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झारखंड सरकार ने एचईसी की बिजली काटी, देश की सुरक्षा से जुड़े कई प्रोजेक्ट ठप


केंद्र की ओर से आरबीआई के माध्यम से झारखंड सरकार के खाते से 714करोड़ काटने के विरोध में हुई कार्रवाई
रांची:- झारखंड सरकार ने रांची स्थित केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम भारी अभियंत्रण निगम (एचईसी) द्वारा बकाया बिजली भुगतान नहीं देने पर आज बिजली काट दी है। बिजली वितरण निगम लि. के रांची प्रक्षेत्र के महाप्रबंधक पीके श्रीवास्तव ने बताया कि दो वर्षां के दौरान बिजली विभाग की ओर से एचईसी प्रबंधन को बकाया भुगतान को लेकर 25 पत्र लिखा गया, लेकिन यह राशि बढ़कर 129 करोड़ रुपये हो गयी। इस कारण मजबूरन बिजली काटनी पड़ी।
बताया जा रहा है कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से डीवीसी का बकाया सीधे झारखंड के आरबीआई खाते से काटे जाने की यह प्रतिक्रिया है। इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार सात अगस्त को एचईसी को नोटिस भेजा गया था। भुगतान नहीं करने पर बिजली काटने की नोटिस जारी की गई। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जल्द ही दो किश्तों में 2100 करोड़ रुपये और काटने की बात कही है।
एचईसी के अधिकारियों का कहना है कि बिजली कटने के कारण कंपनी के सभी कारखाने बंद हो गये हैं। वहीं बिजली ठप होने से कार्यालय में अंधेरा छा गया है। इसकी वजह से सभी कर्मचारी को कार्यालय छोड़कर बाहर निकला पड़ा। कंपनी के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार बिजली काटे जाने से रक्षा विभाग के आकांक्षा से जुड़ा प्रोजेक्ट भी पूरी तरह से बाधित हो गया है।
एचईसी वित्तीय संकट से गुजर रहा है
इधर, एचईसी प्रबंधन के पास कोर कैपिटल समाप्त होने के कगार पर है. सात माह से एचईसी के अफसरों और छह माह से कर्मचारियों को वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। हर माह वेतन भत्ता पर 7 करोड़ खर्च होता है। यह राशि भी कंपनी हर माह एकत्र नहीं कर पा रही है। दूसरी तरफ कोर कैपिटल के अभाव में उत्पादन का ग्राफ गिर रहा था। बिजली कटने की वजह से अब तो उत्पादन ठप हो गया है। ऐसी स्थिति में अगर एचईसी को आर्थिक सहयोग नहीं मिला, तो कंपनी कुछ माह में स्वतः बंद हो जाएगी। एचईसी प्रबंधन के आला अफसरों का कहना है कि वर्ष 2020 में भी कोरोना की वजह से कंपनी उत्पादन लक्ष्य नहीं प्राप्त कर सकी थी. वर्ष 2021 के दूसरे तीमाही में ही कंपनी का उत्पादन पूरी तरह से ठप हो गया। वर्तमान में कंपनी कुछ महत्पूर्ण कार्य कर रही थी, उसका भी काम बंद हो गया है। वर्तमान में कंपनी में स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों की संख्या 3175 है। अगले दो-चार महीने यही स्थिति रही, तो कंपनी के भविष्य पर संकट गहराने लगेगा।

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