January 28, 2021

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प्राकृतिक सौन्दर्य की अद्दभुत छटां है चतरा जिला का खैवा-जल प्रपात

चतरा:- झारखंड-बिहार में खास तौर पर मनाए जाने वाले मकर संक्रांति पर्व को लोग विशेषकर नदियों, जलप्रपात, डैम अथवा अन्य पिकनिक स्थलों पर मनाना चाहते हैं और इस दिन चतरा जिला के खैवा-जल प्रपात की सैर करना लोग भूल नहीं पाते। एक ओर जहां प्राकृतिक सौन्दर्य की अद्भूत छंटा यहां कूट-कूट कर भरी पड़ी है। वहीं नदी की कल-कल बहती धार व पत्थरों की अद्भूत खुबसूरती इंसान को अपनी ओर बर्बर खींच लाता है। किन्तु मुलभूत सुविधाओं के नहीं होने के कारण आज भी यह मनोरम स्थल पर्यटकों से अनछूआ है। हलांकि नव वर्ष व मकर संक्रांति के अवसर पर स्थानीय लोग यहां आकर पिकनिक मनाते है।
चतरा जिला के सदर प्रखंड के कटिया पंचायत स्थित बंदारू गांव स्थित खैवा जल-प्रपात को प्रकृति ने खुब सजाया व संवारा है। खैवा-बंदारु स्थित गांव से तकरीबन दो किलोमीटर चलने के बाद यहां की अनुपम छंटा दिखती है। नदी के लगातार बहते धार से पत्थरों ने बेहद ही खुबसुरत रुप ले लिया है। लेकिन इस मनोहारी स्थल तक पहुंचने का रास्ता सुगम नहीं है। प्रकृति की अनुपम मनोहारी दृश्य को देखने के लिये भले ही पर्यटकों के यहाँ आने की संख्या खासी न हो, किन्तु इसकी सौन्दर्य अत्यंत ही मनोरम है और प्रकृति ने इस खुबसूरत स्थल को ऐसे सजाया है, जैसे हजारों कारीगरों ने मिलकर इसे बनाया हो। रांची से आय़ी शिवानी कहती है कि यह स्थल अत्यंत ही सुंदर है औऱ यहां आकर काफी शुकून मिलता है।
जबकि रवि कुमार का कहना है कि पिछले 5 वर्षों में तो कुछ भी नहीं बदला। सरकार से उम्मीद जताते हुए कहते हैं कि शायद अब हालात में सुधार हो औऱ खैवा-बंदारु पर्यटन स्थल के रुप में विकसित हो सके।
प्रतापपुर के जिप सदस्य अरुण यादव का कहना है कि यदि इस स्थल पर आवागमन की सुविधा हो और सुरक्षा के इंतजाम हों तो यह स्थल पर्यटकों के लिये आकर्षण का केन्द्र बन सकता है। इस मनोरम स्थल पर पत्थरों के खाई में एक मंदिर भी है, जहां की पूजारिन प्रतिदिन आकर पूजन करती है। वो बताती है कि इस मंदिर में जो भी मन्नते मांगता है, देवी उसे जरुर पूरा करती है। बरहाल चतरा जिले में प्रकृति ने अपनी वादियों में कई खूबसूरत छटाएं पिरोई हुई हैं। किंतु खैवा बंदारू के नजारे के नाज से लोग अभिभूत हो जाते हैं। वैसे पर्यटकों को उम्मीद है कि राज्य की हेमंत सरकार इस ओर ध्यान दें तो इस स्थल का कायाकल्प हो सकेगा।

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