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’राष्ट्रीय जल जीवन मिशन की टीम झारखंड के दौरे पर’


झारखंड को मौजूदा वित्त वर्ष में’ करीब 2,480 करोड़ रुपये उपलब्ध कराये
रांची:- राष्ट्रीय जल जीवन मिशन से विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों का एक दल इन दिनों (6-9 सितंबर 2021) झारखंड के चार ज़िलोंः रांची, धनबाद, खूँटी और हज़ारीबाग के दौरे पर है। इसके अंतर्गत दल के सदस्य हर रोज़, व्यावहारिकता के आधार पर, ज़िले के 3-5 गांवों में जा रहे हैं, जहां वे जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन के विभिन्न पहलुओं पर स्थानीय लोगों, पंचायतों और अधिकारियों से गहन विचार-विमर्श कर रहे हैं, ताकि राज्य के सभी ग्रामीण घरों में नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने के काम में तेज़ी लाई जा सके। ज़िले के दौरे के बाद राष्ट्रीय जल जीवन मिशन का यह दल राज्य-स्तर की टीम से मिलेगा।
झारखंड राज्य 2023-24 तक अपने यहाँ के सभी ग्रामीण घरों (100प्रतिशत) में नल कनेक्शन उपलब्ध करा देने की योजना पर काम कर रहा है। वर्तमान में झारखंड के 59.24 लाख ग्रामीण घरों में से केवल 8.60 लाख घरों (यानि 14.50प्रतिशत) में ही पीने के शुद्ध पानी का नल कनेक्शन है। अगस्त 2019 में ‘जल जीवन मिशन’ की घोषणा से पहले झारखंड में केवल 3.45 लाख घरों, यानि 5.85प्रतिशत घरों में ही नल कनेक्शन था। इस प्रकार, पिछले 24 महीनों के दौरान राज्य में 5.15 लाख और घरों (8.70प्रतिशत) को नल जल के नए कनेक्शन प्रदान किए गए। लेकिन, ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन देने के मामले में राष्ट्रीय औसत 23प्रतिशत के मुक़ाबले झारखंड में हुई प्रगति काफी धीमी है।
2020-21 में झारखंड को जल जीवन मिशन के तहत 572.24 करोड रुपये का केंद्रीय अनुदान आवंटित किया गया था जिसमें से राज्य केवल 143.06 करोड रुपये ही निकाल पाया; इस प्रकार झारखंड को ग्रामीण घरों में नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए कार्यान्वयन की धीमी रफ्तार के कारण 429.18 करोड़ रुपये लौटाने पड़े। ऐसे में, झारखंड को 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण घर में नल जल कनेक्शन देने का काम पूरा करने के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने राज्य को केंद्रीय आबंटन में चार गुना वृद्धि करते हुए उसे इस वित्त वर्ष में 2,479.88 करोड़ रुपये उपलब्ध कराये हैं। इस बढ़े हुए केंद्रीय आबंटन तथा राज्य के 2,617.81 करोड़ रुपये के इस वर्ष के समतुल्य अंश की राशि को मिला कर झारखंड के पास वित्तवर्ष 2021-22 में ‘जल जीवन मिशन’ के तीव्रगामी कार्यान्वयन के लिए समग्र रूप से 5,235.62 करोड़ रुपये की विशाल धनराशि उपलब्ध है! लेकिन, राज्य इस मिशन में अपने खराब वित्तीय और भौतिक प्रदर्शन के कारण अब तक केंद्रीय आबंटन की राशि में से पहली किस्त भी नहीं उठा पाया है।
ग्रामीण स्थानीय निकायों/ पंचायती राज संस्थाओं को जल एवं स्वच्छता कार्यों के लिए 15वें वित्त आयोग के सशर्त अनुदान के रूप में भी झारखंड को 2021-22 के दौरान 750 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं। 15वें वित्त आयोग के इस प्रावधान के तहत अगले पाँच वर्षों के लिए, यानि 2025-26 तक के लिए झारखंड को 3,952 करोड़ रुपये की निश्चित राशि उपलब्ध है।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने झारखंड के मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर उनका ध्यान इस ओर खींचा है कि राज्य में ‘हर घर जल’ का लक्ष्य समय पर हासिल करने के लिए झारखंड के सभी गांवों में नल जल कनेक्शन देने के लिए काम शुरू हो जाना चाहिए। श्री शेखावत ने आशा प्रकट की है कि बढ़े हुए केंद्रीय आबंटन से झारखंड ‘जल जीवन मिशन’ के अंतर्गत निर्धारित विभिन्न गतिविधियों को तेज़ी से लागू कर पाने में सक्षम होगा। उन्होने राज्य से ऐसे सभी संभव प्रयास करने का आग्रह किया है ताकि वह केंद्रीय आबंटन की पूरी राशि जारी करवा सके और उसका भरपूर उपयोग कर सके।
‘जल जीवन मिशन’ एक ऐसा विकेंद्रीकृत, मांग-आधारित और समुदाय संचालित कार्यक्रम है जिसमें विकास की शुरुआत सबसे निचले स्तर से शुरू होती है और स्थानीय समुदाय इसकी योजना बनाने, कार्यान्वयन, प्रचालन और रखरखाव कार्यों से पूरी तरह जुड़ा रहता है। इसे हासिल करने के लिए राज्य स्तर पर अनेक सहायक गतिविधियां भी ज़रूरी हैं, जैसे कि पानी समितियों को मजबूती और अधिकार प्रदान करना, 15वें वित्त आयोग की सह-अवधि के लिए सभी गांवों में पंचवर्षीय ‘ग्राम कार्य योजना’ बनाना, सामुदायिक जागृति पैदा करना, ग्रामीण समुदाय की मदद और मार्गदर्शन के लिए स्वैच्छिक संगठनों को कार्यान्वयन सहयोग एजेंसी (आईएसए) के रूप में शामिल करना, स्थानीय लोगों को ट्रेनिंग देना, आईईसी गतिविधियां, आदि। हर ग्रामीण घर को नल से शुद्ध पेय जल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए स्थापित किए जाने वाले जल आपूर्ति बुनियादी ढांचे के दीर्घकालिक प्रचालन और रख-रखाव के लिए झारखंड को अपने ग्रामीण इलाकों में अभी 2 लाख से ज़्यादा लोगों को प्रशिक्षण देना होगा।
जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण समुदाय को इस बात के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वह आपूर्ति किए जा रहे पेयजल की गुणवत्ता की जांच के लिए समय-समय पर जल-स्रोत और नलकों के पानी की जांच कर चौकसी बरते। राज्य का पी.एच.ई. विभाग ग्रामीण लोगों को प्रशिक्षण और सुविधा दे कर इस योग्य बना रहा है कि वे अपने गाँव में पानी की नियमित रूप से जांच कर सकें। इसके लिए पंचायतों को फील्ड टैस्ट किट (एफ़टीके) समय पर खरीद कर उपलब्ध करने, सामुदायिक स्तर पर कार्य करने के लिए प्रत्येक गांव में 5 महिलाओं का पता लगाने और उन्हें एफ़टीके की मदद से पानी की जांच करने तथा उसकी रिपोर्ट आगे भेजने का प्रशिक्षण देने को प्राथमिकता दी जा रही है।

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