March 4, 2021

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किसान के नाम पर आंदोलन से नहीं, खेत में परिश्रम से होगी आर्थिक समृद्धि

बेगूसराय:- केन्द्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानून के विरोध में दिल्ली के आसपास के आंदोलन की आग बिहार भी पहुंच गई है। यहां भी कुछ राजनीतिक दलों द्वारा आंदोलन को गति दी जा रही है। लेकिन केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के संसदीय क्षेत्र बेगूसराय के किसान कृषि विधेयक के विरोध आंदोलन करने के बदले इस हाड़कपाती ठंड में भी जी-जान से अपने खेतों में लगे हुए हैं। यहां के किसानों का मानना है कि किसानों का हित और उनकी समृद्धि कानून के विरोध से नहीं, अपने खेत में किए गए परिश्रम से होगा।
बुधवार को भी जब ठंड का कहर अपने चरम पर था तो ऐसे में बेगूसराय के प्रगतिशील किसान अपने खेतों में लगाए गए फसल के सहारे आर्थिक समृद्धि का रास्ता तलाश कर रहे थे। बेगूसराय जिला मुख्यालय का निकटवर्ती गांव छपकी हो या सुदूरवर्ती गांव शकरपुरा, तमाम जगहों के किसान पूरी तल्लीनता से अपने कृषि कार्य में लगे दिखे।
शकरपुरा के प्रगतिशील किसान कृष्णदेव राय ने बताया कि सरकार द्वारा लाया गया तीनों कानून सही है। इसका विरोध किसान नहीं, राजनीतिक दल के लोग कर रहे हैं। इस विधेयक के सहारे राजनीतिक दल किसान को मोहरा बना रहे हैं। कानून धरातल पर लागू हो जाएगा तो किसानों की आय कम से कम डेढ़ गुना आगे बढ़ जाएगी। कानून पूरी तरह से किसान के हित में है। यहां फसल अधिक होने पर लोकल में भाव काफी कम हो जाता है। लेकिन कृषि कानून में प्रावधान है कि बड़ी-बड़ी कंपनी से जब टैगिंग होगी तो दुनिया के जिस देश में उस फसल का अधिक भाव रहेगा, कंपनी पहुंचाएगी। विदेश जाने से फसल का उचित दाम मिलेगा तो किसानों का मनोबल बढ़ेगा। बड़ी कंपनियां फसल का कॉन्ट्रैक्ट करेगी, जमीन का नहीं। हम उसे अपना प्रोडक्ट देंगे और वह उचित दाम देगी, अगर उचित नहीं देगी तो हम लोकल में भी अपना फसल बेच सकते हैं। अभी बिहार में चल रही तमाम चीनी मिल बड़े-बड़े उद्योग समूह द्वारा संचालित हैं, वहां किसान अपना गन्ना बेचते हैं।
गन्ना की खेती भी कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के तहत होती है। चीनी मिल अगर पैसा देने में देर करती है, उचित भाव नहीं देती है तो हम अपना गन्ना शक्कर बनाने वालों को दे देते हैं, इसमें चीनी मिल हमें रोकती नहीं है, हम स्वतंत्र हैं। उन्होंने बताया कि परंपरागत खेती से उपजाए गए फसल का उचित दाम नहीं मिलता है, इससे पांच सदस्य वाले परिवार पर कर्ज का बोझ बढ़ता जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि किसानों की आय दोगुनी करेंगे, वह किसी किसान के खाते में रुपया नहीं भेज देंगे, किसान सम्मान के रूप में मदद कर रहे हैं, नई-नई तकनीक किसानों को दे रहे हैं। नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद कृषि क्षेत्र में नई-नई तकनीक आ रही है, इसे किसान अपनाएं, उनकी योजनाओं को आत्मसात करें तो आय दोगुनी से भी अधिक हो जाएगी। कृषि विधेयक में स्पष्ट कहा गया है कि सभी किसानों को समर्थन मूल्य मिलेगा, इससे बड़ी राहत मिलेगी। अभी सरकारी स्तर पर अनाज बिक्री की उचित व्यवस्था नहीं है, जिससे व्यापारी मनमानी करते हैं, किसान मजबूरी में हैं। लेकिन यह कानून जब धरातल पर लागू हो जाएगा तो वरदान साबित होगा, एक नई कृषि क्रांति होगी।

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