March 7, 2021

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फरीदाबाद, गुरुग्राम कैम्प में ट्रेनिंग के साइंटिफिक तरीके अपनाएगा खो खो महासंघ

नई दिल्ली:- खो खो का राष्ट्रीय प्रशिक्षण कैम्प 16 जनवरी से फरीदाबाद और गुरुग्राम में आयोजित किया जाएगा और इस 28 दिवसीय कैम्प में भारतीय खो खो महासंघ (केकेएफआई) खिलाड़ियों के साइंटिफिक प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करेगा। केकेएफआई के अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता सुधांशु मित्तल ने बताया कि 125 खिलाड़ियों को लेकर आयोजित किया जाने वाला यह कैम्प इसलिए खास होगा क्योंकि देश भर से आए खिलाड़ियों को वैज्ञानिक पद्धति से ट्रेनिंग दी जाएगी और इसके लिए बकायदे स्पोटर्स साइंस की मदद ली जाएगी।
मित्तल ने यहां संवाददाताओं से कहा, “हम एक पुरातन खेल को नया रूप देने का प्रयास कर रहे हैं। इसके तहत सबसे पहले हमने खिलाड़ियों पर फोकस किया है क्योंकि यह खेल उन्हीं से है। अगला कैम्प हमारे और खिलाड़ियों के लिए खास है क्योंकि इसमें खिलाड़ियों को वैज्ञानिक पद्धति से ट्रेन किया जाएगा।”
मित्तल ने कहा कि देश भर से जुटने वाले खिलाड़ियों और अधिकारियों को दो भागों में विभाजित कर इन्हें इसके लिए चयनित-दो सेन्टर मानव रचना यूनिवर्सिटी-फरीदाबा और गुरुतेग बहादुर यूनिवर्सिटी-गुरुग्राम में प्रशिक्षित किया जाएगा।
मित्तल के मुताबिक यह पहली बार हो रहा है कि ट्रेनिंग के लिए स्पोर्ट्स साइंस का सहारा लिया जा रहा है, जिसमें खिलाड़ियों की क्षमताओं का आकलन कर उन्हें उसके अनुसार ट्रेनिंग दी जायेगी। फरीदाबाद में 60 और गुरुग्राम में इतने ही खिलाड़ी शिरकत करेंगे।
मित्तल ने कहा, “हम खिलाड़ियों से जुड़े हर पक्ष पर काम करना चाहते हैं। हम खिलाड़ी की कद-काठी, उसके सामाजिक परिदृश्य, खान-पान इत्यादि को ध्यान में रखते हुए उसे ट्रेनिंग देंगे। इसमें हर खिलाड़ी की शारीरिक संरचना और खेल में उसकी भूमिका को देखते हुए उसके शरीर के विशेष हिस्सों को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे कि वह अपना श्रेष्ठ दे सके।”
मित्तल ने कहा कि उनका लक्ष्य खो खो को एक दिन ओलंपिक में जगह दिलाना है और वह उसी दिशा में काम करना चाहते हैं। इसके लिए हालांकि कम से कम 70 देशों में खो खो का खेल जारी रहना चाहिए।
मित्तल ने कहा, “हम पहले इस खेल को एशियाई खेलों में जगह दिलाना चाहते हैं। हमारा अल्टीमेट लक्ष्य वैसे इसे ओलंपिक तक लेकर जाना है लेकिन इसके लिए अभी काफी काम किया जाना है। इसे 70 देशों तक ले जाना है। हम अपने सफर का आधा हिस्सा पार कर चुके हैं और आधे के लिए तैयार हैं। हम भारत के इस पुरातन खेल को नई पहचान दिलाना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि इस खेल से जुड़े खिलाड़ी पैसा और शोहरत कमाएं क्योंकि डायनामिक्स में यह खेल किसी अन्य खेल से कम रोचक नहीं है।”

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