30 जनवरी को भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा के नेतृत्व में 17 सदस्यीय टीम झारखण्ड प्रदेश का दौरा किया था और तब राजनीतिक पार्टियों के साथ मुख्य चुनाव आयोग की बैठक हुई थी और सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपने अपने सुझाव और समस्याएं बताई थी और तब सबका सुझाव सुनने के बाद अंत में चुनाव आयोग ने प्रेस रिलीज़ किया था ।उस प्रेस रिलीज़ के कॉलम 8 में चुनाव आयोग ने निर्देश जारी किया था की “राज्य में इस बार लोकसभा चुनाव में पहली बार ऑक्सीबिलिटी आब्जर्वर की नियुक्ति की गयी थी दिव्यांग मतदाताओं और वृद्धों को सुविधा पर अत्याधिक ध्यान दिया जाय ।सभी मतदान केंद्र पर एसयोर्ड मिनिमम फैसिलिटी जैसे पानी ,शौचालय,रैंप,शेड,और विजली की व्यवस्था की जायेगी।”
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस निर्देश को ताक पर रखकर झारखण्ड में चौथे और पांचवें चरण में बूथों पर कोई सुविधा नहीं मिली।कुछ आदर्श मतदान केंद्र को छोड़कर कहीं भी वोटरों के लाइन के ऊपर शेड नहीं था ,दिव्यांगों के लिए भी कहीं सुविधा नहीं था।एसयोर्ड मिनिमम आब्जर्वर का कहीं कोई अता पता नहीं ,इस दायित्व से सम्बंधित उनका कोई नंबर और ईमेल आईडी तक नहीं था।आम जनता को पता नहीं है कि कौन है एसयोर्ड मिनिमम आब्जर्वर ??।
इस मामले पर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताते हुए शिकायत दर्ज कराई है ।

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