June 16, 2021

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वैक्सीनेशन में तेजी लाकर ही कोरोना की तीसरी लहर को बेअसर कर बच्चों को सुरक्षित करना संभव-स्वास्थ्य

धर्म गुरुओं और 2 लाख स्वास्थ्य कर्मियों को किया गया जागरूक, ब्लैक फंगस से जुड़ी भ्रांतियां को दूर करने के लिए हेल्पलाइन का उदघाटन

रांची:- कोरोना की दूसरी लहर के दौरान बढ़ते संक्रमण को देखते हुए वीमेन डॉक्टर्स विंग आईएमए झारखण्ड एवं स्वास्थ्य विभाग झारखण्ड सरकार के द्वारा एक संयुक्त ऑनलाइन जागरूकता अभियान का आयोजन नेशनल हेल्थ मिशन के सहयोग से किया गया। कोविड वैक्सीन के प्रजनन स्वास्थ्य पर सुरक्षित प्रभाव, ब्लैक फंगस से जुड़ी भ्रांतियों, बच्चों के मल्टी-ऑर्गन इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम (डप्ै-ब्) एवं सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के लिए और जागरूकता फ़ैलाने के लिए 2 लाख से अधिक जमीनी स्तर से जुड़े स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को जोड़ा गया ताकि कोरोना की तीसरी लहर बेअसर हो और बच्चों की सुरक्षा हो सके।
इस अभियान से राज्य के सभी सिविल सर्जन के साथ-साथ सभी धर्म के धर्म गुरुओं खास कर आदिवासी समाज के धर्म गुरु पाहन समुदाय को जोड़ा गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि राज्य सरकार संभावित तीसरी लहर के लिए तैयार है, प्रत्येक जिला अस्पताल से लेकर प्रखंड स्तर पर बच्चों के लिए चाइल्ड फ्रेंडली कोविड वार्ड बनाये जा रहे हैं, जिला स्तर पर ऑक्सीजन बैंक का निर्माण किया जा रहा है, बच्चों के इलाज के लिए आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।रिम्स को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया गया है जिसके माध्यम से पूरे राज्य में चिकित्सकों और अस्पतालों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य किया जा सके।
मंत्री बन्ना गुप्ता ने बताया कि ब्लैक फंगस को लेकर भी सरकार विशेष तैयारी कर रही हैं, प्रत्येक जिला के सदर अस्पताल में ब्लैक फंगस के लिए स्पेशल वार्ड बनाया जा रहा है, सरकार इसको राज्य आपदा के रूप में लाने के प्रस्ताव पर समीक्षा कर रही हैं, इसके इलाज के लिए ट्रेनिंग की व्यवस्था की जा रही हैं।
टीकाकरण के बारे में उठते गलत धारणाओं के बारे में मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि इसके कोई गलत साइड इफेक्ट नही हैं, सभी राज्यवासियों से अनुरोध है कि वे टीका जरूर लगाएं, लोगों के बीच जो गलत अफवाह हैं उसे दूर करने के लिए समाज के सभी धर्मगुरुओं, समाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों को आगे बढ़ कर जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।सरकार सभी राज्यवासियों को फ्री वैक्सीन देने के लिए संकल्पित हैं।
अवर मुख्य सचिव अरुण सिंह ने राज्य सरकार के तैयारियों से लोगो को अवगत करवाया। पहले सत्र में इलेनोईस यूनिवर्सिटी, अमेरिका से फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि कश्यप ने महिलाओं व पुरुषों के प्रजनन स्वास्थ्य पर, गर्भवती और दूध पिलाती माताओं पर वैक्सीन के सुरक्षित प्रभाव पर सभी को जागरूक किया। उन्होंने बच्चों में मल्टी-ऑर्गन इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम के लक्षण जिसे अभिवावकों को पहचाना चाहिए उसके बारे में अभिवावकों को जागरूक किया। क्योंकि यह एक बहुत कम होने वाली परन्तु जानलेवा बीमारी है। एमआईएस एंड सी के मामलों नवजात शिशुओं से 18 साल के पोस्ट कोविड के बच्चों में संक्रमण के 3 से 4 हफ़्तों के बाद देखा जाता है। सबसे चिंता की बात यह है कि इस रोग के लक्षण डेंगू, मलेरिया आदि बीमारियों जैसे ही हैं। ऐसे में अगर बच्चों को दो-तीन दिन पेट दर्द, बुखार, उल्टी, दस्त, आंख, मुंह लाल, शरीर पर चकत्ते हों तो सावधान हो जाएं उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जाएँ। समय पर उपचार बच्चे की जान बचा सकता है। रक्तचाप में अचानक गिराव (जिसका लक्षण अत्यधिक थकान है) और साँस का फूलना अडवांस स्टेज के लक्षण होते हैं। एमआईएससी सबसे ज्यादा हृदय, फेफड़े को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।
दूसरे सत्र में टेक्सस यूनिवर्सिटी, अमरीका से बच्चो की ह््रदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पूजा कश्यप ने कोरोना के दौरान प्रभावित बच्चों की ज़िन्दगी बचाने के लिए झारखण्ड सरकार को पेडियेट्रिक आईसीयू में किस तरह की तैयारी करनी चाहिए उसके बारे में सुझाब प्रदान किया। उन्होंने कहा की पेडियेट्रिक में हार्ट एवं पेट की अल्ट्रा साउंड मशीन, हेड सिटी स्कैन, वैंटिलेटर की जरुरत है। उन्होंने सुझाव दिया एडल्ट आईसीयू एक्सपर्ट डॉक्टर्स को प्रशिक्षित कर पेडियेट्रिक एक्सपर्ट बना कर मानव संसाधन की कमी को पूरा किया जा सकता है। एडल्ट हार्ट स्पेसिलिस्ट को प्रशिक्षित कर पेडियेट्रिक हार्ट स्पेसिलिस्ट का काम लिया जा सकता है। हमारे देश में एमआईएसएंड सी के 2 हजार से 3 हजार केस और अमेरिका में करीब 4 हजार मरीज मिलें हैं।आईसीयू में भरती के 85 प्रतिशत मरीजों में हार्ट प्रभावित होता है।
तीसरे सत्र में एम्स नई दिल्ली प्रशिक्षित डॉ. बिभूति कश्यप ब्लैक फंगस से जुड़ी भ्रांतियों को दूर किया। उन्होंने बताया की ब्लैक फंगस की बीमारी में जैसे एक सत्य यह है की वो सुगर के मरीजों में और अनियंत्रित स्टेरॉयड लेने वाले मरीजों में पाया जा रहा है। वैसे ही एक सत्य यह भी है की कुछ 10 प्रतिशत मरीज ऐसे भी हैं जिनको सुगर की बीमारी नहीं हुई है इन मरीजों में इस बीमारी के होने की संभवतः वजहें अत्यधिक भाप लेना, वैक्सीन नहीं लेना, जिंक का सेवन करना और डबल म्यूटेन्ट स्ट्रेन से कोरोना वायरस का इन्फेक्शन होना हो सकता है। हालाकिं इसकी पुष्टि होने के लिए और रिसर्च होनी ज़रूरी है। अतः सुरक्षा की दृष्टि से यह ज़रूरी है की कोरोना से उभरे मरीज साफ़ सफाई का ख़ास ध्यान रखें। साफ़ सुथरे मास्क पहने, धुल मिटटी वाले जगह में न जायें, नियमित रूप से स्नान करें और पैरों को पलंग में आने के पूर्व साफ़ करें ताकि चादर पर मिटटी या पैरों की गन्दगी न आए।
जिन लोगों को कोरोना नहीं हुआ है, उनमे पिछले 2 महीनो में ब्लैक फंगस की बीमारी नहीं देखने को मिली है। उन्होंने कहा की जहां एक ओर ब्लैक फंगस के बारे में लोगों को अवगत करना ज़रूरी है, वहीं इस बात का भी ध्यान रखना होगा की लोगों में अन्नावश्यक भय न फैले। इस मौसम में आँखों की सामान्य खुजली,पानी की समस्या भी आम दिनों से ज्यादा होती है। ऐसे में 50 प्रतिशत मरीज इस सामान्य खुजली पानी को ब्लैक फंगस समझ भयभीत होते नज़र आ रहे हैं। ब्लैक फंगस हेल्प लाइन इसी अनावश्यक भय को घर बैठे दूर करने में सहायक होगा। मरीजों को गैर-जरुरी भय से दूर रखना भी डॉक्टर और सरकार की एक नैतिक जिमेदारी है। जिससे कोरोना के मरीजों का मानसिक स्वास्थ्य स्थिर रहे और एक अनावश्यक भय लोगों के दिमाग में घर न करे। क्योंकि वास्तव में म्युकरमाइकोसिस के केसेस में वृद्धि होने के बावजूद इन मरीजों की कुल संख्या झारखण्ड की आबादी के मुकाबले काफी ज्यादा कम है।
चौथे सत्र में डॉ. स्वरुपा मित्रा (चीफ कैंसर स्त्री रोग विशेषज्ञ, राजीव गाँधी कैंसर इंस्टिट्यूट -रिसर्च सेंटर, नई दिल्ली) ने स्वास्थ्य साहियाओं को सर्वाइकल कैंसर एवं स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचाने का प्रशिक्षण दिया।
वीमेन डॉक्टर्स विंग आई.एम.ए. झारखण्ड की अध्यक्षा डॉ. भारती कश्यप ने स्वास्थ्य मंत्री को जानकारी दी की झारखण्ड के 23 सदर अस्पतालों में से 11 सदर अस्पतालों में सर्वाइकल प्री-कैंसर के इलाज की मशीन की व्यवस्था स्थानीय विधायक के साथ मिलकर हम लोगों ने की थी। जहाँ रांची, खूंटी, गिरिडीह, कोडरमा, हजारीबाग, साहेबगंज में डिजिटल विडियो कोल्पोस्कोप के साथ क्रायो मशीन लगाई गई है वहीं संथाल परगना के बाकि सदर अस्पतालों में क्रायो मशीन और गैस सिलिंडर की व्यवस्था की गई थी। लेकिन गैस सिलिंडर एक बार खाली होने की वजह से सभी जगह काम रुक गया। इस समस्या की ओर स्वास्थ्य मंत्रीका ध्यान आकृष्ट कराया। अगर जिस रफ़्तार से सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन अभियान चल रहा था उस रफ़्तार से 1 से 2 वर्षों में में झारखण्ड से सर्वाइकल कैंसर का खात्मा हो जाता।

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