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भारतीय अध्यात्म और दर्शन परम्पराओं को आगे बढाना हमारी भी जिम्मेदारी: मोदी


नयी दिल्ली:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि पूरी दुनिया के लोग जब आज भारतीय अध्यात्म और दर्शन के बारे में इतना कुछ सोचते हैं, तो हमारी भी ज़िम्मेदारी है कि हम अपनी इन महान परम्पराओं को आगे लेकर जाएँ।श्री मोदी ने रविवार को रेडियो पर प्रसारित होने वाले अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ के संबोधन में देशवासियों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा, “जन्माष्टमी का ये पर्व यानी, भगवान श्री कृष्ण के जन्म का पर्व। हम भगवान के सब स्वरूपों से परिचित हैं, नटखट कन्हैया से ले करके विराट रूप धारण करने वाले कृष्ण तक, शास्त्र सामर्थ्य से ले करके शस्त्र सामर्थ्य वाले कृष्ण तक। कला हो, सौन्दर्य हो, माधुर्य हो, कहाँ-कहाँ कृष्ण है।”
उन्होंने कहा, “जो कालबाह्यी है उसे छोड़ना ही है लेकिन जो कालातीत है उसे आगे भी ले जाना है। हम अपने पर्व मनाएँ, उसकी वैज्ञानिकता को समझे, उसके पीछे के अर्थ को समझे। हर पर्व में कोई न कोई सन्देश है, कोई-न-कोई संस्कार है। हमें इसे जानना भी है, जीना भी है और आने वाली पीढ़ियों के लिए विरासत के रूप में उसे आगे बढ़ाना भी है।”प्रधानमंत्री ने श्री कृष्ण की भक्ति में डूबी एक अमेरिकन नागरिक जदुरानी दासी का ज़िक्र करते हुए कहा, “जदुरानी दासी जी अमेरिकन हैं, जन्म अमेरिका में हुआ, लालन-पालन अमेरिका में हुआ, वह इस्कॉन से जुड़ी हैं, ‘हरे कृष्णा मूवमेंट’ से जुड़ी हुई हैं और उनकी एक बहुत बड़ी विशेषता है कि वह भक्ति कला में वो निपुण है।”
उन्होंने कहा कि इस्कॉन के संस्थापक श्रील प्रभुपाद स्वामी जी की 125वीं जयंती के मौके पर जदुरानी दासी जी भारत आई थीं तो मेरी उनसे बात हुई और मेरे सामने बड़ा सवाल ये था कि जिनका जन्म अमेरिका में हुआ, जो भारतीय भावों से इतना दूर रहीं, वो आखिर कैसे भगवान श्रीकृष्ण के इतने मोहक चित्र बना लेती हैं।
प्रधानमंत्री ने जदुरानी दासी से हुई उनकी बातचीत भी श्रोताओं को सुनाई जिसमे जदुरानी दासी ने भक्ति कला और इससे जुड़ी उनकी आध्यात्मिक भाव को साझा किया।

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