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वामदलो एवं सामाजिक संगठनों की ओर से राजभवन मार्च 15 को

फादर स्टेन स्वामी की मौत मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग

रांची:- वाम दलों और विभिन्न राजनीतिक दलों तथा सामाजिक संगठनों की ओर से फादर स्टेन स्वामी की मौत की न्यायिक जांच कराने आगामी 15जुलाई को राजभवन मार्च का निर्णय लिया गया है।
रांची स्थित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन में वाम दलों और अन्य संठननों की ओर से बताय गया कि यू ए पी ए कानून को निरस्त करने मांगों को लेकर 15 जुलाई जिला स्कूल मैदान रांची से 11बजे दिन से कोविड-19 के गाइडलाइन का पालन करते हुए मार्च निकाला जाएगा। राजभवन के समक्ष प्रदर्शन के माध्यम से राष्ट्रपति को मांग पत्र समर्पित की जायगी । प्रदर्शन में कई सामाजिक एवं राजनीतिक संगठन के लोग भाग लेंगे । प्रेस वार्ता में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, झारखंड राज्य के सहायक सचिव महेंद्र पाठक ने कहा कि जब से केंद्र में मोदी की सरकार सता मे आई है तब से लगातार विपक्षी दलों, विरोधियों एवं सरकार से सवाल पूछने वाले राजनीतिक, सामाजिक ,पत्रकार, बुद्धिजीवियों, लेखकों को फर्जी मुकदमों में फंसा कर जेल भेजा जा रहा है । ऐसे जन विरोधी कानून को निरस्त करने के लीए प्रतिवाद मार्च में शामिल होने के लिए लोगों से अपील किया।
इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता ,महिला नेत्री दयामणि बरला ने कहा कि फादर स्वामी झारखंड के जल जंगल जमीन से जोड़कर राज्य के आदिवासी, दलित, शोषित, पीड़ित लोगों की आवाज बन कर लड़ाई लड़ रहे थे। लेकिन केंद्र की सरकार जानबूझकर केस में फंसा कर जेल भेज कर उनकी मौत के घाट उतारा। उक्त मामले को सरकार न्यायिक जांच कराए। फादर स्टेन स्वामी न्यायिक मंच के कुमार वरुण ने कहा कि राज्य सहित देशद्रोही विदेश में भी स्वामी को लोग याद कर रहे हैं ,उनके बताए रास्ते पर चलने के लिए लगातार आंदोलनरत है। सरकार ऐसे व्यक्ति को न्यायिक हिरासत में मौत के घाट उतारा ,झारखंड के आदिवासी ,दलित, पिछड़े की आवाज बन कर हमेशा लड़ते रहे ,भाकपा माले के जिला सचिव भुनेश्वर केवट ने कहा झारखंड की जनता फादर स्टैन स्वामी नियति ,नियतियों के साथ खड़ी है। इसीलिए केंद्र सरकार की किसान मजदूर ,जनविरोधी,नितीयों पर शासन करने के लिए बनाई गई है ।
भाकपा जिला सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि फादर, जनता की आवाज बन कर लड़ते रहे, लेकिन 84 वर्ष की उम्र में न तो बोल पाते थे, ना ही चल पाते थे और ना ही सुन पाते थे, ऐसे व्यक्ति को कोरेगांव मामले में फसाकर जेल भेजा गया, तो 9 महीने के अंदर भी सरकार साबित नहीं कर सकी, जेल में भी यातनाएं दी, बीमार अवस्था में भी उनका उचित इलाज सरकार नहीं करा सकी। जिसके चलते उनकी मौत हुई है ।
मासस नेता सुसातो मुखर्जी ने कहा कि 15 जुलाई को राजभवन मार्च में राज्य के कई राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों के लोग भाग लेंगे। ताकि फादर स्टैन स्वामी के मौत की न्यायिक जांच हो सके। मार्च के बाद उक्त मांगों के समर्थन में पूरे राज्य में सभी साथियों को एकजुट कर आंदोलन और तेज किया जाएगा, माकपा जिला सचिव सुखनाथ लोहराने लोगों से अपील किया कि 15 जुलाई कि राजभवन को सफल बनाने के लिए अधिक से अधिक राजनीतिक व सामाजिक कार्यकर्ता आंदोलन से जुड़े और उक्त आंदोलन को राष्ट्रव्यापी आंदोलन में झारखंड आगे बढ़ चढ़कर हिस्सा लें। प्रेस वार्ता में आदिवासी अधिकार मंच के सुषमा विरोली, प्रफुल्ल लिंडा, एलीयास हेब्रम सहित कई लोग मौजूद थे।

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