June 15, 2021

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खालसा पंथ सृजना दिवस पूरी परंपरा व श्रद्धा के साथ मनाया गया

जमशेदपुर:- जमशेदपुर के सभी गुरुद्वारों में 323वां खालसा पंथ सृजना दिवस पूरी परंपरा व श्रद्धा से मनाया गया। गुरु तेग बहादुर जी की शहादत के बाद परिस्थितियों को देखते हुए 13 अप्रैल 1699 में वैशाखी के दिन अनंतपुर में सिखों के 10वें गुरु गोविद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। इसी दिन उन्होंने पांच अलग-अलग जाति और देश के विभिन्न कोने से आए उनके अनुयायी भाई दयाराम सिंह, भाई धर्म चंद्र सिंह, भाई मोहकम चंद सिंह, भाई साहिब चंद सिंह और भाई हिम्मत राय सिंह को खंडा बाटे का पाहुल अमृत लेकर पहले पांच खालसों को छकाया फिर उनके हाथों से गुरु गोविद सिंह जी ने भी खुद अमृत छका और सिंह सजे थे। इसी उपलक्ष्य पर शहर के गुरुद्वारों में खालसा पंथ की स्थापना पर अरदास का आयोजन किया गया। साथ ही शारीरिक दूरी का पालन करते हुए कई गुरुद्वारों में लंगर के पैकेट
वितरित किए गए। खालसा जाति कुल का शक नहीं करता रू इंद्रजीत बारीडीह गुरुद्वारा में मंगलवार को खालसा पंथ सृजना दिवस पूरी श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस मौके पर तखत श्री हरिमंदिर साहिब प्रबंधन कमेटी पटना के उपाध्यक्ष सरदार इंदरजीत सिंह ने ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खालसा जाति कुल का शक नहीं करता है। उन्होंने खालसा दर्शन का व्याख्या करते हुए कहा कि गुरु जी ने साफ कहा था कि उन्हें रहित और मयार्दा प्यारी है। रहित और मयार्दा बिना व्यक्ति तो बस बहुरूपिया ही होता है। उनके अनुसार गुरु जी ने खालसा सजाकर लिग, जाति, कुल, भाषा, प्रांत के भेद की दीवार गिरा दी। उनके अनुसार गुरु जी ने अपनी पूरी शक्ति पांच प्यारों को प्रदान कर दी। इस मौके पर महासचिव सुखविदर सिंह ने भी संगत को बधाई देते हुए वैशाखी का इतिहास रखा तथा कोविड के दूसरे दौर के मद्देनजर सावधानी बरतने की अपील भी की। ग्रंथी बाबा निरंजन सिंह ने पाठ का भोग डालने के बाद पूरी सृष्टि के कल्याण की अरदास की और भाई मनप्रीत सिंह के जत्थे ने कीर्तन दरबार सजाया। उसके उपरांत श्रद्धालुओं के बीच पैकेट लंगर का वितरण किया गया। इस मौके पर चेयरमैन मोहन सिंह, प्रधान जसपाल सिंह, सलाहकार सुरजीत सिंह खुशीपुर, झारखंड सिख प्रतिनिधि बोर्ड के अध्यक्ष गुरचरण सिंह बिल्ला, सुखविदर सिंह गिल, जत्थेदार कुलदीप सिंह, अवतार सिंह, स्त्री सत्संग सभा प्रधान बीबी मनजीत कौर, जसपाल कौर, सुरजीत कौर, सहित बड़ी संख्या में अन्य लोगों ने गुरु दरबार में हाजिरी भरी।

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