May 16, 2021

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नगर आयुक्त के कारण नहीं हो पाई स्थाई समिति की बैठक : मेयर

रांची:- रांची नगर निगम की मेयर आशा लकड़ा ने कहा कि राजधानी में कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रसार की रोकथाम के लिए शनिवार को स्थाई समिति की आपात बैठक बुलाई गई थी। लेकिन नगर आयुक्त की अकर्मण्यता व लापरवाही के कारण बैठक नहीं हो पाई। मेयर ने कहा कि स्थाई समिति की आपात बैठक के लिए शुक्रवार को ही नगर आयुक्त व अपर नगर आयुक्त को पत्र भेजा गया था। अब नगर आयुक्त कह रहे हैं कि उन्हें न तो पत्र मिला और न ही कोई जानकारी दी गई। जबकि नगर आयुक्त के कार्यालय में शुक्रवार को 11 बजे पत्र रिसीव किया गया था। यदि नगर आयुक्त का जवाब सही है तो मेयर की ओर से भेजे गए पत्र की जानकारी देना उनके मातहत कार्य कर रहे कर्मचारी का धर्म है। यदि संबंधित कर्मी ने नगर आयुक्त को मेयर द्वारा भेजे गए पत्र की जानकारी नहीं दी तो ऐसे लापरवाह कर्मी पर नगर आयुक्त तत्काल कार्रवाई करें। उन्होंने बताया कि स्थाई समिति की आपात बैठक बुलाने का निर्देश दिया गया था। फिर भी बैठक शुरू कराने के लिए न तो नगर आयुक्त आए और न ही कोई अन्य अधिकारी। नगर आयुक्त ने संदेश भेजा कि एक बजे से स्थाई समिति की आपात बैठक कराई जाएगी। लेकिन एक बजे के बाद भी न तो नगर आयुक्त आए और न ही कोई अन्य अधिकारी। फिर नगर आयुक्त ने अपने कार्यालय में उपस्थित कर्मी से संदेश भेजा कि वे आवश्यक कार्य से शहर से बाहर हैं। उनकी अनुपस्थिति में अपर नगर आयुक्त को नगर आयुक्त का प्रभार दिया गया है। रांची नगर निगम से संबंधित सभी कार्य नगर आयुक्त की अनुपस्थिति में अपर नगर आयुक्त देखेंगे। इसके बाद अपर नगर आयुक्त का संदेश आया कि उनकी तबीयत खराब है, वे कोरोना जांच कराने के लिए हॉस्पिटल जा रहे हैं। मेयर ने अधिकारियों के इस हाजिर जवाब पर कहा कि शुक्रवार तक सभी अधिकारी भले-चंगे थे। लेकिन जब मेयर की ओर से स्थाई समिति की आपात बैठक बुलाई गई और 2020 में कोरोना महामारी से निपटने के लिए मेयर व डिप्टी मेयर द्वारा नागरिक सुविधा मद से दी गई एक-एक करोड़ की राशि का हिसाब मांगा गया तो किसी अधिकारी को आवश्यक कार्य से शहर से बाहर जाने, तो किसी को कोरोना जांच कराने की जरूरत पड़ गई। उन्होंने बताया कि झारखंड नगरपालिका अधिनियम-2011 के तहत पार्षदों के पांचवें भाग द्वारा दस अप्रैल को पत्राचार कर मेयर व नगर आयुक्त से स्थाई समिति की आपात बैठक करने की मांग की गई थी। झारखंड नगरपालिका अधिनियम में निहित प्रावधानों के तहत ही मेयर की ओर से नगर आयुक्त को पत्राचार कर स्थाई समिति की आपात बैठक आहूत करने का निर्देश दिया था। लेकिन नगर आयुक्त ने पार्षदों के पांचवें भाग द्वारा दिए गए पत्र से संबंधित फाइल भी अग्रसारित नहीं किया। इसे नगर आयुक्त की मनमानी नहीं तो और क्या समझ जाए। नगर आयुक्त न तो झारखंड नगरपालिका अधिनियम में निहित प्रावधानों का अनुपालन कर रहे हैं और न ही मेयर के आदेश-निर्देश का सम्मान कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रसार के रोकथाम के लिए स्थाई समिति की आपात बैठक को भी उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया। ऐसे लापरवाह व कर्तव्यहीन अधिकारियों से क्या उम्मीद की जा सकती है। राजधानी की आम जनता कोरोना संक्रमण के भय से त्राहिमाम कर रही है। फिर भी नगर आयुक्त को शहरवासियों की जान की कोई परवाह नहीं है। स्थाई समिति की आपात बैठक में 53 वार्डों में सफाई व सैनिटाइजेशन की व्यवस्था, कोरोना संक्रमण से रांची नगर निगम के सफाईकर्मियों की सुरक्षा, पीपीई किट, मास्क, हैंड ग्लव्स, सेनिटाइजर आदि की उपलब्धता व भविष्य की आवश्यकताओं सहित कोरोना से पीड़ित मरीजों के लिए एक हज़ार ऑक्सीजन सिलेंडर की खरीदारी से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जानी थी। मेयर ने राज्य सरकार व नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव से मांग करते हुए कहा कि रांची नगर निगम के लापरवाह व कर्तव्यहीन अधिकारियों पर उचित कार्रवाई की जाए।

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