April 14, 2021

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नायडू ने देश को समृद्ध, शक्तिशाली बनाने का आह्वान किया

नयी दिल्ली:- देश काे आर्थिक रूप से समृद्ध और शक्तिशाली बनाने का आह्वान करते हुए उप राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा हैे कि गरीबी, अशिक्षा, भ्रष्टाचार, सामाजिक एवं लैंगिक भेदभाव जैसी सामाजिक बुराइयों से निजात दिलाने का प्रयास किया जाना चाहिए जो महान स्वाधीनता सेनानियों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। श्री नायडू ने शुक्रवार को डांडी यात्रा की 91 वीं वर्षगांठ पर सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फेसबुक पर एक लेख में कहा कि 12 मार्च 1930 का दिन भारत के स्वाधीनता आंदोलन में मील का पत्थर है, जब आंदोलन ने नई करवट ली। इसी दिन गांधी जी ने अपनी ऐतिहासिक डांडी यात्रा के साथ सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की। उपराष्ट्रपति ने कहा कि 91 वर्ष बाद आज जब देश अपने नागरिकों की चहुंमुखी तरक्की के लिए विश्वास के साथ कदम बढ़ा रहा है और अपनी आज़ादी के 75 वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज़ादी के 75 वर्ष का उत्सव मनाने के लिए, 75 सप्ताह तक चलने वाले ‘आज़ादी के अमृत महोत्सव’ का शुभारंभ किया। यह महोत्सव आज साबरमती से डांडी की 25 दिवसीय यात्रा के साथ शुरू हुआ, बापू के नमक आंदोलन का ही अनुसरण करते हुए,यह यात्रा भी पांच अप्रैल को ही समाप्त होगी। लंबे और कठिन आंदोलन के बाद मिली भारत की आज़ादी का उत्सव ऐसे ही मनाया जाना चाहिए। उन्हाेंने कहा कि आज़ादी के बाद से अब तक की देश की यात्रा को याद करने का यह अनूठा ही तरीका होगा। अपने डांडी मार्च से गांधी जी ने देश भर को आंदोलित कर दिया था, उन्होंने प्रतीक के रूप में नमक का प्रयोग कर देश को एक गहरा संदेश दिया था, जिससे हर आम आदमी उनसे सहज ही जुड़ गया। अहिंसा में अपने अडिग विश्वास और अपने फौलादी संकल्प के साथ गांधी जी वह मांग रहे थे जो सही मायनों में हमारा ही अधिकार था, उन्होंने अंग्रेज़ों और दुनिया को दिखा दिया कि भारत बल और दमन के आगे झुकेगा नहीं। डांडी मार्च ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि हमारे इरादे और हमारे कर्म शुद्ध हैं और उनमें परस्पर समन्वय है तो हम हर नियत लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। श्री नायडू ने कहा कि एक शक्तिशाली और समर्थ भारत बनाने के लिए आवश्यक है कि नागरिक, विशेषकर हमारे युवा स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं। हम पुनः अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ें, सनातन मूल्यों को अपनाएं, पर्यावरण के प्रति जागरूक रहें तथा प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करें। यह हमारा दायित्व है कि भावी पीढ़ी के लिए हम एक हरी भरी पृथ्वी छोड़ कर जाएं। संकल्प लें कि छोटे मोटे मसलों पर जनता में फूट डालने और वैमनस्य पैदा करने वालों के खिलाफ संघर्ष में सबसे आगे खड़े रहेंगे और उनके इरादे विफल कर देंगे। हम अपने युवाओं को निरंतर प्रशिक्षित करें जिससे वे चौथी औद्योगिक क्रांति की मांगों को पूरा करने में सक्षम बनें और हम अपने युवाओं के सामर्थ्य का लाभ उठा सकें। यह हमारा कर्तव्य है कि हम दिव्यांग जन, महिलाओं, वृद्ध जनों तथा ट्रांसजेंडर लोगों को लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्थान दें और विकास के लाभ उन तक भी पहुंचाएं। हम यह सुनिश्चित करें कि हर नागरिक को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आहार उपलब्ध हो सके। हर क्षेत्र में आत्म निर्भर बनें – हमारे स्वाधीनता सेनानियों को यह सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी।
उन्होंने कहा कि अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में आज से शुरू होने वाली 25 दिवसीय पदयात्रा उस प्रेरणा का प्रतीक है जो हम अपने अतीत से प्राप्त करते रहे हैं,यह यात्रा उस दृढ़ इरादे के प्रतीक है कि हम वर्तमान एवं भविष्य की चुनौतियों का मुकाबला साथ मिल कर पूरे समर्पण, हौंसले और विश्वास के साथ करेंगे। यह महोत्सव एक राष्ट्र के रूप में हमारी यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है, यह उत्सव का अवसर है, यह अवसर है कि हम उस महान विरासत को याद करने का जो महात्मा जी और अनगिनत स्वाधीनता सेनानी हमारे लिए छोड़ गए हैं। यह मौका है कि हम उस ‘नए भारत’ की दिशा में तेजी से बढ़ें जैसा कि हम सब चाहते हैं – एक ऐसा देश जहां हर नागरिक, हर समुदाय अधिकार- संपन्न हो, हर किसी को यथा सामर्थ्य अपनी क्षमता को उजागर करने के अवसर मिलें।
उन्होंने कहा कि देशवासियों को अधिक से अधिक संख्या में आगे बढ़ कर इस अमृत महोत्सव में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और लोकतांत्रिक गणतंत्र की जड़ों को मजबूती प्रदान करनी चाहिए और साझे भविष्य में बराबर के हिस्सेदार बनना चाहिए।
श्री नायडू ने कहा कि आज से शुरू हो रहे अमृत महोत्सव के दौरान हमारा यह दायित्व होगा कि हम अपने स्वाधीनता सेनानियों के संकल्प और शौर्य को याद करें, उनके बलिदानों का गौरव मनाएं, उनके ऊंचे आदर्शों को स्मरण करें। हम अपने युवाओं को इन महान विभूतियों के कृतित्व से परिचित कराएं। उन्हें भी मालूम होना चाहिए कि कैसे हजारों की संख्या में वीर और वीरांगनाएं आंदोलन की पहली पंक्ति में शामिल हो गए और भारत को विदेशी सत्ता से आजाद करवा कर ही माने। आज हम जिस आज़ादी में सांस ले रहे हैं, हमें याद रखना चाहिए कि पूरी आज़ादी तभी मिलेगी जब हम उन लक्ष्यों और संकल्पों को पूरा करेंगे जो हमने खुद के लिए, अपने संविधान में निर्धारित किए हैं। अभी तक की हमारी यात्रा का हम स्वयं वस्तुनिष्ठता के साथ विश्लेषण करें और भविष्य में जीतने के लिए नए क्षितिज निर्धारित करें।
उन्हाेंने कहा कि आज़ादी मिलने के समय कई लोगों ने भारत की विशालता और विविधता को देखते हुए, उसकी जुझारू क्षमता पर शक किया था। भारत ने उन सबको सिरे से गलत साबित किया है। हमारी विविधता, हमारे साझे सांस्कृतिक मूल्य वास्तव में हमारे देश की एकता को और बल देते हैं। हम भले ही अलग अलग क्षेत्रों से आते हों, अलग अलग भाषा बोलते हों, विभिन्न समुदायों से आते हों लेकिन मूलभूत सत्य यही है कि हम सब भारतीय हैं। हम व्यक्ति की आज़ादी में विश्वास करते हैं, हम समुदायों के बीच सौहार्दपूर्ण सह-अस्तित्व और मानव मात्र के बीच सार्वभौमिक भाईचारे में यकीन करते हैं। इस भारतीयता ने ही हमें एक सूत्र में इकट्ठा बांध रखा है। आज़ादी के लिए लड़ते समय और संविधान बनाते समय, हमारे नेताओं का लक्ष्य एक स्वयंभू गणराज्य से आगे बढ़ कर कहीं अधिक व्यापक था। नागरिकों की तरक्की और कल्याण हमारी संवैधानिक मर्यादाओं में ही निहित है। सालों से सरकारें नागरिकों के जीवन को सुगम बनाने के लिए महती भूमिका निभा रही हैं।
श्री नायडू ने कहा कि सौभाग्य योजना, आयुष्मान भारत तथा किसान सम्मान निधि जैसी कितनी ही योजनाओं के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करती रही है कि प्रगति के लाभ सभी तक पहुंचें। सरकार ने अर्थव्यवस्था के इंजन को और तीव्रता करने के लिए अभीष्ट कदम उठाए हैं जिससे विकास में निरंतरता बनी रही, वह स्थाई हो। नागरिकों को सक्षम बनाने और उनके सशक्तिकरण के लिए सुशासन आवश्यक है। प्रशासन का एक ही मॉडल ऊपर से नीचे थोपे जाने के बजाय उसे विकेंद्रीयकृत करके जन-केंद्रित बनाया गया है जिससे सभी की सम्मति और शिरकत सुनिश्चित की जा सके। स्थानीय निकाय हमारे संघीय ढांचे में एक नया स्तर जोड़ते हैं जो भारतीय लोकतंत्र को स्थानीय स्तर तक पहुंचा रहा है। आगे भी हमें इसी भाव से प्रयास करते रहना है और भारत को अधिक शक्तिशाली और समृद्ध देश बनाना है।
भारत को आर्थिक रूप से शक्तिशाली बनाने के साथ साथ हमें सामाजिक एकता को बढ़ाने के लिए भी प्रयास करते रहना है तथा गरीबी, अशिक्षा, भ्रष्टाचार, सामाजिक एवं लैंगिक भेदभाव जैसी सामाजिक बुराइयों से निजात दिलानी है। हमारे महान स्वाधीनता सेनानियों को यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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