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लंबोदर महतो ने कुरमी- कुड़मी को एसटी की सूची में शामिल करने की मांग को लेकर धरना दिया


रांची:- गोमिया विधायक डॉ. लंबोदर महतो ने झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के पांचवे दिन सदन के बाहर कुरमी-कुड़मी को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने की मांग को लेकर धरना दिया। उन्होंने धरना स्थल पर कहा कि संपूर्ण झारखंड में निवासरत टोटेमिक (गुष्टीधारी) कुरमी-कुड़मी (महतो) मूलतः प्रजाति के अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोग हैं। इनकी अपनी स्वायत्त मातृभाषा को करमाली( कुडमालि) है। यह प्रकृति और कृषि पेशा के लोग हैं। इनके सामाजिक जीवन में कोई ऊंच-नीच कोई भेदभाव वर्णवाद भी नहीं है। उन्होंने कहा कि एच एल रिजले सैलरी के ट्राईबल एंड कास्ट ऑफ बंगाल एवं सर ग्रियर्सन के लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया में भी इस समुदाय के लोगों को अनुसूची जनजाति समुदाय के द्रविड प्रजाति के लोग माना है। 2 मई 2013 के होम डिपार्टमेंट के नोटिफिकेशन को भारत सरकार के गजट में 3 मई 2013 को प्रकाशित किया गया था इसमें कुरमी- कुड़मी को अनुसूची जनजाति समुदाय के रूप में रखा गया था। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के कार्मिक प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के द्वारा 3 फरवरी 12 एवं 6 दिसंबर 12 को भारत सरकार के जनजातीय कार्य विभाग के सचिव को छोटानागपुर के कुरमी- कुड़मी (महतो) को अनुसूचित जनजाति के सूची में शामिल करने के अनुशंसा से भी अवगत कराया और कहा कि इस संदर्भ में झारखंड के विधायकों के द्वारा सदन में कई बार इस मामले को उठाया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को इस विषय पर संज्ञान लेना चाहिए और कुरमी- कुड़मी को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने की दिशा में सकारात्मक व समुचित प्रयास करना चाहिए ।

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