January 22, 2021

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किसानों के साथ हो रही है नाइंसाफी, आवाज उठानेवाले को भेजा जा रहा है जेल : भाकपा

बेगूसराय:- कोरोना काल में अव्यवहारिक लॉकडाउन के चलते किसानों का मक्का घर में ही सड़ने की स्थिति उत्पन्न हो गई है। मक्का का लागत मूल्य भी किसानों का ऊपर नहीं हो सका। सरकार किसानों के साथ नाइंसाफी कर रही है, सरकार को कर्ज में डूबे किसानों का कृषि ऋण माफ करते हुए उन्हें आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना चाहिए। लेकिन सरकार का बिहार के तड़पते लोगों पर ध्यान ही नहीं है। बल्कि यह ग्लब्स पहनाकर वोट गिरवाने को आतुर दिख रही है। यह बातें रविवार को स्वर संगीतालय सलौना के प्रांगण में आयोजित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की बैठक को संबोधित करते हुये जिला सचिव मंडल सदस्य सूर्यकान्त पासवान ने कही। उन्होंने कहा कि किसान, मजदूर, छोटे व्यवसायी, फुटकर दुकानदार सहित आम-अवाम को जो आर्थिक नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई सरकार को करना चाहिये। लेकिन शासन अंग्रेजों की तरह शासन कर रही है, गरीब-गुरबा तंगहाली में जी रहा है, लेकिन आवाज नहीं उठा सकता। आवाज उठानेवाले को जेल में डाला जा रहा है, इसलिये कार्यकर्ता जन-जन तक इस बात को फैलाएं। सहायक अंचल मंत्री संजय राय ने कहा कि बूथ स्तर पर कमिटी का गठन कर विधान सभा चुनाव के लिये कार्यकर्ता कमर कस लें और गांव में जनकोश इकठ्ठा करने का काम शुरू करें। बखरी विधानसभा क्षेत्र हमारा परंपरागत सीट है, यहां हमलोग पूरी ताकत से चुनाव मैदान में जाएंगे।

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