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आधुनिक शहर ऐसे हों, जिनमें विरासत भी हो और विकास : मोदी


वाराणसी:- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शहरों के आधुनिकीकरण की जरूरत को तात्कालिक अनिवार्यता बताते हुये कहा है कि शहरों को इस प्रकार से आधुनिक बनाना, समय की मांग है जिनमें विरासत और विकास एकसाथ दिखें और जनसामान्य का जीवन यापन सुगम हो सके।
मोदी ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में आयोजित अखिल भारतीय मेयर सम्मेलन को वचुर्अल माध्यम से संबोधित करते हुये कहा, “हमें ऐसे आधुनिक शहर बनाने होंगे जिनमें विरासत भी हो और विकास भी हो।” उन्होंने कहा कि देश में ज़्यादातर शहर पारंपरिक शहर ही हैं और वे पारंपरिक तरीके से ही विकसित हुए हैं। आधुनिकीकरण के इस दौर में इन शहरों की प्राचीनता की भी उतनी ही अहमियत है जितना कि उनका निरंतर विकास किया जाना जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी ने दो दिवसीय मेयर सम्मेलन का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे। सम्मेलन में देश के सभी शहरों के मेयर बदलते समय की जरूरतों के मुताबिक शहरों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त करने के उपायों पर विचार विमर्श करेंगे। साथ ही शहरों में हो रहे बेहतर कामों से जुड़े एक दूसरे के अनुभवों को भी साझा करेंगे।
इस दौरान मोदी ने सुगम यातायात को आधुनिक शहरों की प्राथमिक जरूरत बताया। उन्होंने सुझाव दिया कि शहरों में यातायात की सुगमता के नाम पर फ्लाईओवरों की संख्या बढ़ाते जाना ट्रैफिक जाम की विकराल होती समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि सुगम यातायात का एकमात्र उपाय सार्वजनिक यातायात ही है और इसे मेट्रो रेल की तर्ज पर बेहतर बनाते हुये बढ़ावा देना ही पड़ेगा। देशव्यापी स्तर पर स्वच्छता अभियान के प्रभाव का जिक्र करते हुये प्रधानमंत्री माेदी ने कहा कि इस अभियान के तहत देश के तमाम शहर साफ सुथरे हुये हैं। मोदी ने कहा कि इस अभियान में जो शहर पीछे रह गये वे यह सोच कर निष्क्रिय न बैठे रहें कि उन्हें स्वच्छता का इनाम नहीं मिलेगा। इसलिये वे आंखें मूंद कर बैठ न जायें। प्रधानमंत्री ने सभी मेयरों से आह्वान किया कि वे स्वच्छता को सिर्फ एक कार्यक्रम मात्र न समझें, बल्कि इसे अभियान की तरह लें। गौरतलब है कि वाराणसी प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय क्षेत्र भी है। उन्होंने कहा कि काशी में हो रहे अखिल भारतीय मेयर सम्मेलन को वह कई संभावनाओं के साथ जोड़कर देख रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि बनारस जैसे दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में शुमार वाराणसी में आधुनिक भारत के आधुनिक शहरों की रूपरेखा तय होना अहम बात है। प्रधानमंत्री मोदी ने जल संकट और साफ नदियों के मुद्दे पर भी मेयरों से सम्मेलन में गंभीर मंथन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “आज जब पूरी दुनिया जल संकट की बात करती हो, जब पूरी दुनिया ग्लोबल वॉर्मिंग एवं क्लाइमेट चेंज की बात करती हो, ऐसे में हम अपनी नदियों का भी ध्यान नहीं रखते। लेकिन हमें अपने शहर में अपनी नदियों को बचाने के लिए प्रयास करने होंगे।” वाराणसी में गंगा सफाई अभियान का उदाहरण देते हुये मोदी ने कहा कि काशी के गंगा घाट पर दुनियाभर के पर्यटक आते हैं। काशी की अर्थव्यवस्था को चलाने में माता गंगा का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने अपील की, “हम सभी को अपने शहरों की नदी के प्रति एक संवेदनशील रवैया अपनाना होगा।” प्रधानमंत्री ने वर्तमान और भावी पीढ़ी को नदियों से भावनात्मक रूप से जोड़ने की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने इसके लिये शहरों में नदी उत्सव मनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा, “हमें अपने शहर में हर वर्ष 7 दिन के लिए नदी उत्सव मनाना चाहिए। उसमें पूरे शहर को जोड़िए। उस उत्सव में नदी की सफाई व उसकी विशेषता पर फोकस किया जाये।” इसी तर्ज पर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शहर के रखरखाव में जनसहभागिता की अहमियत को बेहद जरूरी बताया। उन्होंने सुझाव दिया कि स्थानीय लोगों में अपने शहर के प्रति संवेदनायें जगाने के लिये शहर का जन्मदिन भी मनाया जाना चाहिये। मोदी ने कहा, “हमें अपने शहर का जन्मदिन पता होना चाहिए। साथ ही मेरा शहर कैसा हो, इसके लिए भी काम करना होगा। इसके लिए सबसे अच्छा तरीका है कि हम अपने शहर का हर वर्ष जन्मदिन मनायें। उन्होंने कहा कि ये बातें बहुत छोटी हैं लेकिन इन छोटी छोटी बातों का ध्यान रखकर शहरों को जीवंत बनाने का बहुत बड़ा काम आसानी से पूरा किया जा सकता है। इसके लिये मोदी ने शहरों में लगायी जाने वाली महापुरुषों की मूर्तियों के रखरखाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “हमारे शहरों में महापुरुषों की प्रतिमाएं लगी होती हैं। उन महात्माओं की मूर्ति को हम सिर्फ उनकी जयंती पर याद करते हैं। हमें ऐसा माहौल बनाना होगा कि हर दिन हम महापुरुषों की मूर्ति की सफाई करें और बच्चों को इसके लिए जागरुक करें।” इस प्रकार के छोटे छोटे किंतु महत्वपूर्ण कामों के लिये उन्होंने एनसीसी के कैडिट्स की टोलिया बना कर उन्हें तैनात करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अगर इस काम को मेयर अपने शहर में प्रतियोगिता के रूप में करा सकते हैं। इससे बच्चे उन महापुरुषों की जीवनी से अवगत भी हो सकेंगे और उनके मन में अपने शहर को साफ सुथरा रखने का भाव भी जागृत होगा। मोदी ने स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने में भी मेयरों की महत्वपूर्ण भूमिका का जिक्र करते हुये कहा कि इसके लिये शहरों में सार्वजनिक एवं निजी स्तर पर एलईडी बल्ब के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने कहा, “आपको तय करना चाहिए कि मेरे शहर की हर गली में हर बल्ब, एलईडी हो। इससे नगर पालिका, महानगर पालिका के बिजली का बिल काफी कम हो जाएगा और रोशनी भी अच्छी मिलेगी।” उन्होंने कहा कि इसी प्रकार हर घर में भी एलईडी बल्ब हो, इससे घरों में बिजली का बिल कम होगा। इस अवसर मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन में वाराणसी के कायाकल्प का हवाला देते हुये मेयरों का आह्वान किया कि काशी में हुये विकास और परंपरा के संरक्षण से सबक लिया जा सकता है। योगी ने कहा, “सात वर्ष पहले जो भी लोग काशी आए होंगे, आज वे काशी को नहीं पहचान पाएंगे। वर्ष 2014 के पहले काशी में लटकते-झूलते तार थे। बिना किसी प्लान के सब चीजें थीं। व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए ‘विकास’ होते थे। लेकिन आदरणीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में काशी ने विकास का अप्रतिम उदाहरण प्रस्तुत किया है।”

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