January 21, 2021

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13 जिलो में चल रहा है मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन अभियान,40 फीसदी ग्रामीणों को मिली खुराक

राँची:- फाइलेरिया या हाथीपांव, रोग एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्या है। यह एक घातक रोग है जिसके कारण शरीर के अंगों में सूजन आती है, हालांकि इस रोग से आसानी से बचा जा सकता है । यह रोग मच्छर के काटने से फैलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार फाइलेरिया दुनिया भर में दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है । आमतौर पर बचपन में होने वाला यह संक्रमण लिम्फैटिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है और अगर इसका इलाज न किया जाए तो इससे शारीरिक अंगों में असामान्य सूजन होती है । फाइलेरिया से जुड़ी विकलांगता जैसे लिंफोइडिमा (पैरों में सूजन) और हाइड्रोसील (अंडकोष की थैली में सूजन) के कारण पीड़ित लोगों को अक्सर सामाजिक बोझ सहना पड़ता है, जिससे उनकी आजीविका और काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है।
कोविड महामारी के दौरान भी महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों को जारी रखने के महत्व को स्वीकार करते हुए, राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य के 13 जिलो में 10 अगस्त से एमडीए राउंड अभियान प्रारंभ किया गया है। इन 13 जिलों में गोड्डा, गिरिडीह, रांची, खुंटी, गुमला, हजारीबाग, गरवा, चतरा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, देवघर और दुमका और सिमडेगा शामिल हैं। अभियान के दौरान कोविड-19 के मानकों के अनुसार प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा दवा खिलाई जा रही है।
एमडीए अभियान के अंतर्गत, फाइलेरिया रोधी दवा की एकल खुराक 10 से 20 अगस्त के दौरान इन तेरह जिलों में 19613785 लक्षित आबादी को सभी आंगनवाडी केन्द्रों, वार्ड कार्यालयों, स्वास्थ्य उपकेंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा पहले 3 दिन खिलाई गई। जो व्यक्ति, इन तिथियों में किसी कारणवश दवा खाने से वंचित रह गए, उन्हें घर- घर जाकर दवा खिलाई जा रही है। इस अभियान में 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर सभी लोगों को उम्र के अनुसार डाइथेलकार्बामोजाइन (डीईसी) और अलबेंडाजोल की निर्धारित खुराक बिल्कुल मुफ्त खिलाई जा रही है। सिमडेगा जिले में तीन प्रकार की फाइलेरिया रोधी दवाएं आईवरमेक्टिन, डीईसी और अल्बेन्डाजोल (आईडीए) के साथ एमडीए राउंड चलाया जा रहा है। इन ज़िलों में एक से दो वर्ष के बच्चों को कृमि मुक्ति हेतु दवा खिलायी जा रही है।
राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डा0 बी0 मरांडी ने सभी से आग्रह करते हुए कहा कि राज्य को फाइलेरिया मुक्त करने के लिये एमडीए के दौरान फाइलेरिया रोधी दवा स्वास्थ्यकर्मियों के सामने ही अवश्य खाएं। फाइलेरिया से बचाव के साथ ही एमडीए दवाइयों से कई दूसरे लाभ भी हैं, जैसे यह आंत के कृमि का भी इलाज करती है जिससे खासकर बच्चों के पोषण स्तर में सुधार आता है और उनके शारीरिक और मानसिक विकास में मदद मिलती है ।
राँची ज़िले में अबतक ग्रामीण क्षेत्रों में 44 प्रतिशत, जबकि शहरी क्षेत्रों में 20 प्रतिशत लोगों ने दवा का सेवन किया है। शेष 12 ज़िलों में 50-60 प्रतिशत लोगों ने दवा का सेवन किया है।

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