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झामुमो के संस्थापक बिनोद बाबू की तीसरी पीढ़ी का राजनीति में धमाकेदार इंट्री, पौत्रवधू लड़ेगी मेयर का चुनाव

धनबाद:- झामुमो के संस्थापक बिनोद बिहारी महतो की पौत्रवधू और पूर्व सांसद राजकिशोर महतो की बहू विनीता सिंह समाजसेवा के जरिये राजनीति में प्रवेश करने की तैयारी में है. इसके लिए विनीता सिंह ने 23 एकड़ रैयती जमीन स्टेडियम ,इंजीनियरिंग कॉलेज और अपने दादा ससुर के नाम पर संग्रहालय बनाने के लिए देने की घोषणा कर सबको चौंका दिया है. इस आशय का पत्र उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व अन्य सम्बंधित अधिकारियो को भी भेजा है. साथ ही यह भी घोषणा की है कि वह निगम का चुनाव लड़ेंगी. उनकी यह घोषणा आज नहीं तो कल वैसे राजनीतिक दलों के गले की फांस बनेगी ,जो बिनोद बाबू के नाम का माला जप कर पॉलिटिक्स में आगे बढ़े है या अभी भी जरुरत के मुताबिक बिनोद बाबू के नाम की माला जपते है. झारखण्ड में बिनोद बाबू के योगदान को कोई भूला नहीं सकता है. उनके आशीर्वाद का ही प्रताप है कि कई लोग राजनीति के शिखर पर पहुंच गए है.

मेयर का लडेगी चुनाव

अगर उनकी पौत्र बधू विनीता सिंह मेयर का चुनाव लड़ती है तो ऐसे लोगो के लिए यह लिटमस टेस्ट होगा कि वे बिनोद बाबू के नाम का उपयोग केवल आपने स्वार्थ में करते है या सचमुच बिनोद बाबू के प्रति उनकी आस्था अभी भी बनी हुई है. झामुमो के सामने तो बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है ,उसके लिए आगे कुंआ और पीछे खाई वाली हालत बन सकती है अगर आशीर्वाद देता है तो पार्टी के चुनाव लड़ने के इच्छुक लोग नाराज होंगे और अगर नहीं देता है ,किरकिरी होगी. फिर बिनोद बाबू के नाम पर राजनीति पर भी विराम लगाना पड़ सकता है. चूंकि ,अभी प्रदेश में गठबंधन सरकर चल रही है ,ऐसे में झामुमो सहित कांग्रेस और आरजेडी के लोग भी सरकार पर दवाब बना सकते है कि उन्हें ही गठबंधन का समर्थन मिले. ऐसे में पेशोपेश के हालात बन सकते है.

मेयर चुनाव जीतने पर एक रुपया भी वेतन -भत्ता नहीं लेंगी

The News post के धनबाद ब्यूरों हेड अभिषेक कुमार सिंह से एक्सवलूसिव बातचीत में विनीता ने कहा कि वे समाजसेवा के जरिये राजनीति करना चाहती है। मेयर चुनाव जीतने पर एक रुपया भी वेतन -भत्ता नहीं लेंगी. अपने ससुर के नाम पर क्रिकेट स्टेडियम ,एक इंजीनियरिंग कॉलेज और एक संग्रहालय बनाने के लिए कुल 23 एकड़ जमीन धनबाद व बलियापुर अंचल में दान देने को तैयार है. विनीता ने झामुमो की बाहरी भीतरी ,आदिवासी गैर आदिवासी की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसलिये तो झारखंड का 20 साल में भी अपेक्षित विकास नहीं हो पाया. मेरी राजनीति सबके विकास से जुड़ी होगी. कई पार्टियों ने उनसे संपर्क किया लेकिन वे फ़िलहाल किसी पार्टी को जॉइन नहीं करेंगी.

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