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गिलोय से खराब नहीं होता है लिवर, खबरों को आयुष मंत्रालय ने किया खारिज

नई दिल्ली:- गिलोय से लिवर खराब होने वाली रिपोर्टों को आयुष मंत्रालय ने खारिज किया है। मंत्रालय के मुताबिक आयुर्वेद में गिलोय का परंपरागत प्रयोग कई समस्याओं में होता है और इनमें लिवर रोग भी शामिल है तथा इसकी उपयोगिता आधुनिक विज्ञान के अनुरूप है।
उन्होंने कहा कि जिन छह मरीजों के लिवर डैमेज हुए वे पहले से ही कई रोगों से ग्रसित और दूसरी एलोपैथिक दवाएं ले रहे थे, ऐसे में इस सीमित शोध से कोई भी निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
मंत्रालय की तरफ जारी बयान में कहा कि गया है कि शोधकतार्ओं ने कई महत्वपूर्ण मापदंडों की उपेक्षा की, जैसे- निर्माण में रासायनिक घटकों की पहचान, रोगियों द्वारा ली जाने वाली जड़ी-बूटी की मात्रा, नियोजित योगों और खपत की अवधि में व्यापक भिन्नता शामिल है। इसके अलावा, रोगियों के ब्लड और लिवर में गिलोय के रासायनिक तत्वों का विश्लेषण नहीं हुआ है। इसलिए इस सीमित शोध के परिणामों को गिलोय के उपयोग से बिल्कुल जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। मंत्रालय ने कहा कि गिलोय जैसा दिखने वाले जड़ी-बूटी टिनोस्पोरो क्रिस्पा का लिवर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
क्या है गिलोय को विवाद-
एक शोध में कहा गया है कि इम्युनिटी बढ़ाने वाली गिलोय लिवर खराब कर रहा है। शोध के मुताबिक, 2020 के सितंबर से लेकर दिसंबर के बीच किए गए सर्वे में गिलोय का सेवन करने वाले छह मरीज ऐसे मिले, जिनके लिवर काफी खराब हो चुके थे। मरीज पीलिया और सुस्ती की शिकायत लेकर इलाज के लिए गए थे। इसके बाद कुछ डॉक्टरों ने यह पाया कि वे सभी गिलोय (टिनोस्पोरा कोर्डिफोलिया) का सेवन कर रहे थे।

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