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स्वाधीनता आंदोलन के पहले शहीद थे मंगल पांडे : राकेश

मंगल पांडे का संदेश-गरिमा, इज्जत से समझौता नहीं, विद्रोह होगा

रांची:- स्वतंत्रता सेनानी मंगल पांडे की जयंती के मौके पर पत्र सूचना कार्यालय, प्रादेशिक लोक संपर्क ब्यूरो, रांची और क्षेत्रीय लोक संपर्क ब्यूरो, दुमका के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार का विषय स्वतंत्रता सेनानी मंगल पांडे जयंती स्मरणोत्सव’’ रखा गया था।
वेबिनार को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रोफेसर डा. राकेश पांडे ने स्वतंत्रता सेनानी मंगल पांडे की जीवनी, स्वाधीनता आंदोलन में उनका योगदान और स्वतंत्रता संग्राम के बारे में विस्तार से चर्चा की।
प्रो. पांडे ने कहा कि परतंत्रता के दौरान अंग्रेज शासन व्यवस्था का प्रमुख लक्ष्य भारतीयों का शोषण ही था। ईस्ट इंडिया कंपनी भारत को खोखला करने में लगी थी। यहां की सारी बहुमूल्य संपदा ब्रिटेन ले जाई जा रही थी। अंग्रेजों द्वारा गठित की गई सेना को भी काफी कम पैसे दिए जाते थे, क्योंकि इन सैन्य बलों में भारतीय ही होते थे।
मंगल पांडे स्वतंत्रता आंदोलन के पहले शहीद
सन् 1857 में भारतीयों ने एकजुट होकर अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया था, इसका केंद्र बिंदु मंगल पांडे थे। उन दिनों ऐसी अफवाह फैली थी कि बंदूक के कारतूस में इस्तेमाल होने वाली चिकनाई के लिए गाय और सुअर की चर्बी का इस्तेमाल किया जाता है। इसी बात पर मंगल पांडे के द्वारा विद्रोह किया गया, इसकी आग ऐसी फैली कि कई सैनिकों ने विद्रोह शुरू कर दिया। इस विद्रोह को दबाने के लिए अंग्रेजों ने मंगल पांडे को मार्च 1857 में फांसी की सजा दे दी और भारतीयों पर काफी ज्यादा कानून लाद दिए। आज के स्वतंत्रता आंदोलन में मंगल पांडे का नाम उतना प्रसिद्ध नहीं हुआ लेकिन 1857 विद्रोह के बाद मंगल पांडे की स्मृति लोगों के मन में रही। भगत सिंह और वीर सावरकर ने भी उनके योगदान को याद किया है। इस तरह से अगर उनके योगदान को देखें तो उन्हें स्वतंत्रता आंदोलन के पहले शहीद का दर्जा दिया जा सकता है। मंगल पांडे के व्यक्तित्व से हमें यह संदेश मिलता है कि हम अपनी गरिमा, इज्जत का समझौता नहीं करेंगे, बल्कि इसके खिलाफ उठ खड़े होंगे।
अभिनेता आमिर खान की फिल्म ने मंगल पांडे की जीवनी और उनके योगदान को युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाया है। इसके पहले वेबिनार की अध्यक्षता करते हुए पीआईबी-आरओबी रांची के अपर महानिदेशक श्री अरिमर्दन सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी मंगल पांडे का स्वाधीनता आंदोलन में अमूल्य योगदान है। उन्होंने सन् 1857 के विद्रोह को चिंगारी दी थी जिसके बाद भारतीयों में अंग्रेजी शासन के खिलाफ गुस्सा फूटा। मंगल पांडे ने अपनी भावनाओं के साथ-साथ पूरे देश की भावनाओं को प्रकट किया था। सिंह ने ओलंपिक में खेलने जा रहे खिलाड़ियों को भी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत सरकार ने खेल के क्षेत्र में गंभीरता से प्रयास किये है। पदकों की संख्या इस बार ज्यादा होगी और पदक तालिका में भी हम ऊपर आएंगे ।
क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी शाहिद रहमान ने प्रतिभगियों को बताया कि हमारी आजादी के 75 वर्ष पूरे होने वाले हैं। 75 साल पूरे होने पर होने वाले समारोहों की कड़ी से 75 सप्ताह पहले भारत सरकार द्वारा आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। इसी महोत्सव की कड़ी में आने वाले समय में इस तरह के कार्यक्रमों को प्रमुखता से आयोजित किया जाएगा। इन कार्यक्रमों से हमें कम ज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानने और समझने का मौका मिलेगा।
वेबिनार में शामिल प्रतिभागियों को ई-सर्टिफिकेट भी प्रदान किए गए। वेबिनार का समन्वय एवं संचालन क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी श्री शाहिद रहमान ने किया। वेबिनार के दौरान इतिहास विभाग के शोधार्थियों ने कई सवाल भी पूछे, जिनका प्रो. पांडे ने विस्तार से जवाब दिया, उन्होंने सभ्यता चक्र के बारे में भी संक्षिप्त चर्चा की। वेबिनार का प्रसारण यु-ट्यूब पर भी लाइव किया गया।
वेबिनार में विशेषज्ञों के अलावा शोधार्थी, छात्र, पीआईबी, आरओबी, एफओबी, दूरदर्शन एवं आकाशवाणी के अधिकारी-कर्मचारियों तथा दूसरे राज्यों के अधिकारी-कर्मचारियों ने भी हिस्सा लिया। गीत एवं नाटक विभाग के अंतर्गत कलाकार एवं सदस्य, आकाशवाणी के पीटीसी, दूरदर्शन के स्ट्रिंगर तथा संपादक और पत्रकार भी शामिल हुए।

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