April 18, 2021

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जमशेदजी नुसीरवानजी टाटा ने 1880 में रखी थी औद्योगिकीकरण की बुनियाद

देश के सबसे आधुनिक शहर की नींव रखने वाले जमशेदजी टाटा को जयंती पर नमन

जमशेदपुर:- जमशेदजी नुसीरवानजी टाटा की 182 वी जयंती बुधवार को जमशेदपुर शहर में बड़े ही श्रद्धा व विश्वास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर टाटा स्टील मुख्य द्वार पर पूर्व चेयरमैन रतन टाटा एवं टाटा संस ग्रुप के वर्तमान चेयरमैन एन चंद्रशेखरन, टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक टीवी नरेंद्रन सहित पदाधिकारियों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और एक मिनट का मौन भी रखा गया। वहीं कोरोना संक्रमण के खतरों के कारण इस बार सीमित रूप से मार्च पास्ट का आयोजन किया गया। इसके अलावा पोस्टल पार्क में भी जमशेदजी नुसीरवानजी टाटा को श्रद्धांजलि दी गई। मौके पर राज्य सरकार की ओर से स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता भी उपस्थित थे।
जयंती समारोह के मौके पर टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा कि कंपनी व्यापार के साथ सामाजिक कार्यों से शहरवासियों के जीवन को आसान बनाते रहेगी। उन्होंने कहा कि टाटा समूह की ओर से व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ सामाजिक कार्यां का निर्वहन भी पूर्व की तरह किया जाता रहेगा।

जमशेदजी ने 1880 में महाराष्ट्र के चंदा में इस्पात संयंत्र की बनायी थी योजना

1880 के दशक में जमशेदजी नुसीरवानजी टाटा ने महाराष्ट्र के चंदा जिले (अब चंद्रपुर) जिले के लोहारा में इस्पात संयंत्र स्थापित करने की कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया था, लेकिन 24 फरवरी 1904 को देश के प्रसिद्ध जियोलॉजिस्ट प्रमथ नाथ बोस की ओर से लिखा एक पत्र ने देश के औद्योगिकीकरण की दिशा बदल कर रख दी। यदि जियोलॉजिस्ट पीएन बोस ने जमशेदजी को यह पत्र नहीं लिखा होता, तो शायद टाटा स्टील का अस्तित्व आज झारखंड में ना होता।
जमशेदजी नसेरवानजी टाटा ने 1882 में “चंदा जिले में लौह-कार्य की वित्तीय संभावनाओं पर रिपोर्ट (रिपोर्ट ऑन द फाइनांशियल प्रॉस्पेक्ट्स ऑफ आयरन-वर्किंग इन द चंदा डिटस्ट्रिक्ट)“ नामक वॉन श्वार्ज़ की रिपोर्ट देखी, जिसमें कहा गया था कि चंदा जिले में लौह अयस्क का सबसे अच्छा भंडार लोहारा में था। पास में ही स्थित वरोरा में कोयला है। लेकिन कोयले के परीक्षण के बाद, यह अनुपयुक्त पाया गया। 24 फरवरी, 1904 को जमशेदजी को प्रमथ नाथ बोस का एक पत्र मिला, जिसमें मयूरभंज जिले के गोरुमहिसानी की पहाड़ियों में लोहे के अकूत भंडार होने की बात कही गयी थी। इसने झरिया में कोयले की उपलब्धता के बारे में भी बताया। लगभग इसी समय, सर दोराबजी टाटा 140 मील की दूरी पर नागपुर के पास धौली और राजहारा हिल्स में एक प्लांट स्थापित करने का निर्णय ले चुके थे। सर दोराबजी टाटा द्वारा एक सर्वेक्षण टीम का गठन किया गया, जिसका नेतृत्व सी. एम. वेल्ड ने किया। यह अन्वेषण सार्थक साबित हुआ। 1907 में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी लिमिटेड (टिस्को) की स्थापना मयूरभंज से थोड़ी दूर साकची गाँव के पास दो नदियों ‘सुवर्णरेखा’ और ’खरकई’ के संगम पर की गई थी, जो बंगाल-नागपुर रेलवे लाइन के करीब भी था।

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