May 12, 2021

अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

कोसी के चर्चित साहित्यकार हरिशंकर शलभ का निधन

सहरसा:- कोसी में साहित्यिक अलख जगाने वाले इतिहासकार,सुप्रसिद्ध साहित्यकार हरिशंकर श्रीवास्तव ‘शलभ’ ने शहर के निजी अस्पताल में शनिवार की सुबह अंतिम सांस ली । संस्थान के सचिव वन्दन वर्मा ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि कोसी इलाके के बड़े नाम व हिन्दी साहित्य जगत के यशस्वी महान योद्धा जिनके साहित्य और इतिहास सृजन से कोसी क्षेत्र बहुत लाभान्वित हुआ है। डा. हरिशंकर श्रीवास्तव “शलभ” बीते दिन अपने 90वें बसंत पार कर 91वां में प्रवेश किये थे। आज इनके चले जाने से साहित्य व संस्कृति ठहर सी गई है। दर्जनों पुस्तक के रचयिता विद्वान साहित्यकार श्री शलभ जी की पहली पुस्तक 1951 में ‘अर्चना’ ने उनके कलम को इस तरह धारदार बनाया कि अविराम चलता रहा और “आनंद, मधेपुरा में स्वाधीनता आंदोलन का इतिहास, शैव अवधारणा और सिंहेश्वर स्थान, मंत्र दृष्टा ऋष्य श्रृंग, कोसी अंचल की अनमोल धरोहरे, कोसी तीर के आलोक पुरुष, अंग लिपि का इतिहास, एक बंजारा विज़न में” जैसे शोध ग्रंथों को आकार दिया। इनकी रचनाओं में मानवता की सनातन भावद्वन्दता की अभिव्यक्ति है। इसी में से इनकी एक पुस्तक ‘अंग लिपि का इतिहास’ साहित्य में मील का पत्थर है जो आज भी भागलपुर विश्वविद्यालय के अंगिका स्नातकोत्तर वर्ग के पाठ्यक्रम में निर्धारित है। इनकी कई कविताएं आकाशवाणी से भी प्रसारित हो चुकी है। इन्होंने हिंदी साहित्य को इस कदर जिया की 60 के दशक में गीत काव्य में भी छाये रहे। शलभ जी का आरम्भिक काल राष्ट्रकवि रामधारीसिंह दिनकर, आचार्य जानकी बल्लभ शास्त्री, आरसी प्रसाद सिंह, कलक्टर सिंह केशरी, पौद्दार रामावतार अरुण आदि महान साहित्यकारों के सानिध्य में बीता। वर्ष 2000 में विश्व हिंदी सम्मेलन, नई दिल्ली द्वारा लन्दन में भारतीय उच्चायुक्त रहे डा. लक्ष्मी मल सिंधवी ने इनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए इन्हें स्वर्ण पदक सम्मान प्रदान किया तथा सहस्त्राब्दी हिंदी सहित कई सम्मानों से इनको अलंकृत किया गया। शशि सरोजनी रंगमंच सेवा संस्थान को भी संस्थान के संरक्षक होने का गौरव प्राप्त है। आपका साहित्यिक सृजन समाज के लिए दर्पण का कार्य करेगा। आपकी मौजूदगी को अचानक छीन लेना मन को व्यथित कर गया। आप जहां भी रहे मार्गदर्शन करते रहे। आपके अंतर्चेतना में युवा होने का एहसास कराता है। इनके हर योगदानों के लिए ह्रदय से बार बार नमन वंदन और तर्पण हैं । शशि सरोजनी रंगमंच सेवा संस्थान आज अपनी नम आंखों से अपने संरक्षक को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है। शोक व्यक्त करने वालों में अधिवक्ता एवं संस्थान के संरक्षक अशोक कुमार वर्मा, डॉ. जीपी शर्मा, सतीश कुमार दास, नाट्य निर्देशक कुन्दन वर्मा, युवा कवि मुख्तार आलम, रोहित झा, गगन कुमार सहित संस्थान परिवार शामिल हैं।

Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com
%d bloggers like this: