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400 वर्ष पुराने राधारानी मंदिर में भक्तिभाव के साथ मनायी गई जन्माष्टमी


रांची:- रांची के बुंडू में स्थित पौराणिक राधारानी मंदिर में आज पूरे भक्ति भाव के साथ पूजा अर्चना की जा रही है। बता दें कि यहां स्थित प्राचीनकालीन मंदिर 400 वर्ष पुराना है। पुरातनकाल से ही राधारानी मंदिर में भक्त पूजा अर्चना करते आये हैं।
पुजारी किशोर कुमार मुखर्जी ने बताया कि 1600 ई. के आसपास सूर्य मंदिर के आगे साल के जंगल मे दो मछुवारे लकड़ी काटने और मछली मारने के लिए जंगल पहुंचे तब जंगल मे किसी युवक युवति के जोर जोर से हंसने की आवाज आयी। आवाज सुनकर दोनों मछुवारे आसपास जंगल मे ढूढ़ने लगे तब देखा कि एक झूला में राधा-कृष्ण प्रसन्न मुद्रा में झूला का आनंद ले रहे हैं। तब मछुआरे राधा -कृष्ण को पकड़ना चाहे तब राधा गायब हो गयी और कृष्ण पाषाण में तब्दील हो गया। तब पाषाण में तब्दील भारी भरकम एक फीट के कृष्ण को भक्ति के साथ दउरा में सम्मान के साथ मछुवारे अपना घर लेकर आये और पूजा पाठ शुरू किया। फिर एक दिन बंगाल के राजा को पता चला कि मछुवारे घर मे पूजा पाठ कर रहे हैं। तब राजा ने पास में एक छोटा मंदिर बनवाया और कृष्ण भगवान के साथ साथ मथुरा से राधा की मूर्ति मंगा कर राधा कृष्ण मंदिर स्थापित किया गया।
पुजारी के अनुसार विगत दस पीढ़ियों से राधारानी मंदिर में पूजा पाठ किया जाता रहा है। वैशाख और जेठ में 9 दिनों तक अखण्ड कीर्तन किया जाता है। प्राचीन मंदिर होने के कारण दूर दूर से 84 मौजा के लोग यहां राधा कृष्ण की पूजा के लिए पहुंचते हैं। ऐसी आस्था है कि राधा कृष्ण से मांगी गई मन्नतें यहां अवश्य पूर्ण होती हैं। जन्माष्टमी के मौके पर बुंडू स्थित राधारानी मंदिर में छोटे छोटे बच्चे राधा कृष्ण के वेश -भूषा में सजते संवरते हैं और बच्चों को पुरस्कृत किया जाता है। राधारानी मंदिर में कृष्ण जन्माष्टमी के दिन विशेष पूजा अर्चना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि यहां आनेवाले भक्तों की मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।

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