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नीतिगत दरों में सातवीं बार कोई बदलाव नहीं


मुंबई:- महंगाई बढ़ने और कोरोना की तीसरी लहर की आशंकाओं के बीच आर्थिक गतिविधियों के पटरी पर लाने के उद्देश्य से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो दर तथा अन्य नीतिगत दरों को सातवीं बार यथावत रखने का फैसला किया है।
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांता दास की अध्यक्षता में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समीति की आज समाप्त तीन दिवसीय बैठक में सभी नीतिगत दरों को अपरिवर्तित रखने का निर्णय किया गया। रेपो दर को चार प्रतिशत, रिवर्स रेपो दर को 3.35 प्रतिशत, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी दर को 4.25 प्रतिशत और बैंक दर को 4.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है। नकद आरक्षी अनुपात चार प्रतिशत और एसएलआर 18 प्रतिशत पर बना रहेगा।
बैठक के बाद श्री दास ने बताया कि वित्त वर्ष 2021-22 में वास्तविक जीडीपी की विकास दर 9.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर आ रही है। साथ ही इस साल कुछ विलंब के बाद मानसून में सुधार होने से खरीफ की बुआई में तेजी आयी है। आने वाले दिनों में कोविड-19 टीकाकरण भी गति पकड़ेगा। ये सभी कारक अर्थव्यवस्था को गति देंगे।
कोरोना की दूसरी लहर के चलते अप्रैल और मई के दौरान देश के कई हिस्सों में लगाई गई सख्त पाबंदियों से भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। ऐसे में तीसरी लहर की आशंकाओं के बीच यह बैठक बेहद अहम है। हर दो महीने में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक होती है। इस बैठक में अर्थव्यवस्था में सुधार पर चर्चा की जाती है और साथ ही ब्याज दरों का फैसला लिया जाता है। रिजर्व बैंक ने आखिरी बार 22 मई 2020 को नीतिगत दरों में बदलाव किया था। श्री दास ने कहा कि केन्द्रीय बैंक के मौद्रिक रुख को ‘उदार’ बनाए रखा गया है। उदार रुख पर छह में से पांच सदस्य सहमत थे। रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2021-22 में देश की वास्तविक जीडीपी में 9.5 फीसदी की तेजी का अनुमान लगाया है। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 21.4 फीसदी होगी, दूसरी तिमाही में 7.3 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.3 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.1 फीसदी। वित्त वर्ष 2022-23 में देश की वास्तविक जीडीपी 17.2 फीसदी रह सकती है।
महंगाई पर उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2021-2022 में खुदरा महंगाई 5.7 फीसदी रह सकती है। पिछली बैठक में 5.1 फीसदी का अनुमान लगाया गया था। दूसरी तिमाही में महंगाई दर 5.9 फीसदी रह सकती है, तीसरी तिमाही में 5.3 और चौथी तिमाही में यह 5.8 फीसदी हो सकती है। वित्त वर्ष 2022-2023 की पहली तिमाही में यह 5.1 फीसदी रह सकती है।
उन्होंने कहा कि वृद्धि के लिए नीतिगत समर्थन की जरूरी है। केंद्रीय बैंक का ध्यान सप्लाई और डिमांड को बेहतर करने पर है। उन्होंने कहा कि टीकाकरण से अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलने की उम्मीद है। कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर से अब अर्थव्यवस्था उबर रही है। टीकाकरण बढ़ने से आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ी है और जून के मुकाबले जुलाई में आर्थिक सुधार बेहतर रहा लेकिन कोरोना की तीसरी लहर के प्रति चौकन्ना रहने की जरूरत है।
मौद्रिक नीति की मुख्य बातें
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा की जिसकी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:.. मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने लगातार सातवीं बार प्रमुख नीतिगत दर (रेपो) को 4 प्रतिशत पर बरकरार रखा।
.. इसके परिणामस्वरूप रिवर्स रेपो भी 3.35 प्रतिशत पर कायम।
.. बैंक दर 4.25 प्रतिशत पर बरकरार।
.. रिजर्व बैंक आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिये मौद्रिक नीति के रुख को नरम बनाये रखेगा।
.. खुदरा मुद्रास्फीति 2021-22 में 5.7 प्रतिशत पर रहने का अनुमान, अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में घटकर 5.1 प्रतिशत पर आने की संभावना।
.. रिजर्व बैंक ने जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर 9.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा।
.. आरबीआई ने जी-सैप (सरकारी प्रतिभूति खरीद कार्यक्रम) दो के तहत अगस्त में 25,000-25,000 करोड़ रुपये की दो और नीलामी का प्रस्ताव किया।
.. फरवरी 2019 से रेपो दर में 2.5 प्रतिशत की कटौती, बैंक ब्याज दर में 2.17 प्रतिशत की कमी।
.. आरबीआई ने कहा कि घरेलू बाजार में कर्ज की लागत कम हुई है।
.. सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई), आवास और बड़े उद्योगों के लिये नीतिगत दर में कटौती का लाभ बेहतर रहा है।
.. व्यक्तिगत आवास ऋण और वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्र के लिये ब्याज दरों में उल्लेखनीय कटौती अर्थव्यवस्था के लिये बेहतर साबित हुई है।
.. आरबीआई ने नकदी के मोर्चे पर अतिरिक्त उपायों की घोषणा की।
.. कोविड महामारी के बाद से आरबीआई ने उसके दुष्प्रभाव को कम करने के लिये 100 से अधिक उपायों की घोषणा की।
.. मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक 6 से 8 अक्टूबर को होगी।

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