June 13, 2021

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धार्मिक रीति -रिवाज के अनुसार कोविड-19 से ग्रसित शवों की अंत्येष्टि मामले में विस्तृत शपथपत्र सौंपने का निर्देश

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया निर्देश

रांची:- झारखंड उच्च न्यायालय में धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार कोविड-19 से ग्रसित शवों की अंत्येष्टि मामले में राज्य सरकार को विस्तृत शपथपत्र सौंपने का निर्देश दिया है।
उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉ0 रविरंजन और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ में जमशेदपुर की एक महिला संगठन की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को हलफनामा दायर करने का आदेश दिया।
याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रार्थी की अधिवक्ता अपराजिता भरद्वाज ने खंडपीठ को बताया कि केंद्र सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक कोरोना से मरने वालों के शव परिजनों को दिये जा सकते हैं, लेकिन जमशेदपुर के टीएमएच असपताल समेत राज्य के कई अस्पताल ऐसा नहीं कर खुद ही शवों की अंत्येष्टि कर दे रहे हैं। इस जनहित याचिका में टीएमएच को भी पार्टी बनाया गया है। राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता आशुतोष आनंद ने अदालत से कहा कि ऐसा नहीं हैं। उन्हांने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि उनकी जानकारी के अनुसार एक व्यक्ति को उनके परिजनों को शव अस्पताल ने दिया। इस पर हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि यहां आम आदमी की बात हो रही है, अदालत को आम नागरिकों के बारे में सोचना है। अदालत ने मामले में सुनवाई की अगली तिथि 17 जून निर्धारित की है।
गौरतलब है कि जमशेदपुर के तितवंती देवी महिला कल्याण संस्थान की सचिव द्वारा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी है। इसमें कहा गया है कि जमशेदपुर में कोविड-19 संक्रमित मृतकों के परिजनों को उनके धार्मिक रीति रिवाज के अनुसार समुचित ढंग से अंतिम संस्कार नहीं करने दिया जा रहा है। जमशेदपुर प्रशासन जैसे-तैसे शवों का अंतिम संस्कार करा दे रहा है, जो गलत है। सुनवाई के दौरान अदालत को यह भी जानकारी दी गयी कि जमशेदपुर में टीएमएच हॉस्पिटल में जिन संक्रमितों की मौत होती है, उनके शव परिजनों को नहीं देकर जमशेदपुर प्रशासन को दे दिये जाते हैं। जमशेदपुर प्रशासन उनके परिजन को सूचना तो देते हैं कि अमुख तारीख को अमुक स्थान पर अंतिम संस्कार किया जाएगा, लेकिन परिजनों को पता नहीं चल पाता है कि वास्तव में ऐसा हुआ अथवा नहीं। साथ ही जो परिजन शव का अंतिम संस्कार कराना चाहते है अथवा शव लेना चाहते हैं, उन्हें न तो शव दिया जाता है और न अंत्येष्टि में उचित समय पर भाग लेने दिया जाता है।

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