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जनधन योजना से रूपांतरकारी और दिशात्मक बदलाव हुआ: सीतारमण


नयी दिल्ली:- सभी देशवासियों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने और सरकारी लाभाें के सीधे लाभार्थियों तक पहुंचने के उद्देश्य से शुरू की गयी प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) के सात वर्ष पूरे होने पर आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा “सात वर्षों की छोटी सी अवधि में पीएमजेडीवाई की अगुवाई में किए गए उपायों ने रूपांतरकारी और दिशात्मक बदलाव पैदा किया है, जिसने उभरते हुए वित्तीय संस्थानों के इकोसिस्टम को समाज के अंतिम व्यक्ति-सबसे गरीब व्यक्ति को वित्तीय सेवाएं देने में सक्षम बनाया है।
सीतारमण ने कहा कि पीएमजेडीवाई के अंतर्निहित स्तंभों यानी बैंकिंग सेवा से अछूते रहे लोगों को बैंकिंग सेवा से जोड़ने, असुरक्षित को सुरक्षित बनाने और गैर-वित्तपोषित लोगों का वित्त पोषण करने जैसे कदमों ने वित्तीय सेवाओं से वंचित और अपेक्षाकृत कम वित्तीय सेवा हासिल करने वाले इलाकों को सेवा प्रदान करने के क्रम में प्रौद्योगिकी का लाभ उठाते हुए बहु-हितधारकों के सहयोगात्मक दृष्टिकोण को अपनाना संभव बनाया है।
उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय हाशिए पर रहने वाले और अब तक सामाजिक-आर्थिक रूप से उपेक्षित वर्गों का वित्तीय समावेशन करने और उन्हें सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। समावेशी विकास का प्रवर्तक होने के नाते वित्तीय समावेशन इस सरकार की राष्ट्रीय प्राथमिकता है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कदम गरीबों को उनकी बचत को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में लाने का एक रास्ता प्रदान करता है और उन्हें गांवों में अपने परिवारों को पैसे भेजने के अलावा सूदखोर साहूकारों के चंगुल से बाहर निकालने का एक अवसर प्रदान करता है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना इस प्रतिबद्धता की दिशा में एक अहम पहल है। यह वित्तीय समावेशन से जुड़ी दुनिया की सबसे बड़ी पहलों में से एक है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2014 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पीएमजेडीवाई की घोषणा की थी और 28 अगस्त को इस योजना की शुरुआत करते हुए इस योजना काे गरीबों की एक दुष्चक्र से मुक्ति के उत्सव के रूप में निरूपित किया था। वित्त राज्यमंत्री डॉ. भागवत कराड ने कहा, “ पीएमजेडीवाई न केवल भारत बल्कि दुनियाभर में वित्तीय समावेशन की दिशा में सबसे दूरगामी पहलों में से एक है। समावेशी विकास का प्रवर्तक होने के नाते वित्तीय समावेशन इस सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। यह गरीबों को उनकी बचत को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में लाने का एक रास्ता प्रदान करता है और उन्हें अपने परिवारों को पैसे भेजने के अलावा सूदखोर साहूकारों के चंगुल से बाहर निकालने का एक अवसर प्रदान करता है।” सीतारमण ने कहा कि सुक्ष्म बीमा योजनाओं के तहत पीएमजेडीवाई खाताधारकों का कवरेज सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। पात्र पीएमजेडीवाई खाताधारकों को पीएमजेजेबीवाई और पीएमएसबीवाई के तहत कवर किया जाएगा। इस बारे में बैंकों को पहले ही सूचित कर दिया गया है। देशभर में स्वीकृति से संबंधित बुनियादी ढांचे के निर्माण के जरिए पीएमजेडीवाई खाताधारकों के बीच रुपे डेबिट कार्ड के उपयोग सहित डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया जायेगा। पीएमजेडीवाई खाताधारकों की फ्लेक्सी-आवर्ती जमा आदि जैसे माइक्रो-क्रेडिट और माइक्रो निवेश तक पहुंच को बेहतर बनाया जायेगा।
18 अगस्त 2021 को पीएमजेडीवाई खातों की कुल संख्या 43.04 करोड़ हो गयी थी। इनमें से 55.47 प्रतिशत अर्थात 23.87 करोड़ जन-धन खाताधारक महिलाएं हैं और 66.69 प्रतिशत अर्थात 28.70 करोड़ जन धन खाते ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं। इस योजना के पहले वर्ष के दौरान 17.90 करोड़ पीएमजेडीवाई खाते खोले गए और इसमें लगातार वृद्धि होती गयी। जन धन खातों की संख्या मार्च 2015 में 14.72 करोड़ से तीन गुना बढ़कर इस वर्ष 18 अगस्त तक 43.04 करोड़ हो गई है। बेशक वित्तीय समावेशन कार्यक्रम की दिशा में एक उल्लेखनीय यात्रा है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि किसी पीएमजेडीवाई खाते में दो साल की अवधि में कोई ग्राहक प्रेरित लेनदेन नहीं होता है तो उस खाते को निष्क्रिय माना जाता है। अगस्त 2021 में, कुल 43.04 करोड़ पीएमजेडीवाई खातों में से 36.86 करोड़ खाते अर्थात 85.6 प्रतिशत चालू हैं। चालू खातों की प्रतिशतता में निरंतर वृद्धि इस बात का संकेत है कि इनमें से अधिकतर खाते ग्राहकों द्वारा नियमित रूप से उपयोग में लाए जा रहे हैं। सिर्फ 8.2 प्रतिशत पीएमजेडीवाई खाते शून्य शेष वाले खाते हैं।
पीएमजेडीवाई खातों के तहत कुल जमा शेष राशि 1,46,230 करोड़ रुपये है। इन खातों की संख्या में 2.4 गुना वृद्धि के साथ इनमें जमा होने वाली राशियों में लगभग 6.38 गुना वृद्धि हुई है। प्रति खाते में औसत जमा राशि 3,398 रुपये है। अगस्त 2015 की तुलना में प्रति खाते में औसत जमा राशि में 2.7 गुना से अधिक की बढ़ोतरी हुई है औसत जमा राशि में बढ़ोतरी खातों के बढ़ते उपयोग और खाताधारकों में बचत की आदत का एक और संकेत है। पीएमजेडीवाई खाताधारकों को जारी किए गए रुपे कार्ड की कुल संख्या 31.23 करोड़ है। समय के साथ रुपे कार्डों की संख्या और उनके उपयोग में बढ़ोतरी हुई है। देश में बैंक शाखाओं, एटीएम, बैंक मित्रों, डाकघरों आदि जैसे बैंकिंग टच प्वाइंट्स का पता लगाने के लिए एक नागरिक केंद्रित प्लेटफार्म प्रदान करने के लिए एक मोबाइल एप्लिकेशन का शुभारंभ किया गया। इस जीआईएस ऐप पर आठ लाख से अधिक बैंकिंग टच प्वाइंट्स की मैपिंग की गई है। जन धन दर्शक ऐप के तहत प्रदान की गई सुविधाओं का लाभ आम आदमी की जरूरतों और सहूलियतों के अनुसार उठाया जा सकता है।
इस ऐप का उपयोग उन गांवों की पहचान करने के लिए भी किया जा रहा है, जहां पांच किलोमीटर के भीतर बैंकिंग टच प्वाइंट्स द्वारा सेवा नहीं प्रदान की जाती है। इन चिन्हित गांवों को संबंधित एसएलबीसी द्वारा बैंकिंग आउटलेट खोलने के लिए विभिन्न बैंकों को आवंटित किया जाता है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप बैंकिंग सेवा से वंचित रहने वाले गांवों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है।
पीएमजेडीवाई के महिला लाभार्थियों के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज (पीएमजीकेपी) का वित्त मंत्री ने पिछले वर्ष मार्च में घोषणा की गयी थी। इसके अनुसार, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत जन-धन योजना के महिला खाताधारकों के खातों में तीन महीने के लिए 500 रुपये प्रति माह जमा किया गया। कोविड लॉकडाउन के दौरान महिला पीएमजेडीवाई खाताधारकों के खातों में कुल 30,945 करोड़ रुपये जमा किए गए।
पांच करोड़ पीएमजेडीवाई खाताधारक विभिन्न योजनाओं के तहत सरकार से प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) प्राप्त करते हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि पात्र लाभार्थियों को उनका डीबीटी समय पर प्राप्त हो, वित्त विभाग डीबीटी मिशन, एनपीसीआई, बैंकों और विभिन्न अन्य मंत्रालयों के साथ परामर्श करके डीबीटी की राह में आनेवाले अड़चनों के परिहार्य कारणों की पहचान करने में सक्रिय भूमिका निभाता है। बैंकों और एनपीसीआई के साथ नियमित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के जरिए इस संबंध में निगरानी से डीबीटी से संबंधित कुल दिक्कतों की प्रतिशतता में परिहार्य कारणों से डीबीटी की राह में आनेवाले अड़चनों में भारी कमी आयी है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना वित्तीय सेवाओं यानी बैंकिंग / बचत और जमा खाते, विप्रेषण, जमा, बीमा, पेंशन तक किफायती तरीके से पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में वित्तीय समावेशन का एक राष्ट्रीय मिशन है। इसका उद्देश्य सस्ती कीमत पर वित्तीय उत्पादों और सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करना, लागत कम करने और पहुंच बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करना है। बैंकिंग सेवा से अछूते रहे लोगों को बैंकिंग सेवा से जोड़ना – न्यूनतम कागजी कार्रवाई, केवाईसी में छूट, ई-केवाईसी, कैंप मोड में खाता खोलने, शून्य शेष और शून्य शुल्क के प्रावधान के साथ बुनियादी बचत बैंक जमा (बीएसबीडी) खाता खोलना, असुरक्षित को सुरक्षित बनाना – दो लाख रुपये की मुफ्त दुर्घटना बीमा कवरेज के साथ नकद निकासी और व्यापारी के स्थान पर भुगतान के लिए स्वदेशी डेबिट कार्ड जारी करना। गैर-वित्तपोषित लोगों का वित्त पोषण – सूक्ष्म -बीमा, खपत के लिए ओवरड्राफ्ट, माइक्रो-पेंशन एवं माइक्रो-क्रेडिट जैसे अन्य वित्तीय उत्पाद जारी करना है।
इस योजना के तहत प्रत्येक पात्र वयस्क को 10,000 रुपये की ओवरड्राफ्ट सुविधा के साथ बुनियादी बचत बैंक खाता के साथ ही वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम- बचत, एटीएम के उपयोग, क्रेडिट के लिए तैयार होने, बीमा एवं पेंशन का लाभ उठाने, बैंकिंग से जुड़े कार्यों के लिए बेसिक मोबाइल फोन के उपयोग को बढ़ावा देना, क्रेडिट गारंटी फंड का निर्माण – बकायों के मामले में बैंकों को कुछ गारंटी प्रदान करने के अतिरिक्त 15 अगस्त 2014 से 31 जनवरी 2015 के बीच खोले गए खातों पर 1,00,000 रुपये तक का दुर्घटना बीमा और 30,000 रुपये का जीवन बीमा की सुविधा भी दी गयी है। 28 अगस्त 2018 के बाद खोले गए पीएमजेडीवाई खातों के लिए रुपे कार्ड पर मुफ्त दुर्घटना बीमा कवर एक लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दिया गया है।
पीएमजेडीवाई जन-केंद्रित आर्थिक पहलों की आधारशिला रही है। चाहे वह प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण हो, कोविड-19 वित्तीय सहायता, पीएम-किसान, मनरेगा के तहत बढ़ी हुई मजदूरी, जीवन एवं स्वास्थ्य बीमा कवर हो, इन सभी पहलों का पहला कदम प्रत्येक वयस्क को एक बैंक खाता प्रदान करना है, जिसे पीएमजेडीवाई ने लगभग पूरा कर लिया है।
मार्च 2014 से मार्च 2020 के बीच खोले गए दो में से एक खाता पीएमजेडीवाई खाता था। देशव्यापी लॉकडाउन के 10 दिनों के भीतर लगभग 20 करोड़ से अधिक महिला पीएमजेडीवाई खातों में अनुग्रह राशि जमा की गई। जनधन गरीबों को उनकी बचत को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में लाने का एक रास्ता प्रदान करता है और उन्हें गांवों में अपने परिवारों को पैसे भेजने के अलावा सूदखोर साहूकारों के चंगुल से बाहर निकालने का एक अवसर प्रदान करता है। पीएमजेडीवाई ने बैंकिंग प्रणाली से वंचित रहे लोगों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा है, भारत के वित्तीय ढांचे का विस्तार किया है और लगभग हर वयस्क के लिए वित्तीय समावेशन को संभव बनाया है।
कोविड-19 के काल में, हमने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) को उल्लेखनीय तेजी और सहजता के साथ समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाते और वित्तीय सुरक्षा प्रदान करते देखा है। इसका एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्रधानमंत्री जन-धन खातों के जरिए डीबीटी ने यह सुनिश्चित किया है कि प्रत्येक रुपया अपने इच्छित लाभार्थी तक पहुंचे और प्रणालीगत रिसाव को रोका जा सके।

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