April 17, 2021

अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

मोदी सरकार को आम लोगों की कोई चिंता नहीं-कांग्रेस

रांची:- आज पुनः गैस की कीमतों में बढ़ोत्तरी हुई है जिस पर प्रतिक्रिया स्वरूप प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने प्रेस वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि ईंधन में लगातार हो रही इन कमरतोड़ बढ़ोत्तरी से स्पष्ट है की मोदी सरकार को लोगों की लगातार घटती आय और बढ़ रही महंगाई से उत्पन्न होने वाली समस्याओं से पीड़ित आम लोगों के लिए कोई फिक्र और सरोकार नहीं है।
राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि एक महीने से कम समय में सब्सिडी, गैर सब्सिडी और उज्जवला योजना वाले घरेलू गैस सिलेंडरों के दामों में 125 रुपये प्रति सिलिंडर की भारी बढ़ोतरी और रसोई गैस सब्सिडी बंद करने के बाद आज सीएनजी- पीएनजी गैस की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी से मोदी सरकार का गरीब और मध्यम वर्गीय विरोधी चेहरा सामने आ गया है, जो मोदी सरकार के अहंकार का जीता-जागता उदाहरण है।
लोग कोरोना की मार से अभी पीड़ित हैं, अर्थ व्यवस्था नकारात्मक है, गरीब लोग ज्यादा गरीब हो गए लेकिन इसके बावजूद इस घमंडी सरकार ने देश के गरीबों, मध्यमवर्गीय और गैर आयकरदाताओं और उज्जवला योजना लाभार्थियों को भी महंगाई से कोई राहत नहीं दी और अब उन्हें एक रसोई गैस सिलेंडर के लिए देश में कम से कम 819 रुपए जरूर देने होंगे।
पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के बाद आज वाहनों में इस्तेमाल होने वाले सीएनजी में 70 पैसे प्रति किलोग्राम के इजाफे से परिवहन भाड़े मंहगे हो जाएंगे, जिससे महंगाई और बढ़ेगी। पाइप के जरिए घरों की रसोई तक पहुंचने वाली पीएनजी गैस की कीमत में 91 पैसे की बढ़ोत्तरी होने से घरों का बजट बिगड़ेगा। पेट्रोल, डीजल और सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर का भाव पहले से रिकॉर्ड स्तर पर है।
पिछले 26 दिनों के भीतर इस जन विरोधी सरकार ने रसोई गैस के सिलिंडर में चार बढ़ोतरियों के माध्यम से 125 रुपये की बढ़ोतरी की है। सब्सिडी, गैर सब्सिडी और उज्जवला योजना के लाभार्थियों के लिए, 1 मार्च को 25 रुपए प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की, उससे पहले 25 फरवरी को 25 रुपये, 15 फरवरी को 50 रुपये, 4 फरवरी को 25 रुपये बढ़ाए गए थे। इस प्रकार पिछले एक महीने के भीतर सभी श्रेणियों के लिए सिलिंडर की कीमत में 125 रुपये की वृद्धि की जा चुकी है।
रसोई गैस के दाम सऊदी आराम्को (ैंनकप ।तंउबव) के एलपीजी मूल्यों के आधार पर तय होते हैं, जो अब 587.21 अमरीकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन हैं, जिस पर आज के डॉलर- भारतीय रुपए की 73.04 विनिमय दर से 42,889.81 रुपए प्रति मीट्रिक टन, यानि 42.88 रुपए एलपीजी गैस प्रति किलो का अन्तर्राष्ट्रीय मूल्य बनता है। एक घरेलू रसोई गैस सिलेंडर में 14.2 किलो गैस आती है, यदि उस गैस का आधार मूल्य की गणना की जाए, तो वह 609 रुपए 3 पैसे प्रति सिलेंडर बनता है। इस मूल्य पर मोदी सरकार द्वारा 5 प्रतिशत की दर से जीएसटी, बोटलिंग चार्जेज, एजेंसी कमीशन, ट्रांस्पोर्टेशन और मुनाफे को जोड़कर देश के गरीबों से 819 रुपए वसूला जा रहा है, जो मोदी सरकार की गरीब और मध्यम विरोधी सोच को बेनकाब करता है।
यूपीए की सरकार में एलपीजी का अंतर्राष्ट्रीय मूल्य 2012-2013 और 2013-2014 में 885.2 और 880.5 यूएस डॉलर था, लेकिन यूपीए की सरकार महंगे भाव से एलपीजी को खरीदकर आम जनता को भारी सब्सिडी देकर केवल 399- 414 रुपए प्रति सिलिंडर के भाव में देती थी। यूपीए की सरकार अब से 50 प्रतिशत से ज्यादा महंगे अंतर्राष्ट्रीय मूल्य पर एलपीजी खरीदकर देश की ग्राहकों को आज से आधे दामों पर सब्सिडी पर देती थी। इसी प्रकार पेट्रोल और डीजल पर भी जनता पर कम टैक्स लगाने के बावजूद कच्चे तेल के अंतर्राष्ट्रीय मूल्यों पर अंडर रिकवरी, यानि मूल्यों से बहुत कम वसूला जाता था।
पेट्रोलियम प्लानिंग और एनालिसिस सेल के अधिकृत आंकड़े बताते हैं कि यूपीए सरकार ने 2011-12 में कांग्रेस-यूपीए सरकार ने देश की जनता से पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस पर 1,42,000 करोड़ रुपए की राहत दी, जो 2012-13 में 1,64,387 करोड़ रुपए और 2013-14 में 1,47,025 करोड़ रुपए हो गया था, जिसे यह सरकार 2016-17 में 27,301 करोड़, 2017-18 में 28,384 करोड़, 2018-19 में 43,718 करोड़ और 2019-20 में 26,482 करोड़ पर ले आई, किंतु इस वर्ष तो मोदी सरकार ने सभी सब्सिडियों के नाम पर केवल 11,729 करोड़ रुपए की राहत दी है। यदि यूपीए और भाजपा सरकारों द्वारा पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की अंडर रिकवरी और एक्साइज ड्यूटी वसूली को जोड़ लिया जाए, तो साफ ज़ाहिर होता है कि यूपीए सरकार जहाँ एक तरफ कम टैक्स वसूलती थी, लेकिन पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस में जनता को ज्यादा राहत देती थी, दूसरी ओर भाजपा की सरकार ज्यादा टैक्स वसूलती है, लेकिन पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस में कोई राहत न देकर सीधी मुनाफाखोरी करती है। आज के समय में जो सब्सिडी वाला सिलेंडर 819 रुपये का बिक रहा है, वो कांग्रेस के समय 400 रुपये के करीब था।
पांच राज्यों में चुनाव देखकर मोदी सरकार पेट्रोल-डीजल पर आज जो टैक्स कम करने की बात कर रही है, उसे खुद के द्वारा बढ़ाए सारे टैक्स कम करके वर्ष 2014 में यूपीए सरकार के स्तर पर लाना चाहिए। पेट्रोल और डीजल में क्रमश 23.87 रुपए और 28.37 रुपए प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी कम होनी चाहिए, जिसे मोदी सरकार ने पिछले पौने सात साल में बढ़ा कर वसूला है। कांग्रेस के सत्ता से जाने के बाद मई 2014 में जब मोदी सरकार सत्ता में आयी, तब कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल थी, लेकिन पेट्रोल 71.51 रुपए और डीजल 57.28 रुपए पर था, जो आज 64.68 डॉलर है, इस प्रकार कच्चे तेल की कीमत 40 प्रतिशत गिरी है लेकिन पेट्रोल 27.5 प्रतिशत बढ़ कर 91.17 रुपए और डीजल 42.2 प्रतिशत बढ़ कर 81.47 रुपए हो गया है, जिसके लिए केवल मोदी सरकार द्वारा बढ़ाए टैक्स जिम्मेदार हैं।
आज एलपीजी गैस और कच्चे तेल के अंतर्राष्ट्रीय दाम कांग्रेस के समय से काफी कम हैं इसलिये उपरोक्त मूल्यवृद्धि को वापस कम करते हुए आम जनता को राहत पहुंचाई जाए ।

Recent Posts

Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com
%d bloggers like this: