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एक नयी सुबह का

सांसद सामूहिक रुप से करें आत्मचिंतन: नायडु


नयी दिल्ली:- राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र के दौरान सदन के कामकाज पर चिंता और अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए बुधवार को कहा कि इस संबंध में सदस्यों को सामूहिक और व्यक्तिगत रुप से आत्मचिंतन करना चाहिए।
श्री नायडू ने सुबह सदन की कार्यवाही शुरू करते हुए कहा कि आज सदन का शीतकालीन सत्र समाप्त हो रहा है। सदन की 18 बैठकों में कुल उत्पादकता 47.90 प्रतिशत रही है जो उसकी क्षमता से बहुत ही कम है। उन्होेेंने कहा, “ मुझे यह बताते हुए बहुत अप्रसन्नता हो रही है कि सदन का कामकाज इसकी क्षमता से कम रहा है। मैं आप से सबसे यह अनुरोध करता हूं कि सभी सामूहिक और व्यक्तिगत रुप से इस पर चिंतन करें कि क्या यह सत्र बेहतर नहीं हो सकता था।”
उन्होंने कहा कि सत्र के दाैरान कुल 45 घंटे 34 मिनट सदन की बैठक हुई जबकि निर्धारित समय 95 घंटे छह मिनट था। सदन की उत्पादकता इस दौरान कुल 47.90 प्रतिशत रही जो पिछले चार साल में 12 सत्रों में पांचवी बार सबसे कम है। सदन में लगातार व्यवधानों और स्थगन के कारण 49.32 मिनट बरबाद हो गये। कुल उपलब्ध समय का 52.05 प्रतिशत समय हंगामेें में नष्ट हो गया। प्रश्नकाल का कुल 60.60 प्रतिशत समय बरबाद हुआ। सात बैठकों में प्रश्नकाल नहीं हो सका।
सत्र के दौरान सदन में 10 विधेयक पारित किये गये जबकि विनियोग विधेयक 2021 पर चर्चा अधूरी रही। विधेयकों पर कुल 21 घंटे सात मिनट चर्चा की गयी। इन चर्चाओं में मंत्रियों ने 127 हस्तक्षेप किये। शून्यकाल का मात्र 30 प्रतिशत समय का उपयोग सदस्य कर सके और पूरे सत्र के दौरान केवल 82 मुद्दें उठाये जा सके। इस दौरान सदस्यों ने 64 मुद्दों को विशेष उल्लेख के जरिए सदन में रखा।

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