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बाढ़ के कारण अधिकतर चापाकल हुए खराब, पेयजल की समस्या गहराई


भागलपुर:- जिले में बाढ़ का पानी उतरने के बाद बाढ़ पीड़ितों के बीच पेयजल की समस्या हो गयी है। एक तरफ बाढ़ के कारण हर तरह अफरातफरी की स्थिति बनी हुई है। सड़क खराब होने के कारण चारों तरफ का आवागमन प्रभावित हो गया है। गंगा और कोसी नदी में उफान के कारण कुल 14 प्रखंड बाढ़ प्रभावित हो गए हैं। हालांकि अब जलस्तर धीरे-धीरे घटने लगा है। गंगा नदी अब खतरे के निशान से नीचे बह रही है लेकिन अभी भी बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारियां कम नहीं हुईं हैं। जिले के बाढ़ प्रभावित 14 प्रखंड के 139 पंचायतों की 9.31 लाख की आबादी की मुश्किलें बढ़ गई है। सबसे ज्यादा मुश्किलें अब पेयजल को लेकर हो रही है। बाढ़ के कारण पीएचईडी के करीब 4.52 करोड़ की जलापूर्ति योजना का कार्य बर्बाद हो गया है। इस वजह से करीब 110 पंचायतों में पेयजल का संकट गहरा गया है। जिलाधिकारी ने बाढ़ का पानी कम होने के साथ ही पीएचईडी के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को खराब चापाकल को तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। पेयजल को जीवाणु रहित करने के लिए आवश्यक दवाई और ब्लीचिंग पाउडर का भी छिड़काव कराया जा रहा है। जिले में करीब 300 गांव अभी भी बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है। इस कारण उसे दुरुस्त करना तो दूर वास्तविक क्षति का आकलन भी विभाग की ओर से नहीं किया जा सका है।
अब तक पीएचईडी विभाग ने प्रारंभिक क्षति का रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपा है। जिसमें बताया गया है कि लगभग 247 चापाकल बाढ़ के पानी में डूब चुका है। इनमें खरीक प्रखंड के लोकमानपुर का वार्ड नंबर-2, बिहपुर के हरिओ का वार्ड नंबर- 4 और इस्माइलपुर के नारायणपुर लक्ष्मीपुर का वार्ड नंबर-12 शामिल हैं। यह सभी वार्ड बाढ़ से पूरी तरह से तबाह हो गया है। सबसे अधिक गंगा पार के इलाके की योजना प्रभावित हुई है। इसमें सबसे अधिक गोपालपुर के 50 वार्डों में पेयजल योजनाओं पर असर पड़ा है। जबकि रंगरा 38 वार्डों में भी बाढ़ का प्रभाव पड़ा है। इसके अलावा नवगछिया के 24 वार्डों के बाद नाथनगर में सबसे अधिक जलापूर्ति योजना क्षतिग्रस्त हुई है।
जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने कहा कि बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही सबसे पहले प्रभावित इलाकों में ब्लीचिंग और दवाईयों का छिड़काव शुरू कर दिया गया है। इस काम के लिए टीम भी बना दी गई है। रोजाना की रिपोर्ट भी ली जा रही है। बाढ़ के कारण जितने भी चापाकल खराब हुए हैं, उसको मरम्मत किया जा रहा है। इसके अलावा जीवाणु रहित पानी को लेकर भी पीएचइडी विभाग काम कर रही है। पीएचईडी के लोग रोजाना खराब हुए चापाकल का मरम्मत कराकर रिपोर्ट भेज रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि जिले में पीएचईडी विभाग पूर्वी और पश्चिमी दो भागों में बंटा हुआ है। पूर्वी में 77 और पश्चिमी ने 33 पंचायत बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। पूर्व में पूरी तरह से तीन और आंशिक रूप से 173 जलापूर्ति योजना क्षतिग्रस्त हुई है। जिसका अनुमानित क्षति 358 लाख रुपये है। जबकि पश्चिम में 34 योजनाओं में आंशिक रूप से क्षति हुई है। अनुमानित 436 लाख रुपये की जलापूर्ति योजना क्षतिग्रस्त हुई है। इसमें मुख्यमंत्री पेयजल योजना के तहत बिछाई गई पाइप लाइन से लेकर की जा रही जलापूर्ति योजना शामिल है। जिसके कारण लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ से सबसे अधिक पीएचईडी के पूर्व के इलाके में योजना को क्षति हुई है। योजना के अलावा चापाकल भी क्षतिग्रस्त हुआ है। इसमें पीएचईडी पूर्व में 185 चापाकल डूबकर खराब हो गए हैं। जिसका अनुमानित वित्तीय क्षेत्र 11.50 लाख का है। जबकि पीएचईडी पश्चिम में 4.50 लाख की लागत के 62 चापाकल खराब हुए हैं। यानी 16 लाख की लागत से गाड़े गए 247 चापाकल खराब हो गए हैं। हालांकि इसकी संख्या अभी और बढ़ सकती है, क्योंकि अभी गांव से पानी पूरी तरह से उतरा नहीं है। पानी पूरी तरह से निकलने के बाद विभाग की ओर से वास्तविक आकलन किया जाएगा। इसके बाद क्षति की वास्तविक हकीकत का पता चल सकेगा।

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