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नायडू ने डीजीपी से तेदपा नेताओं के खिलाफ झूठे मामले वापस लेने का आग्रह किया


विजयवाडा:- तेलुगू देशम पार्टी (तेदपा) राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री एन चन्द्रबाबू नायडू ने सोमवार को आध्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से बिना किसी शर्त के पार्टी नेताओं के खिलाफ झूठे मामले और गिरफ्तारी मामलो को वापस लेने का आग्रह किया ताकि राज्य में पुलिस बल की निष्पक्ष कार्यप्रणाली साबित हो सके।
श्री नायडू ने यहां डीजीपी को लिखे पत्र में डेंडुलुरु के पूर्व विधायक चिंतामनेनी प्रभाकर की गिरफ्तारी को गैरकानूनी और अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि ऐसा लग रहा है कि लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई वाईएसआर कांग्रेस पार्टी सरकार लोकतांत्रिक सरकार प्रदान करने के बजाय लोगों पर ‘दमनकारी पुलिस राज’ कर रही है। आम लोग तथा विपक्षी दलों को कोई भी सदस्य अगर कोई भी सरकार के खिलाफ बोलता है तो पुलिस उन सबको परेशान करती है।
श्री नायडू ने कहा कि पुलिस बल को तेदेपा नेताओं को निशाना बनाने के बजाय अत्याचार, दुष्कर्म, हत्याओं के मामले को रोककर अपराध की घटनाओं को कम करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होेंने कहा कि पुलिस को 28 अगस्त को विपक्ष के प्रदर्शन के खिलाफ दर्ज झूठे सभी मामलों को तत्काल वापस लेने चाहिए। विपक्ष ने पेट्रोल-डीजल और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को वापस लेने के लिए शांति पूर्ण ढंग से प्रदर्शन किया था। लोगों के हितों की रक्षा के लिए उन्हें असहमति व्यक्त करने का पूरा अधिकार है।
उन्होंने डीजीपी को बताया कि पेट्रोल-डीजल और आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती बेतहाशा कीमत पर असहमति जताने के लिए आधी रात को निर्दोष लोगों को गिरफ्तार किया गया। सत्तारूढ पार्टी ने विपक्षी नेताओं को या तो अवैध रूप से नजरबंद कर दिया या सरकार की ‘जनविरोधी’ नीतियों का विरोध करने के लिए झूठे मामलों में फंसा कर उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है और परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि असहमति की अभिव्यक्ति भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों में गारंटी प्रदत्त अभिव्यक्ति की आजादी का हिस्सा है और यह एक लोकतांत्रिक अधिकार भी है।
श्री नायडू ने खेद व्यक्त करते हुए हालांकि कहा कि विपक्ष के नेता को आंध्र प्रदेश राज्य सुरक्षा आयोग में एक सदस्य के रूप में शामिल किया गया है, लेकिन इस आयोग की आज तक कोई बैठक नहीं हुई।

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