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देश सीमा पर विभिन्न परियोजनाओं में काम करने गये प्रवासी श्रमिकों को लेकर झारखंड सरकार चिंतित

बीआरओ को पत्र लिखकर कार्यरत श्रम बल, कोविड-19 और प्राकृतिक आपदा से मारे गये श्रमिकों के बारे में मांगी जानकारी

रांची:- झारखंड के विभिन्न जिलों और विशेषकर संताल परगना प्रमंडल के हजारों श्रमिक सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की विभिन्न परियोजनाओं पर काम करने बॉर्डर तथा सुदूरवर्ती दुर्गम इलाके में गये है। इसे लेकर पिछले वर्ष बीआरओ और राज्य सरकार के बीच एमओयू भी हुआ था, लेकिन अब चिंता बढ़ाने वाली यह खबर मिल रही है कि समझौते के शर्तां के मुताबिक झारखंड से गये प्रवासी को कल्याणकारी योजनाओं का समुचित लाभ नहीं मिल रहा है। वहीं बिचौलिये के माध्यम से भी श्रमिकों को बीआरओ की परियोजनाओं में काम पर लगाया जा रहा है।
इस बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर श्रम, नियोजन,प्रशिक्षण और कौशल विकास विभाग की ओर से इस संबंध में बीआरओ के निदेशक लेफिटनेंट जनरल को एक पत्र भी लिखा गया है, जिसमें झारखंड से गये प्रवासी श्रमिकों के बारे में जानकारी मांगी गयी है। साथ ही 1 मार्च 2020 से 30जून 2021 तक कोविड-19 महामारी और प्राकृतिक आपदा के कारण मरने वालों का भी विवरण मांगा गया है। यह भी जानकारी मांगी गयी है कि कितने मामले में मुआवजा और कल्याणी योजनाओं का लाभ मिला।
उपराजधानी दुमका में विगत 13 जून 2020 को मुख्यमंत्री और डिप्टी डीजी बीआरओ की उपस्थिति में बीआरओ और झारखंड सरकार के बीच हुए एमओयू के तहत राज्य के 11815 श्रमिकों को विभिन्न परियोजनाओं के लिए ले जाने की अनुमति दी गयी है।
राज्य सरकार से यह भी जानकारी मांगी गयी है कि बीआरओ द्वारा विभिन्न श्रमिक कानून के तहत प्रवासी श्रमिकों को कितनी सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। साथ ही किन परियोजनाओं में कितने श्रमिक काम पर लगे है, इसकी भी जानकारी मांगी गयी है।

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