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सांकेतिक भाषा में परिवर्तित होंगी एनसीईआरटी की पुस्तकें -इससे नहीं सुन नहीं सकने या कम सुनने वालों को होगा लाभ: निशंक

नई दिल्ली(ईएमएस) :- एनसीईआरटी एवं इंडियन साइन लैंग्वेज रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर के बीच एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस ऐतिहासिक समझौते के अंतर्गत हिंदी और अंग्रेजी माध्यम की कक्षा एक से बारहवीं तक की सभी एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकें, शिक्षक पुस्तिका और अन्य पूरक पाठ्यपुस्तक एवं संसाधनों को भारतीय सांकेतिक भाषा में परिवर्तित किया जाना है। इस पहल से उन सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों को लाभ होगा जो सुन नहीं सकते हैं या कम सुन पाते हैं।
एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों की सराहना करते हुए निशंक ने कहा, संस्थान ने अपनी पाठ्यपुस्तकें परिवर्तित होते समाज की परिवर्तित होती आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए निर्मित की हैं। देशभर में एनसीईआरटी द्वारा बनाई गई पाठ्यपुस्तकों के उपयोग से हम विद्यालयी स्तर की शैक्षिक गुणवत्ता को बनाए रखने में सक्षम हो सके है। भविष्य में, इन पुस्तकों में भारत की संस्कृति और परम्पराओं का ज्ञान, बहुभाषिता, मूल्य शिक्षा, संवैधानिक मूल्यों और अनेक महत्वपूर्ण सामाजिक सरोकारों इत्यादि पर अधिक बल देना होगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “हम 34 साल बाद नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लेकर आएं हैं, जिसमें स्कूली शिक्षा और शिक्षक-शिक्षा में आमूल चूल परिवर्तन लाने की संस्तुति की गई है। इस नीति को लागू करने में एनसीईआरटी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इसे लागू करने के लिए एनसीईआरटी द्वारा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा बनाई जाएगी, जो नए पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तकों और स्कूल के अन्य पहलुओं पर दिशानिर्देश देगी।

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