January 18, 2021

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लैंड ऑफ फॉरेस्ट, झारखंड बहुत जल्द ही बनेगा टूरिज्म हब

पर्यटन से दस लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की कार्ययोजना तैयार

रांची:- लैंड ऑफ फॉरेस्ट, झारखंड बहुत जल्द ही देश-दुनिया के लिए टूरिज्म हब बनकर उभरेगा। सूबे में पर्यटन के माध्यम से दस लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध कराने की कार्ययोजना तैयार की गयी है। जबकि झारखंड टूरिज्म पॉलिसी 2020 में छात्र-छात्राओं को भी राज्य के पर्यटन स्थलों के बारे में जानकारी देने के साथ ही विशेष प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी, जबकि प्रत्येक टूरिस्ट पैलेस पर सिक्युनिटी फोर्स की कड़ी नजर रहेगी। जबकि पर्यटन के क्षेत्र में निवेश करने वालों को 10करोड़ रुपये तक की सब्सिडी भी देने की योजना बनायी गयी है।

230 से अधिक पर्यटन स्थलों के विकास की योजना
देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए झारखंड के 230 से अधिक पर्यटन स्थलों का चयन कर विकास किया जा रहा है, वहीं अपने लक्ष्य के अनुरूप पर्यटन क्षेत्र में 10 लाख से अधिक रोजगार के अवसर प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से उपलब्ध कराने की प्रक्रिया प्रत्येक वर्ष 120 छात्र-छात्राओं को अल्प अवधि का पर्यटन से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं राज्य सरकार देवघर में फूड क्राफ्ट संस्थान लांच करने की तैयारी में है।

पर्यटकों की सुरक्षा का रखा जाएगा ध्यान

झारखण्ड आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा को अहम मानते हुए टूरिस्ट सिक्योरिटी फोर्स के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। टीएसएफ में भूतपूर्व सेवाकर्मियों को जरूरी प्रशिक्षण दिया जायेगा। स्थानीय युवाओं को भी टीएसएफ में जगह मिलेगी। पर्यटन विभाग द्वारा इनका चयन किया जायेगा। 24 घंटे संचालित होने वाले टूरिस्ट हेल्पलाइन की स्थापना कर पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जायेगी। झारखण्ड आने वाले पर्यटकों का पूरा ब्यौरा विभाग के सेंट्रल कंट्रोल रूम में रहेगा, जिससे पर्यटकों तक ससमय सहायता पहुंचाई जा सके।

धार्मिक से लेकर माइनिंग टूरिज्म को बढ़ावा

झारखण्ड यूं तो धार्मिक टूरिज्म के मामले में विश्व में अपनी पहचान बना चुका है। देवघर, पारसनाथ, इटखोरी और कौलेश्वरी अपने आप में अनूठे आध्यात्मिक स्थल हैं। अब राज्य सरकार माइनिंग के क्षेत्र में भी पर्यटन को बढ़ावा देगी। खनन क्षेत्र में पर्यटकों के लिए खनन कंपनियों के साथ मिलकर सुविधाएं प्रारंभ की जाएगी। इसके अतिरिक्त इको टूरिज्म, सांस्कृतिक टूरिज्म, शिल्प और व्यंजन टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, वीकेंड गेटवे, फिल्म टूरिज्म, मनोरंजक पार्क, कल्याण पर्यटन की कार्ययोजना पर राज्य सरकार ने कार्य करना आरंभ कर दिया है।

झारखण्ड की ग्रामीण संस्कृति से होंगे रूबरू

राज्य सरकार झारखण्ड की ग्रामीण संस्कृति से रूबरू कराने के लिये रूरल टूरिज्म को विकसित करेगी। इसके तहत झारखण्ड में संस्कृति और ग्रामीण क्षेत्रों को पर्यटन से जोड़ने के लिए चिन्हित गाँव को नया रूप देकर विलेज टूरिज्म कमिटी का गठन किया जायेगा। साथ ही सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में निजी उद्योगों को भी प्रोत्साहित करेगी। नेतरहाट स्थित सिरसी ग्राम से होमस्टे स्कीम की शुरुआत की जाएगी, ताकि बाहर के पर्यटक हमारे राज्य की संस्कृति को नजदीक से देखें एवं यहां के स्वादिष्ट व्यंजन का स्वाद ले सकें।

निवेशकों के स्वागत को तैयार है झारखण्ड

पर्यटन में निवेश की संभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार निवेशकों को प्रोत्साहित करने वाली नीति लागू करने जा रही है। यह आकर्षक नीतियों में से एक साबित होगी। निवेशकों को निवेश करने पर निवेश का 30 प्रतिशत या अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक की सब्सीडी देने का प्रावधान किया है। अनुसूचित क्षेत्र में निवेशकों को अतिरिक्त 5 प्रतिशत इंसेंटिव दिया जायेगा। नए टूरिज्म यूनिट शुरू करने पर बिजली दरों में 30 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी साथ ही निवेशकों को लोन इंटरेस्ट में 50 प्रतिशत सब्सिडी यानी कि अधिकतम 25 लाख रूपये तक 5 वर्षों के लिए दी जायेगी। जबकि अनुसूचित क्षेत्र में निवेशकों को लोन इंटरेस्ट में अतिरिक्त 5 प्रतिशत इंसेंटिव देने का भी प्रावधान है। नयी पर्यटन इकाई को अगले 5 साल तक एसजीएसटी के भुगतान में 75 प्रतिशत की छूट एवं स्टाम्प ड्यूटी में 2 प्रतिशत छूट का प्रावधान है। झारखण्ड के सभी रजिस्टर्ड टूरिज्म केंद्रों का पहले पांच साल तक होल्डिंग टैक्स को माफ किया गया झारखण्ड के पर्यटन को विश्व-पटल पर लाने की पहल शुरू कर दी गयी है। सुन्दर झरनों से लेकर हिल स्टेशन तक, आध्यत्मिक स्थलों से लेकर जलाशयों तक, घने जंगलों से लेकर वन्यजीव अभ्यारण्य तक पर्यटन स्थलों को विकसित करने की योजना पर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।

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