January 17, 2021

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बिजली विभाग व केईआई कंपनी की लापरवाही अब सामने आने लगी है : आलोक दूबे

राँची:- झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे ने कहा है कि बिजली विभाग और केबल लगाने वाली कंपनी केईआई की लापरवाही अब धीरे-धीरे उजागर होने लगी है, लेकिन अब भी जांच अधूरी है और दोषियों पर कार्रवाई होनी बाकी है, इसलिए पार्टी का एक शिष्टमंडल फिर से जल्द ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर कार्रवाई का आग्रह करेगा।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निर्देश पर इस पूरे मामले की जांच शुरू हुई, तो धीरे-धीरे अब सच्चाई सामने आने लगी है। उन्होंने कहा कि 17जुलाई को रांची के कोकर चौक पर गौतम दूबे के करंट की चपेट में आ जाने के बाद पार्टी ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर हुई जांच में प्रारंभिक तौर पर गंभीर अनियमितता का खुलासा है। बिजली विभाग के अधिकारियों की रिपोर्ट में जिक्र है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गयी है और शहर में जगह-जगह खुदे गड्ढों से लोगों की जान संकट में पड़ गयी है। इस रिपोर्ट में यह बात सामने आयी कि केबल लगाने वाली कंपनी केईआई ने विभिन्न जगहों पर केबल के अंतिम छोर पर टर्मिनेशन किट को लगाकर खुली हालत में छोड़ दिया है।कोकर में जिस स्थान पर दुर्घटना हुई है, उसकी जांच के बाद यह बात सामने आयी है कि दुर्घटनाग्रस्थल पर केबल में लगा टर्मिनेशन किट जमीन में काफी कम ऊंचाई पर खतरनाक अवस्था में था, आम लोगों को घटनास्थल पर जाने से रोकने के लिए भी उसके चारों ओर किसी तरह का अवरोध अथवा खतरे का निशान नहीं लगाया गया था। यही वजह है कि दुर्घटना घटी।
प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि यह जांच रिपोर्ट केईआई की गलती की बात सामने जरूर आ गयी है, लेकिन इस परियोजना के लिए एग्रिमेंट करने वाले बिजली विभाग के महाप्रबंधक श्रवण की जिम्मेवारी भी खत्म नहीं हो जाती है, केबल लगाने के काम में हो रही है लापरवाही की जिम्मेवारी उनपर ही आती है। उन्होंने यह भी कहा कि शहर में यह पहली दुर्घटना नहीं है, इससे पहले 20जून को रांची के एयरपोर्ट के पीछे स्थित टुनकाटोली में महेश्वरी देवी नामक एक महिला और नौ वर्षीय बच्ची की मौत करंट लगने से हो गयी थी। इसके अलावा भी लगातार कई हादसे हो रहे है। 17जुलाई को यदि गौतम दूबे, गोपी के साथ यह हादसा नहीं होता, तो किसी अन्य के साथ भी यह दुर्घटना हो सकती थी। इसलिए मुख्यमंत्री से मुलाकात कर मामले की पूरी तरह से निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की मांग के साथ ही मुआवजे का भी आग्रह किया जाएगा।

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