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आदिवासी समुदाय से जुड़े कानूनों में सुधार और संशोधन हो-संगठन


रांची:- आदिवासी समुदाय से जुड़े कानूनों में सुधार और संशोधन की मांग संयुक्त आदिवासी सामाजिक संगठन ने की है। संगठन ने कहा कि आदिवासियों की जमीन के मामले, विवाह के मामलों के साथ जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने के नियमों में राज्य सरकार की ओर से सुधार की जरूरत है। इन ज्वलंत मुद्दों पर अपनी मांगों को लेकर संयुक्त आदिवासी सामाजिक संगठन चरणबद्ध आंदोलन करेगा। जिसके तहत प्रथम चरण में सभी आदिवासी विधायकों और टीएसी सदस्यों को मांग से संबंधित ज्ञापन सौंपा जाएगा। नेताओं ने बताया कि आंदोलन के दूसरे चरण में राज्य भर के विभिन्न जिलों, अनुमंडलों तथा प्रखंडों में धरना प्रदर्शन के द्वारा उपायुक्तों एसडीओ, बीडीओ और सीओ को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया जाएगा। नेताओं ने मांग की कि एक दूसरे से आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री करने के लिए सीएनटी एक्ट में थाना क्षेत्र की बाध्यता को समाप्त करके प्रदेश के लिए अनिवार्य बनाया जाए। इसके लिए इस कानून में संशोधन किया जाए। नेताओं ने कहा कि आदिवासी पुरुष द्वारा किसी गैर आदिवासी महिला को विवाह करने के बाद उस महिला को अनूसूचित जनजाति का कोई लाभ नहीं दिया जाए। इसी तरह आदिवासी महिला द्वारा किसी गैर आदिवासी पुरुष से विवाह करने के पश्चात उस महिला को भी अनूसूचित जनजाति के लाभ से वंचित किया जाए। इसके लिए ठोस कानून बनाया जाए। अनूसूचित जनजाति प्रमाण पत्र निर्गत करने में विवाहिता आदिवासी महिला के जाति प्रमाण पत्र के आवेदन में उस महिला के पति और पिता दोनों की ओर से जाति, खतियान, वंशावली दशार्ने को अनिवार्य किया जाए। इसके लिए राज्य सरकार ठोस कदम उठाए। अनूसूचित जनजाति के लिए सरकार द्वारा निर्गत किया गया जाति प्रमाण पत्र को आजीवन किया जाए। अगर महिला विवाहिता हो तो उनका दोबारा जाति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य किया जाए। संवाददाता सम्मेलन में लक्ष्मी नारायण मुंडा, कुलभूषण डूंगडूंग, निरंजना हेरेंज, अरविंद उरांव, चंदन पाहन, उमेश मुंडा, पवन तिर्की, शिवरतन मुंडा, बासुदेव भगत आदि उपस्थित थे।

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