June 16, 2021

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मैथिली दिवस पर मां सीता की हुई पूजा

सहरसा:- जिले के सत्तरकटैया प्रखंड के लक्ष्मीनिया गाँव में गुरुवार को माँ सीता के जन्म दिवस पर 18 फीट ऊंची प्रतिमा का सीता नवमी पर यज्ञ, अनुष्ठान, पूजा और उपवास कार्यक्रम आयोजित किया गया। संस्थान के संस्थापक भोगेन्द्र शर्मा ने बताया कि इस परिसर में महाकवि विद्यापति, उगना महादेव, राजा जनक, ऋषि याज्ञवल्कय, मंडन मिश्र,कारू खिरहर, राजा सलहेस, दीनाभद्री, मांगैन खब्बास सहित 18 फीट ऊंची माँ सीता की प्रतिमा स्थापित है ।उन्होने बताया कि इस परिसर में महाकवि विद्यापति के जयंती पर स्थापना दिवस धूमधाम से कार्तिक धवल त्रयोदशी को मनाया जाता है । मैथिली भाषा के संरक्षण व संबर्धन के लिए आज यह परिसर प्रेरणा देती है जहाँ जानकी नवमी को मैथिली दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होने कहा कि जनक नंदिनी माता सीता आज के दिन ही बिहार के सीतामढ़ी जिला के पुनौरा धाम मे मिथिला नरेश राजा जनक जी द्वारा धरती पर हल चलाने के क्रम में प्रकट हुई थी।इन्हें मां लक्ष्मी का अवतार माना गया है। सीता मां धैर्य और समर्पण की देवी है। इसलिए बिहार विशेषकर मिथिला में सुहागिन स्त्री पति के लंबी उम्र के लिए व्रत रखती है और कुंवारी कन्या मनवांछित वर पाने के लिए व्रत उपवास रखती है।यहां भी सीता नवमी के अवसर पर यज्ञ अनुष्ठान पूजन और उपवास का आयोजन किया गया है। उन्होने कहा कि मिथिला सहित पूरे बिहार के लिए यह एक महत्वपूर्ण दिवस है। बिहार सरकार ने भी इस दिवस पर सरकारी छुट्टी दे रखी है। एक तरफ जहां पूरे राष्ट्र में रामनवमी का त्यौहार धूमधाम से मनाया जाता है वही सीता नवमी को अधिकांश लोग मां सीता को भूले बिसरे रहते हैं। सीता मां मिथिला की पुत्री और रामायण में आदर्श पत्नी और मां के रूप में प्रख्यात है। सीता के बिना राम की परिकल्पना अधूरा है ।

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