस्तान को आर्थिक मदद दिलवाना चाहता है और खुद बीच की कड़ी बन सकता है।
आर्थिक कंगाली से बचने के लिए अफगानिस्तान की पाकिस्तान के लिए आखिरी उम्मीद बचा है, लिहाजा पाकिस्तान तालिबान को आर्थिक मदद दिलाने के लिए हर कदम उठा रहा है। इसके साथ ही, इस बात की भी पूरी उम्मीद है, कि इस्लामिक देशों के साथ बैठक में पाकिस्तान कश्मीर का मुद्दा उठा सकता है। जानकरों की मानें तो कई इस्लामिक देशों ने इस बार तालिबान से काफी दूरी बना रखी है, लिहाजा पाकिस्तान का ये प्लान फेल हो सकता है।
अफगानिस्तान में पाकिस्तान की भूमिका पर भी नए सवाल उठ सकते हैं। अमेरिकी कांग्रेस की विशेष समिति ने साफ तौर पर कह दिया है कि अफगानिस्तान मामले में पाकिस्तान ने उसके साथ विश्वासघात किया है। वहीं, भारत के 50,000 टन गेहूं और दवाओं से लदे ट्रकों को रास्ता देने से इनकार रा मामला भी बैठक में उठ सकता है। इसके साथ ही इस्लामिक देश पाकिस्तान की सरकार से सियालकोट में श्रीलंकाई नागरिक को जिंदा जलाने को लेकर भी सवाल पूछ सकते हैं।

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